| सड़कों पर बहता खून, सोता प्रशासन: रीवा-मऊगंज संभाग में NH 30 व NH 135 बने 'डेथ ट्रैप |
रीवा/मऊगंज - रीवा नवीन जिला मऊगंज सहित पूरे रीवा संभाग में सड़कों की बदहाली और प्रशासनिक अनदेखी के कारण आए दिन निर्दोष लोगों की जान जा रही है। राष्ट्रीय राजमार्गों से लेकर ग्रामीण इलाकों की मुख्य सड़कों तक, हर तरफ मौत का जाल बिछा हुआ है। वाहनों की संख्या जरूर बढ़ी है, लेकिन दुर्घटनाओं का असली कारण सड़कों की खस्ताहाली और जिम्मेदार अधिकारियों की कुंभकर्णी नींद है। अवैध कट, झाड़ियों से ढके डिवाइडर, गड्ढों में तब्दील सड़कें और बेसहारा मवेशियों की वजह से रीवा और मऊगंज की सड़कें आए दिन लाल हो रही हैं और कई परिवारों के चिराग हमेशा के लिए बुझ रहे हैं।
राष्ट्रीय राजमार्ग 135 व 30: बदहाली का पर्याय बने हाईवे
क्षेत्र के प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्ग NH 30 और NH 135 इस समय सबसे बड़े दुर्घटना केंद्र (Black Spots) बन चुके हैं।
अवैध डिवाइडर कट और नदारद सर्विस रोड: जगह-जगह लोगों ने अपने निजी स्वार्थ के लिए अवैध रूप से डिवाइडर काट दिए हैं, जहाँ से अचानक वाहन सामने आ जाते हैं। हाईवे पर नियमानुसार सर्विस रोड का निर्माण नहीं कराया गया है।
झाड़ियों और मवेशियों का कब्जा: डिवाइडर पर बड़ी-बड़ी झाड़ियां उग आई हैं, जिससे दूसरी तरफ से आने वाला वाहन दिखाई नहीं देता। इन्हीं झाड़ियों और सड़कों के बीच में आवारा मवेशी बैठे रहते हैं, जो तेज रफ्तार गाड़ियों के लिए काल बन रहे हैं।
ग्रामीण सड़कों का बुरा हाल: पटरियों पर कब्जा, मौन खड़ा अमला
राज्य मार्गों और ग्रामीण अंचलों की स्थिति और भी बदतर है। छोटे-बड़े अधिकांश मार्ग गड्ढों में तब्दील हो चुके हैं। गांवों से गुजरने वाली सड़कों की पटरियों (Road Shoulders) पर लोगों ने अवैध कब्जे कर रखे हैं। कहीं पालतू पशुओं को बांधा जा रहा है, तो कहीं अन्य आम निस्तार की सामग्री फैलाकर रखी गई है।
हैरानी की बात यह है कि संबंधित हल्का पटवारी, तहसीलदार और स्थानीय प्रशासन केवल बिल्डरों, पूंजीपतियों, राजनेताओं या निजी स्वार्थ से प्रेरित होकर ही रस्म अदायगी के लिए अतिक्रमण हटाते हैं। आम रास्तों पर फैली इस जानलेवा अव्यवस्था पर इनकी नजर कभी नहीं पड़ती।
केवल एक्सीडेंट केस दर्ज कर औपचारिकता क्यों? असली जिम्मेदारों पर कब होगी कार्रवाई?
जब भी कोई सड़क हादसा होता है, पुलिस केवल वाहन चालक के खिलाफ मामला दर्ज कर औपचारिकता पूरी कर लेती है। लेकिन सवाल यह उठता है कि:
सड़क निर्माण और रखरखाव करने वाली एजेंसियों (MPRDC / NHAI) के अधिकारियों पर कार्रवाई क्यों नहीं होती?
सड़क की पटरियों से अतिक्रमण न हटाने वाले पटवारी, तहसीलदार और जिला कलेक्टर को जिम्मेदार क्यों नहीं बनाया जाता?
कानून किसी को रास्ता रोकने या राष्ट्रीय राजमार्ग जाम करने का अधिकार नहीं देता, लेकिन वही कानून यह भी इजाजत नहीं देता कि विभागीय लापरवाही और प्रशासनिक नाकामी के कारण निर्दोष लोगों की जान जाती रहे और दोषियों पर कोई कार्रवाई न हो।
'दैनिक आज तक 24' की प्रशासन से सीधी अपील
हाल ही में मऊगंज जिले में हुए हादसों के बाद अब आम जनता का अपनी वेदना व्यक्त करने का अधिकार भी छीना जा रहा है। 'दैनिक आज तक 24' समाचार पत्र लगातार तस्वीरों के साथ सड़कों की इन जानलेवा कमियों को उजागर करता आ रहा है, लेकिन प्रशासन गहरी नींद में सोया हुआ है।
इस खबर के माध्यम से हम सत्ता, विपक्ष, शासन और प्रशासनिक वरिष्ठ अधिकारियों का ध्यान आकर्षित करते हैं कि रीवा और मऊगंज जिले के प्रमुख मार्गों की दुर्दशा पर तुरंत संज्ञान लिया जाए। जब तक एमपीआरडीसी, संबंधित निर्माण एजेंसियों, जिला प्रशासन और लापरवाह राजस्व अधिकारियों को सीधे तौर पर इन दुर्घटनाओं का दोषी ठहराकर उन पर कार्रवाई नहीं की जाएगी, तब तक रीवा संभाग की सड़कों पर खून बहना बंद नहीं होगा।