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| बस किराया बढ़ा, लेकिन महिलाओं-छात्रों और बुजुर्गों की राहत का क्या? रीवा में सरकार के फैसले पर उठे सवाल |
रीवा। मध्यप्रदेश में मंजिली बसों का नया अधिकतम यात्री किराया लागू किए जाने के बाद रीवा जिले में इसे लेकर चर्चा तेज हो गई है। परिवहन विभाग ने सामान्य बसों का मूल किराया 2 रुपये प्रति किलोमीटर निर्धारित किया है, जबकि न्यूनतम टिकट किराया 10 रुपये तय किया गया है। अलग-अलग श्रेणी की बसों के किराये में भी वृद्धि की गई है। सरकार का तर्क अपनी जगह हो सकता है कि बढ़ती लागत और परिवहन व्यवस्था को देखते हुए किराये का पुनर्निर्धारण जरूरी था, लेकिन सवाल यह है कि क्या किराया बढ़ाते समय समाज के उन वर्गों का भी ध्यान रखा गया, जो रोजाना बसों पर निर्भर हैं? विशेष रूप से महिलाएं, विद्यार्थी, दिव्यांग और बुजुर्ग बड़ी संख्या में सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल करते हैं। नए किराया आदेश में इनके लिए किसी विशेष रियायत का स्पष्ट उल्लेख नहीं होने से सवाल खड़े हो रहे हैं।
रोज 20 से 50 किलोमीटर सफर करने वाले विद्यार्थियों पर असर
रीवा और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं रोज स्कूल और कॉलेज जाने के लिए बसों पर निर्भर रहते हैं। कई विद्यार्थी अपने गांव से 20 से 50 किलोमीटर दूर शिक्षण संस्थानों तक यात्रा करते हैं। ऐसे विद्यार्थियों के लिए प्रतिदिन बस किराये में मामूली बढ़ोतरी भी महीने के अंत तक बड़ा आर्थिक बोझ बन सकती है। ग्रामीण और निम्न आय वर्ग के परिवारों के बच्चों के लिए शिक्षा पहले ही परिवहन, किताबों और अन्य खर्चों के कारण चुनौतीपूर्ण होती जा रही है। ऐसे में सरकार से सवाल है कि यदि किराया बढ़ाना जरूरी था तो छात्रों के लिए रियायती पास या विशेष किराया व्यवस्था क्यों नहीं की गई?
महिलाओं और लाड़ली बहनों के लिए क्या राहत?
सरकार महिला सशक्तीकरण और लाड़ली बहना जैसी योजनाओं के माध्यम से महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत करने की बात करती है। लेकिन दूसरी तरफ रोजमर्रा की आवाजाही का खर्च बढ़ता है तो उसका सीधा असर घरेलू बजट पर पड़ता है। ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाएं बाजार, अस्पताल, बैंक, सरकारी कार्यालय और अन्य जरूरी कार्यों के लिए बसों पर निर्भर रहती हैं। ऐसे में सरकार को कम से कम महिलाओं के लिए रियायती किराया या विशेष पास जैसी व्यवस्था पर विचार करना चाहिए।
दिव्यांग और बुजुर्गों के लिए भी हो विशेष व्यवस्था
दिव्यांग और वरिष्ठ नागरिकों के लिए सार्वजनिक परिवहन केवल सुविधा नहीं, बल्कि कई मामलों में आवश्यकता है। इन वर्गों की आय के साधन सीमित हो सकते हैं और नियमित आवागमन में अतिरिक्त खर्च उनके लिए परेशानी पैदा कर सकता है। यदि सरकार ने किराया बढ़ाने का निर्णय लिया है तो उसके साथ दिव्यांगों और बुजुर्गों के लिए विशेष छूट का प्रावधान भी किया जाना चाहिए था।
नई किराया दरों में किस श्रेणी की बस कितनी महंगी?
नए प्रावधानों के अनुसार सामान्य बस का मूल किराया 2 रुपये प्रति किलोमीटर और न्यूनतम किराया 10 रुपये तय किया गया है। वहीं विभिन्न बस श्रेणियों में सामान्य किराये की तुलना में अधिकतम वृद्धि इस प्रकार निर्धारित की गई है—
- रात्रि बस सेवा—सामान्य किराये से 10 प्रतिशत अधिक
- डीलक्स नॉन-एसी—25 प्रतिशत अधिक
- स्लीपर बस—40 प्रतिशत अधिक
- डीलक्स एसी—50 प्रतिशत अधिक
- सुपर लग्जरी एसी—75 प्रतिशत अधिक
निर्देशों के अनुसार डीलक्स, स्लीपर और लग्जरी बसों पर अलग से अतिरिक्त नाइट चार्ज नहीं लगेगा। एक्सप्रेस बस सेवाओं के लिए भी यात्रियों से अतिरिक्त शुल्क नहीं लेने का प्रावधान बताया गया है।
सरकार को आदेश पर फिर करना चाहिए विचार
किराया बढ़ाना सरकार का नीतिगत निर्णय हो सकता है, लेकिन सार्वजनिक परिवहन का उद्देश्य केवल राजस्व या परिवहन संचालकों की लागत पूरी करना नहीं होना चाहिए। यह आम आदमी की रोजमर्रा की जरूरत से भी जुड़ा हुआ है। सरकार यदि वास्तव में ‘सबका साथ, सबका विकास’ और जनकल्याण की भावना के साथ काम कर रही है तो नए किराया आदेश की समीक्षा कर महिलाओं, विद्यार्थियों, दिव्यांगों और बुजुर्गों के लिए विशेष रियायत का प्रावधान करने पर विचार करना चाहिए। सवाल सीधा है—बस का किराया बढ़ाते समय सरकार ने यात्रियों की जेब देखी, लेकिन क्या उसने उनकी मजबूरी भी देखी? रीवा जैसे बड़े ग्रामीण क्षेत्र वाले जिले में इस सवाल को नजरअंदाज करना आने वाले दिनों में जनता के लिए आर्थिक परेशानी बढ़ा सकता है। अब सरकार से उम्मीद है कि वह किराया वृद्धि के साथ राहत का रास्ता भी निकालेगी।
