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| रीवा: 80 वर्षों से रह रहे भूमिहीन आदिवासियों को बेदखली का नोटिस, मचे हड़कंप के बीच कलेक्टर ने दिया बड़ा आश्वासन |
रीवा: मध्य प्रदेश के रीवा जिले की सिरमौर तहसील अंतर्गत ग्राम बधरी से एक बड़ा और संवेदनशील मामला सामने आया है। यहाँ पिछले लगभग 80 वर्षों से शासकीय भूमि पर निवास कर रहे भूमिहीन आदिवासी और हरिजन (दलित) परिवारों को सिरमौर तहसीलदार द्वारा अचानक जगह खाली करने का नोटिस थमा दिया गया। इतना ही नहीं, आरोप है कि तहसीलदार ने ग्रामीणों को दो दिनों के भीतर कब्जा हटाने की मौखिक हिदायत भी दे दी। बारिश के इस मौसम में अचानक मिले बेदखली के आदेश से दर्जनों परिवारों के सामने रहने का गंभीर संकट खड़ा हो गया है।
कलेक्टर कार्यालय पहुंचे पीड़ित, ज्ञापन सौंपकर लगाई गुहार
प्रशासनिक रवैये से घबराए और परेशान पीड़ित ग्रामीणों का एक प्रतिनिधिमंडल आज रीवा कलेक्टर कार्यालय पहुंचा। ग्रामीणों ने सामूहिक रूप से रीवा कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर अपनी आपबीती सुनाई और न्याय की गुहार लगाई।
ग्रामीणों ने तर्क दिया कि:
वे पिछले 80 वर्षों (कई पीढ़ियों) से इस शासकीय भूमि पर निवास कर रहे हैं।
मध्य प्रदेश शासन के नियमों (नियम 3) के तहत उन्हें यहाँ रहने का विधिक अधिकार प्राप्त है।
कड़कड़ाती बारिश और मानसून के समय में बेदखली की यह कार्रवाई उनके और उनके बच्चों के साथ अन्याय है।
कलेक्टर का बड़ा आश्वासन: "जांच कराएंगे, किसी को बेदखल नहीं किया जाएगा"
मामले की संवेदनशीलता और गंभीरता को देखते हुए रीवा कलेक्टर ने ग्रामीणों से मुलाकात की और उन्हें एक बड़ा आश्वासन दिया। कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि इस पूरी भूमि का प्रशासनिक और तकनीकी रूप से विस्तृत निरीक्षण कराया जाएगा।
कलेक्टर ने ग्रामीणों को आश्वस्त करते हुए कहा:
"यदि जमीनी परिस्थितियां अनुकूल पाई जाती हैं, तो किसी भी ग्रामीण को उनकी जगह से बेदखल नहीं किया जाएगा। यदि नियमानुसार संभव हुआ तो उस क्षेत्र को विधिवत 'आबादी क्षेत्र' घोषित कर ग्रामीणों को पट्टा व कब्जा दिया जाएगा।"
तहसीलदार की भूमिका की भी होगी जांच
कलेक्टर ने इस बात पर भी कड़ा संज्ञान लिया कि आखिर किन परिस्थितियों और कारणों के तहत सिरमौर तहसीलदार मौके पर पहुंची थीं और उन्होंने ग्रामीणों को बेदखल करने का मौखिक निर्देश अथवा नोटिस जारी किया। उन्होंने आश्वस्त किया कि इस पूरी प्रक्रिया की गहन जांच कराई जाएगी।
प्रशासन से मिले इस मौखिक आश्वासन के बाद फिलहाल परेशान ग्रामीणों को बड़ी राहत मिली है। हालांकि, ग्रामीणों का कहना है कि वे अब जमीनी स्तर पर निष्पक्ष जांच और आबादी घोषित किए जाने के आधिकारिक आदेश का इंतजार कर रहे हैं।
