गौ अभयारण्य से कई किलोमीटर दूर जंगल में मिले गोवंश के अवशेष, व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल

गौ अभयारण्य से कई किलोमीटर दूर जंगल में मिले गोवंश के अवशेष, व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल

रीवा - जिले के पूर्वा क्षेत्र स्थित गौ अभयारण्य की व्यवस्थाओं को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। सामाजिक कार्यकर्ता प्रमोद शर्मा ने गौ अभयारण्य से करीब 5 से 7 किलोमीटर दूर जंगल के भीतर बड़ी संख्या में मृत गोवंश के अवशेष और हड्डियां मिलने का दावा करते हुए वीडियो जारी किया है। वीडियो में जंगल के अलग-अलग हिस्सों में पशुओं की हड्डियां और अवशेष दिखाई दे रहे हैं। मौके पर भारी दुर्गंध होने की बात भी कही गई है।

शर्मा के अनुसार, ग्रामीणों से लगातार मिल रही शिकायतों के बाद उन्होंने जंगल के अंदर जाकर मौके की स्थिति देखी। उनका दावा है कि अभयारण्य से काफी दूर जंगल के कई हिस्सों में गोवंश के शव और उनके अवशेष पड़े मिले। कुछ स्थानों पर हड्डियों के ढेर दिखाई देने की बात कही गई है। वीडियो में मृत पशुओं के अवशेषों को जंगली जानवरों और पक्षियों द्वारा खाए जाने का भी दावा किया गया है।

‘जंगल में कैसे पहुंच रहे मृत पशु?’

इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि यदि मृत गोवंश गौ अभयारण्य से संबंधित है, तो उनके शव या अवशेष अभयारण्य से कई किलोमीटर दूर जंगल में कैसे पहुंच रहे हैं? क्या मृत पशुओं के निस्तारण के लिए निर्धारित व्यवस्था है और उसका पालन किया जा रहा है? यदि पशुओं की मौत बीमारी अथवा अन्य कारणों से हुई है तो क्या उनका पशु चिकित्सकों द्वारा परीक्षण और पोस्टमार्टम कराया गया? इन सवालों का जवाब आधिकारिक जांच के बाद ही सामने आ सकेगा।

गोवंश की संख्या और फंड के उपयोग पर भी सवाल

प्रमोद शर्मा ने गौ अभयारण्य में पंजीकृत गोवंश की वास्तविक संख्या और उनके नाम पर मिलने वाली राशि के उपयोग को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि बड़ी संख्या में गोवंश का पंजीयन होने के बावजूद जमीन पर पशुओं के भोजन, उपचार और संरक्षण की स्थिति संतोषजनक नहीं दिखाई दे रही है। उन्होंने मांग की है कि गौ अभयारण्य में पंजीकृत गोवंश की संख्या का भौतिक सत्यापन कराया जाए। साथ ही प्रतिदिन उपलब्ध कराए जाने वाले चारे-भूसे, पशु चिकित्सा, दवाइयों, मृत पशुओं के निस्तारण तथा सरकारी और सीएसआर मद से प्राप्त राशि का भी विस्तृत ऑडिट कराया जाए।

‘कई बार प्रशासन को दी गई जानकारी’

शिकायतकर्ता का कहना है कि इस तरह की स्थिति की जानकारी पहले भी प्रशासन तक पहुंचाई जा चुकी है। उन्होंने दावा किया कि ग्रामीणों की शिकायतों के आधार पर वे पूर्व में भी जंगल के अंदर जाकर वीडियो बना चुके हैं। इसके बावजूद यदि ऐसी स्थिति दोबारा सामने आ रही है तो यह गौवंश संरक्षण की व्यवस्था पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है। शर्मा ने मुख्यमंत्री, जिला प्रशासन और संबंधित विभाग से मांग की है कि पूरे मामले की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच कराई जाए तथा यदि जांच में किसी अधिकारी, संस्था या जिम्मेदार व्यक्ति की लापरवाही अथवा वित्तीय अनियमितता सामने आती है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाए।

आरोपों की आधिकारिक पुष्टि बाकी

हालांकि, वीडियो में किए गए दावों और मृत गोवंश की संख्या संबंधी आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। यह भी स्पष्ट नहीं है कि जंगल में मिले सभी अवशेष गौ अभयारण्य के गोवंश के ही हैं या नहीं। इसलिए पूरे मामले में प्रशासनिक एवं पशु चिकित्सा विभाग की जांच महत्वपूर्ण होगी। यदि मौके से मिले अवशेषों की पहचान, पशुओं की मौत के कारण, मृत पशुओं के निस्तारण की प्रक्रिया तथा अभयारण्य के रिकॉर्ड का मिलान कराया जाता है, तो पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर सामने आ सकती है। अब सवाल यह है कि गौ अभयारण्य की व्यवस्था पर लगाए जा रहे इन गंभीर आरोपों की प्रशासन कब जांच कराता है और जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं।



Post a Comment

Previous Post Next Post