संजय गांधी अस्पताल में मोबाइल ले जाने पर प्रतिबंध, अधिवक्ता ने कमिश्नर को सौंपा ज्ञापन

संजय गांधी अस्पताल में मोबाइल ले जाने पर प्रतिबंध, अधिवक्ता ने कमिश्नर को सौंपा ज्ञापन

रीवा। संजय गांधी अस्पताल एवं गांधी मेमोरियल अस्पताल में लगातार सामने आ रहे विवादों के बीच अस्पताल परिसर में मोबाइल फोन ले जाने पर प्रतिबंध लगाए जाने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। इस निर्णय को लेकर अधिवक्ता संघ के पूर्व सचिव संदीप पटेल ने संभाग कमिश्नर को लिखित ज्ञापन सौंपकर अस्पताल परिसर में मोबाइल प्रतिबंध के फैसले पर सवाल उठाए हैं।

ज्ञापन में अधिवक्ता ने कहा कि अस्पताल सार्वजनिक सेवा का केंद्र है, ऐसे में मरीजों और उनके परिजनों की आपात जरूरतों को देखते हुए मोबाइल फोन पूरी तरह प्रतिबंधित करना उचित नहीं है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि किसी मरीज के लिए अचानक दवा, खून या अन्य जरूरी सामग्री की आवश्यकता पड़ जाए तो परिजन संबंधित व्यक्ति को सूचना कैसे देंगे? किसी मरीज की तबीयत अचानक बिगड़ने पर उसके परिजनों को तत्काल सूचना देने में भी मोबाइल महत्वपूर्ण माध्यम है। उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान समय में जांच रिपोर्ट सहित कई महत्वपूर्ण सूचनाएं मोबाइल के माध्यम से ही प्राप्त होती हैं।

संदीप पटेल ने अस्पताल में मोबाइल और कैमरे के इस्तेमाल पर लगाए गए प्रतिबंध को लेकर कहा कि यदि मरीजों की निजता और सुरक्षा के लिए फोटो-वीडियो बनाने पर रोक आवश्यक है तो अस्पताल प्रबंधन को स्पष्ट नियम बनाने चाहिए, लेकिन आपातकालीन संपर्क के लिए मोबाइल रखने की सुविधा पूरी तरह बंद नहीं की जानी चाहिए।

उन्होंने अस्पताल में मरीजों की सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था मजबूत करने की मांग भी उठाई। उनके अनुसार प्रत्येक वार्ड में सीसीटीवी कैमरे लगाए जाने चाहिए और उनकी निगरानी के लिए उचित व्यवस्था होनी चाहिए, ताकि मरीजों के परिजन भी जरूरत के समय अपने मरीज की स्थिति की जानकारी प्राप्त कर सकें।

ज्ञापन में अस्पताल की व्यवस्थाओं को लेकर भी कई सवाल उठाए गए हैं। अधिवक्ता ने आरोप लगाया कि मरीजों को कई बार स्ट्रेचर उपलब्ध कराने, दवा लाने, पानी पहुंचाने तथा विशेष परिस्थितियों में शौचालय तक ले जाने जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए भी परेशानी का सामना करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि मोबाइल पर प्रतिबंध लगाने से पहले अस्पताल की व्यवस्थाओं में सुधार किया जाना जरूरी है।

गौरतलब है कि गांधी मेमोरियल अस्पताल में जच्चा-बच्चा की मौत के मामले के बाद विरोध प्रदर्शन हुए थे। इसके अलावा हाल में डॉक्टरों और मरीजों के परिजनों के बीच विवाद एवं मारपीट की घटनाओं को लेकर भी अस्पताल चर्चा में रहा है। डॉक्टरों और मरीजों के परिजनों की ओर से घटनाओं को लेकर अलग-अलग दावे सामने आए हैं।

अधिवक्ता ने अस्पताल प्रबंधन से सवाल किया कि यदि सोशल मीडिया में प्रसारित खबरें गलत हैं तो उनका खंडन अथवा कानूनी कार्रवाई क्यों नहीं की गई और यदि उनमें व्यवस्थागत कमियों का उल्लेख सही है तो सुधार कब किया जाएगा। उन्होंने कहा कि मोबाइल पर प्रतिबंध लगाने से अस्पताल की कमियां दूर नहीं होंगी, बल्कि मूलभूत स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को बेहतर करने की जरूरत है।

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