आयुष्मान नर्सिंग होम पर कार्रवाई के बाद उठे सवाल, रीवा में स्वास्थ्य संस्थानों की मैपिंग और जांच की मांग

 

आयुष्मान नर्सिंग होम पर कार्रवाई के बाद उठे सवाल, रीवा में स्वास्थ्य संस्थानों की मैपिंग और जांच की मांग

रीवा। स्वास्थ्य विभाग द्वारा 24 सितंबर 2026 को जारी आदेश के बाद आयुष्मान नर्सिंग होम पर की गई कार्रवाई को लेकर रीवा के स्वास्थ्य क्षेत्र में चर्चा तेज हो गई है। कार्रवाई को जनहित में उठाया गया कदम बताते हुए अब सवाल यह उठ रहा है कि यदि स्वास्थ्य सेवाओं में अनियमितताओं की शिकायतें हैं तो कार्रवाई का दायरा केवल एक संस्थान तक सीमित क्यों रहे? सामाजिक संगठनों और नागरिकों की ओर से पूरे रीवा संभाग में संचालित निजी नर्सिंग होम, क्लीनिक, पैथालॉजी और अन्य स्वास्थ्य संस्थानों की व्यापक जांच की मांग उठ रही है।

स्थानीय स्तर पर यह आरोप भी लगाए जा रहे हैं कि रीवा शहर सहित संभाग के विभिन्न क्षेत्रों में ऐसे कई क्लीनिक संचालित हैं, जिनकी वैधानिक स्थिति, चिकित्सकों की उपलब्धता, पंजीयन और उपचार व्यवस्था की जांच आवश्यक है। कुछ लोगों का आरोप है कि अलग-अलग राज्यों से आने वाले चिकित्सक मेडिकल स्टोर या अन्य स्थानों पर बैठकर मरीजों को देखते हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र एवं आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही हो सकती है।

कार्रवाई के दायरे को लेकर सवाल

स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि किसी संस्थान में अनियमितता मिलने पर कार्रवाई की जाती है, तो क्या इसी तरह की जांच अन्य निजी स्वास्थ्य संस्थानों में भी की जाएगी? नागरिकों का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग को जिले और संभाग स्तर पर सभी नर्सिंग होम एवं निजी चिकित्सा संस्थानों की मैपिंग कर उनकी पंजीयन स्थिति, चिकित्सकों की योग्यता, उपलब्ध सुविधाओं, दवा बिक्री और मरीजों से लिए जाने वाले शुल्क की जांच करनी चाहिए।

आयुष्मान मरीजों से अतिरिक्त शुल्क का मुद्दा

आयुष्मान योजना से जुड़े मरीजों को लेकर भी कई तरह की शिकायतें सामने आने की बात कही जा रही है। आरोप है कि कुछ स्थानों पर आयुष्मान कार्ड होने के बावजूद मरीजों से जांच अथवा अन्य सेवाओं के नाम पर अतिरिक्त राशि ली जाती है। यदि ऐसी शिकायतें सही पाई जाती हैं तो संबंधित संस्थानों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की आवश्यकता होगी।

इसी तरह दवाओं और चिकित्सा सामग्री की कीमतों को लेकर भी पारदर्शिता की मांग उठ रही है। सिरिंज, डिस्पोजेबल सामग्री, बोतल और अन्य चिकित्सा उपकरणों पर निर्धारित कीमत तथा मरीजों से वसूली जाने वाली राशि की जांच किए जाने की मांग की जा रही है।

पैथालॉजी और जांच व्यवस्था पर भी निगरानी जरूरी

निजी पैथालॉजी सेंटरों में जांच व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। आरोप लगाए जा रहे हैं कि कुछ स्थानों पर मरीजों को आवश्यकता से अधिक जांच कराने के लिए भेजा जाता है। सोनोग्राफी और अन्य जांचों को लेकर भी चिकित्सकों और जांच केंद्रों के बीच संभावित संबंधों की जांच की मांग की जा रही है। हालांकि इन आरोपों की पुष्टि संबंधित विभागीय जांच के बाद ही हो सकती है।

स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े लोगों का कहना है कि किसी एक संस्थान पर कार्रवाई के बजाय पूरे संभाग में समान मानकों के आधार पर जांच होनी चाहिए। इससे न केवल अवैध या अनियमित स्वास्थ्य संस्थानों की पहचान हो सकेगी, बल्कि वैध रूप से संचालित अस्पतालों और मरीजों के हितों की भी सुरक्षा होगी।

अब देखना यह होगा कि 24 सितंबर के आदेश के बाद स्वास्थ्य विभाग कार्रवाई को केवल एक मामले तक सीमित रखता है या रीवा संभाग में संचालित निजी अस्पतालों, नर्सिंग होम, क्लीनिक, पैथालॉजी और अन्य चिकित्सा संस्थानों की व्यापक मैपिंग कर जांच की प्रक्रिया शुरू करता है।

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