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प्राइवेट स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा से खिलवाड़, प्रशासन की कार्रवाई का इंतजार |
रीवा/मऊगंज। रीवा संभाग के रीवा और नवीन मऊगंज जिले में निजी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक कई निजी स्कूलों में बच्चों को लाने-ले जाने के लिए ऐसे वाहनों का उपयोग किए जाने की शिकायतें सामने आ रही हैं, जिनमें निर्धारित क्षमता से कहीं अधिक बच्चों को बैठाया जा रहा है। आरोप है कि कई वाहनों में 15 से 30 तक बच्चों को ठूंस-ठूंसकर ले जाया जाता है।
स्थानीय स्तर पर सामने आ रही शिकायतों के अनुसार कुछ स्कूलों में बच्चों के परिवहन के लिए ऐसे चार पहिया और तीन पहिया वाहनों का इस्तेमाल किया जा रहा है, जो निर्धारित स्कूल परिवहन मानकों के अनुरूप नहीं हैं। कुछ मामलों में निजी उपयोग के लिए पंजीकृत वाहनों से ही विद्यार्थियों को लाने-ले जाने की बात भी सामने आ रही है। वाहनों के स्वरूप में बदलाव कर अधिक बच्चों को बैठाने की व्यवस्था किए जाने के आरोप भी हैं।
दुर्घटना हुई तो कौन होगा जिम्मेदार?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि क्षमता से अधिक बच्चों को ले जा रहा कोई वाहन दुर्घटनाग्रस्त होता है तो उसकी जिम्मेदारी किसकी होगी? शिकायतों में यह भी कहा गया है कि कई वाहनों के पास बच्चों के परिवहन के लिए आवश्यक दस्तावेज, बीमा और निर्धारित क्षमता के अनुरूप वैध व्यवस्था नहीं होने की स्थिति में दुर्घटना के बाद पीड़ित परिवारों को आर्थिक और कानूनी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।
अभिभावकों का कहना है कि बच्चों को स्कूल पहुंचाना और वापस घर लाना स्कूल प्रबंधन की जिम्मेदारी का महत्वपूर्ण हिस्सा है। ऐसे में परिवहन व्यवस्था में सुरक्षा मानकों की अनदेखी सीधे बच्चों के जीवन को जोखिम में डाल सकती है। इसके बावजूद स्कूलों और वाहनों की नियमित जांच को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
तीन माह बीतने को, अभियान का इंतजार
जुलाई से सितंबर 2026 तक लगभग तीन माह का समय बीतने को है, लेकिन रीवा और मऊगंज जिले में स्कूली वाहनों की व्यापक जांच के लिए प्रभावी अभियान नहीं चलाए जाने को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। शिक्षा विभाग, परिवहन विभाग और पुलिस प्रशासन की संयुक्त कार्रवाई से ही ऐसे वाहनों की वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है।
शिकायतकर्ताओं का कहना है कि किसी बड़ी घटना के बाद जांच कमेटी गठित करने के बजाय पहले से ही स्कूल वाहनों की फिटनेस, परमिट, बीमा, चालक के दस्तावेज, बैठने की क्षमता और सुरक्षा मानकों की जांच की जानी चाहिए। स्कूल संचालकों की जिम्मेदारी भी तय होना जरूरी है, ताकि बच्चों को क्षमता से अधिक बैठाकर परिवहन करने की प्रवृत्ति पर रोक लग सके।
जिम्मेदार विभागों की भूमिका पर सवाल
इस मामले में शिक्षा विभाग, परिवहन विभाग, पुलिस प्रशासन, जिला कलेक्टर और संभागीय प्रशासन की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। यदि नियमों के विपरीत वाहन लंबे समय से बच्चों को ढो रहे हैं तो नियमित निरीक्षण और कार्रवाई की व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
स्थानीय लोगों और अभिभावकों ने मांग की है कि रीवा और मऊगंज जिले के सभी निजी स्कूलों में संचालित छात्र परिवहन वाहनों का विशेष अभियान चलाकर भौतिक सत्यापन किया जाए। वाहनों की फिटनेस, बीमा, परमिट, चालक का लाइसेंस, निर्धारित बैठने की क्षमता और अन्य आवश्यक दस्तावेजों की जांच की जाए। नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर स्कूल प्रबंधन और संबंधित वाहन संचालक की जवाबदेही तय की जाए।
मामले में मानवाधिकार से जुड़े संगठनों और बच्चों की सुरक्षा के लिए काम करने वाली संस्थाओं से भी संज्ञान लेने की मांग की गई है। साथ ही रीवा और मऊगंज क्षेत्र के सांसदों एवं विधायकों का ध्यान भी बच्चों की सुरक्षा से जुड़े इस मुद्दे की ओर आकर्षित कराया गया है।
