| ऑपरेशन प्रहार-2.0 में मऊगंज पुलिस की कार्रवाई, 365 ग्राम गांजा और 18 शीशी नशीली कफ सिरप जब्त |
मऊगंज/रीवा - मादक पदार्थों के अवैध कारोबार के खिलाफ चलाए जा रहे ऑपरेशन प्रहार-2.0 के तहत मऊगंज जिले में पुलिस ने अलग-अलग कार्रवाई करते हुए 365 ग्राम गांजा और 18 शीशी नशीली कफ सिरप जब्त की है। पुलिस ने इन मामलों में तीन आरोपियों के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट सहित संबंधित धाराओं में प्रकरण दर्ज किया है। वहीं, मादक पदार्थों से जुड़े दो मामलों में फरार चल रहे आरोपी की गिरफ्तारी पर पुलिस अधीक्षक मऊगंज द्वारा 10 हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया है।
भीर गांव में महिला के कब्जे से 365 ग्राम गांजा बरामद
नईगढ़ी थाना पुलिस ने 11 अगस्त को ग्राम भीर के पास कार्रवाई करते हुए गीता कुशवाहा के कब्जे से 365 ग्राम गांजा बरामद किया। पुलिस के अनुसार जब्त गांजे की अनुमानित कीमत करीब 6 हजार रुपये है। आरोपी महिला के विरुद्ध एनडीपीएस एक्ट की धारा 8/20(बी) के तहत प्रकरण दर्ज कर मामले की विवेचना की जा रही है।
हाईवे पर नशीली कफ सिरप के साथ दो गिरफ्तार
इसी तरह हनुमना थाना पुलिस ने नेशनल हाईवे पर कार्रवाई करते हुए विकास विश्वकर्मा और राहुल सेन को गिरफ्तार किया। दोनों के कब्जे से 18 शीशी ऑनरेक्स कफ सिरप बरामद की गई, जिसकी अनुमानित कीमत 3,627 रुपये बताई गई है। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट की धारा 8, 21, 22 तथा मध्यप्रदेश ड्रग कंट्रोल एक्ट की धारा 5/13 के तहत प्रकरण दर्ज कर दोनों को न्यायालय में पेश किया।
फरार आरोपी की गिरफ्तारी पर 10 हजार का इनाम
मादक पदार्थों से जुड़े दो अलग-अलग एनडीपीएस मामलों में फरार चल रहे राजकिशोर उर्फ राजू पटेल की गिरफ्तारी के लिए पुलिस अधीक्षक मऊगंज ने 10 हजार रुपये का इनाम घोषित किया है। पुलिस द्वारा आरोपी के संभावित ठिकानों पर लगातार दबिश देकर उसकी तलाश की जा रही है।
छोटी कार्रवाई के साथ बड़े नेटवर्क पर भी उठ रहे सवाल
ऑपरेशन प्रहार-2.0 के तहत पुलिस की इन कार्रवाइयों के बीच जिले में नशीले पदार्थों के अवैध कारोबार के बड़े नेटवर्क और सप्लाई चैन को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। गांजा, नशीली कफ सिरप और अन्य मादक पदार्थ आखिर जिले में कहां से पहुंच रहे हैं और इनके थोक सप्लायर कौन हैं, इसकी तह तक पहुंचना पुलिस के लिए बड़ी चुनौती है।
सिर्फ कम मात्रा में गांजा या कुछ शीशियां बरामद कर कार्रवाई दर्ज करने के बजाय पुलिस यदि इन मामलों के मुख्य सप्लायर, थोक विक्रेता और वितरण नेटवर्क तक पहुंचे तो नशे के अवैध कारोबार पर अधिक प्रभावी अंकुश लगाया जा सकता है। इसी तरह अवैध शराब के मामलों में भी यह पता लगाया जाना जरूरी है कि जब्त शराब की आपूर्ति कहां से हुई और इसके पीछे कौन लोग सक्रिय हैं।
स्थानीय स्तर पर पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर भी समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं। ऐसे में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए बड़ी कार्रवाइयों में शामिल पुलिसकर्मियों की भूमिका, घटनास्थल की कार्रवाई, सीसीटीवी फुटेज और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर निष्पक्ष समीक्षा की आवश्यकता है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।
ऑपरेशन प्रहार-2.0 की वास्तविक सफलता तभी मानी जाएगी, जब कार्रवाई छोटे कैरियरों तक सीमित न रहकर नशे के कारोबार को संचालित करने वाले मुख्य नेटवर्क और उसके आर्थिक स्रोतों तक पहुंचे। पुलिस का कहना है कि जिले में मादक पदार्थों के अवैध कारोबार के खिलाफ अभियान आगे भी जारी रहेगा और इसमें संलिप्त लोगों के विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी।