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| शिक्षा सुधार के दावों पर सवाल: रीवा–मऊगंज के ग्रामीण स्कूलों में पेयजल और शौचालय व्यवस्था बदहाल होने के आरोप |
रीवा - शासन स्तर पर शासकीय विद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने, विद्यार्थियों को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने तथा आदर्श शिक्षण वातावरण विकसित करने के लगातार दावे किए जा रहे हैं। दूसरी ओर रीवा जिले की ग्राम पंचायत गढ़, जनपद पंचायत गंगेव, तहसील मनगवा के एक शासकीय विद्यालय से सामने आए वीडियो और स्थानीय लोगों की शिकायतों ने इन दावों पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। स्थानीय स्तर पर प्राप्त जानकारी के अनुसार 6 अगस्त 2026 को रिकॉर्ड किए गए एक वीडियो में विद्यालय परिसर की व्यवस्थाओं को लेकर कई कमियां दिखाई देने का दावा किया जा रहा है। वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है, लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि रीवा एवं नवीन मऊगंज जिले सहित रीवा संभाग के अनेक ग्रामीण शासकीय प्राथमिक विद्यालयों में पेयजल, शौचालय और स्वच्छता जैसी बुनियादी सुविधाओं की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।
ग्रामीणों का आरोप है कि कई विद्यालयों में शौचालय या तो बने ही नहीं हैं, और जहां बने भी हैं वहां नियमित जलापूर्ति न होने के कारण उनका उपयोग नहीं हो पा रहा है। परिणामस्वरूप अनेक शौचालय लंबे समय से बंद पड़े हैं और केवल औपचारिक निर्माण बनकर रह गए हैं। पेयजल व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि भारत सरकार, मध्य प्रदेश शासन तथा विभिन्न योजनाओं के माध्यम से विद्यालयों में स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से पानी की टंकियां, आरओ अथवा अन्य जल व्यवस्था स्थापित करने के प्रयास किए गए थे, लेकिन कई स्थानों पर इनका लाभ विद्यार्थियों तक प्रभावी रूप से नहीं पहुंच पा रहा है। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि संबंधित विभाग द्वारा अभी नहीं की गई है।
ग्राम पंचायत गढ़ के एक प्राथमिक विद्यालय के संबंध में ग्रामीणों का कहना है कि परिसर में पूर्व से हैंडपंप उपलब्ध था। बाद में मोटर पंप भी लगाया गया, किंतु वह अब तक नियमित रूप से चालू नहीं हो सका। आरोप है कि पानी उपलब्ध न होने के कारण शौचालयों का उपयोग नहीं हो पाता और छोटे-छोटे विद्यार्थियों को पीने के पानी के लिए भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। इस विषय में विद्यालय प्रबंधन से जानकारी लेने का प्रयास किया गया, लेकिन संबंधित अधिकारियों का हवाला देते हुए कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं कराई गई। विकासखंड स्तर तथा जिला स्तर के अधिकारियों से भी संपर्क करने का प्रयास किया गया। हालांकि समाचार लिखे जाने तक शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों एवं जिला पंचायत के जिम्मेदार अधिकारियों से विस्तृत और संतोषजनक पक्ष प्राप्त नहीं हो सका।
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा केवल पुस्तकों और शिक्षकों तक सीमित नहीं होती, बल्कि स्वच्छ पेयजल, उपयोगी शौचालय, सुरक्षित परिसर और मूलभूत सुविधाएं भी उतनी ही आवश्यक हैं। यदि इन सुविधाओं का अभाव रहेगा तो इसका सीधा प्रभाव विद्यार्थियों की उपस्थिति, स्वास्थ्य और शिक्षा की गुणवत्ता पर पड़ेगा। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों के अनेक अभिभावक अब अपने बच्चों को निजी विद्यालयों में भेजने की कोशिश कर रहे हैं। उनका मानना है कि शासकीय विद्यालयों में मूलभूत सुविधाओं की कमी भी विद्यार्थियों की घटती उपस्थिति का एक प्रमुख कारण बन रही है। हालांकि इस संबंध में आधिकारिक आंकड़ों की पुष्टि संबंधित विभाग द्वारा की जानी शेष है।
अब आवश्यकता इस बात की है कि संबंधित विभाग पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराए, विद्यालयों में पेयजल एवं शौचालय व्यवस्था का वास्तविक आकलन करे तथा जहां भी कमियां हों, वहां तत्काल सुधारात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। शिक्षा व्यवस्था की मजबूती केवल घोषणाओं से नहीं, बल्कि विद्यालयों में उपलब्ध वास्तविक सुविधाओं से तय होगी।
(नोट: यह समाचार स्थानीय स्तर पर प्राप्त वीडियो, नागरिकों के दावों एवं उपलब्ध जानकारी पर आधारित है। वीडियो और आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। यदि संबंधित विभाग अथवा अधिकारी अपना पक्ष, स्पष्टीकरण या तथ्य उपलब्ध कराते हैं, तो उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।)
