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| रीवा–मऊगंज के शासकीय विद्यालयों में बच्चों से कराई जा रही सफाई? शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल |
रीवा/मऊगंज - मध्य प्रदेश सरकार प्राथमिक शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने, विद्यार्थियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने तथा आदर्श विद्यालयों के निर्माण के बड़े-बड़े दावे करती है। दूसरी ओर रीवा एवं नवीन मऊगंज जिले के ग्रामीण क्षेत्रों से सामने आ रहे दृश्य इन दावों पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े करते दिखाई देते हैं। 6 अगस्त 2026 को प्रातः लगभग 10 बजे का एक वीडियो ग्रामीण क्षेत्र के एक शासकीय विद्यालय से सामने आया है, जिसमें छोटे-छोटे विद्यार्थी विद्यालय परिसर, कक्षाओं, ब्लैकबोर्ड, कुर्सी-टेबल तथा अन्य स्थानों की सफाई करते हुए दिखाई दे रहे हैं। इस वीडियो की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है, लेकिन स्थानीय लोगों का दावा है कि अनेक प्राथमिक एवं माध्यमिक शालाओं में नियमित रूप से विद्यार्थियों से सफाई कराई जाती है।
इस संबंध में संबंधित अधिकारियों से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन स्पष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं हो सकी। अधिकारियों ने शासन स्तर की व्यवस्थाओं का हवाला दिया, जबकि यह नहीं बताया जा सका कि विद्यालयों की नियमित सफाई की जिम्मेदारी किसकी है और यदि सफाई कर्मचारी उपलब्ध नहीं हैं तो इसका समाधान क्या है। सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि 6 से 10 वर्ष तक के मासूम बच्चों का मुख्य दायित्व शिक्षा ग्रहण करना है या विद्यालय की साफ-सफाई करना? ग्रामीण क्षेत्रों के अनेक अभिभावकों का कहना है कि उनके बच्चे घर पर भी इस प्रकार का कार्य नहीं करते, लेकिन विद्यालय पहुंचने पर उनसे झाड़ू लगवाना, कक्षाओं और फर्नीचर की सफाई करवाना सामान्य बात बन गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि विद्यालयों में स्वच्छता अत्यंत आवश्यक है, लेकिन इसके लिए स्थायी सफाई व्यवस्था होना भी उतना ही आवश्यक है। यदि छोटे बच्चों से नियमित रूप से सफाई कराई जाती है, तो यह शिक्षा के उद्देश्य और बाल-अनुकूल विद्यालय की अवधारणा के विपरीत माना जा सकता है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि ब्लॉक, संकुल एवं जिला स्तर के कार्यालयों में सहायक कर्मचारियों की आवश्यकता अपनी जगह है, लेकिन जिन विद्यालयों में सैकड़ों छोटे बच्चे अध्ययन करते हैं, वहां नियमित सफाई कर्मचारियों की उपलब्धता सुनिश्चित की जानी चाहिए। विद्यालयों में स्वच्छ पेयजल, साफ शौचालय, स्वच्छ कक्षाएं और सुरक्षित वातावरण बच्चों का अधिकार है।
यह भी प्रश्न उठाया जा रहा है कि ग्राम पंचायत, जनपद पंचायत, जिला पंचायत, विधायक एवं सांसद सहित जनप्रतिनिधि अपने क्षेत्र के शासकीय विद्यालयों का नियमित निरीक्षण क्यों नहीं करते? यदि कहीं सफाई व्यवस्था नहीं है, तो उसके लिए स्थायी समाधान क्यों नहीं खोजा जा रहा? शिक्षा केवल पुस्तकों तक सीमित नहीं होती। स्वच्छ, सुरक्षित और सम्मानजनक वातावरण में अध्ययन करने का अधिकार प्रत्येक विद्यार्थी को है। सरकार की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाएं अपनी जगह महत्वपूर्ण हैं, लेकिन यदि सरकारी विद्यालयों को आधुनिक सुविधाओं, पर्याप्त स्टाफ, नियमित सफाई व्यवस्था और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से सशक्त बनाया जाए तो भविष्य की पीढ़ी अधिक सक्षम और आत्मनिर्भर बन सकती है।
(नोट: यह समाचार स्थानीय स्तर पर प्राप्त वीडियो एवं नागरिकों के दावों पर आधारित है। संबंधित वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। यदि संबंधित विभाग अपना पक्ष या स्पष्टीकरण उपलब्ध कराता है, तो उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।)
