| बिना डिग्री-लाइसेंस के चल रहीं 'मौत की दुकानें'; बीएमओ सचिन करकुरे ने फोन तक उठाना नहीं समझा मुनासिब |
शहडोल - जिले के बुढार विकासखंड अंतर्गत ग्रामीण एवं कसबाई इलाकों में फर्जी झोलाछाप डॉक्टरों का जाल तेजी से फैलता जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों की लापरवाही और मैदानी स्तर पर उदासीनता के चलते रोशन पनिका और धनंजय मजूमदार जैसे कथित झोलाछाप डॉक्टर धड़ल्ले से क्लिनिक चला रहे हैं। दवाइयों और गलत इलाज के नाम पर ये फर्जी डॉक्टर सीधे तौर पर मासूम ग्रामीण जनता की जिंदगी से खिलवाड़ कर रहे हैं। यदि स्वास्थ्य विभाग ने जल्द ही इस मामले में कठोर कदम नहीं उठाए, तो क्षेत्र में किसी निर्दोष की जान जाना तय माना जा रहा है।
जेब भरने के चक्कर में जिंदगी से खिलवाड़
स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, क्षेत्र में अवैध रूप से जमे ये झोलाछाप डॉक्टर केवल अपनी जेब भरने के चक्कर में मरीजों को हाई डोज दवाइयां, हैवी एंटीबायोटिक्स और गलत इंजेक्शन दे रहे हैं। बिना किसी मान्यता प्राप्त डिग्री या डॉक्टरी लाइसेंस के चल रहे इन अवैध सेंटरों पर रोज दर्जनों मरीज पहुँचते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के झोलाछाप डॉक्टरों द्वारा दिए जाने वाले गलत इलाज से कभी भी कोई बड़ी अनहोनी या असमय मौत हो सकती है। इसके बावजूद, प्रशासनिक सुस्ती यह दर्शाती है कि जिम्मेदार अधिकारी किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहे हैं।
स्वास्थ्य विभाग की फील्ड पर सक्रियता शून्य
क्षेत्रवासियों की मांग है कि स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को केवल कागजी निरीक्षण छोड़कर मैदानी (फील्ड) स्तर पर उतरना होगा। जब तक इन झोलाछाप डॉक्टरों के ठिकानों पर छापेमारी कर सीलिंग की कार्रवाई और एफआईआर (FIR) दर्ज नहीं की जाएगी, तब तक इनका दुस्साहस कम नहीं होगा। स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को इस पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए तुरंत विशेष उड़नदस्ते की टीम गठित कर कार्रवाई करनी चाहिए।
इनका कहना है:
इस पूरे मामले में जब बुढार विकासखंड के खंड चिकित्सा अधिकारी (BMO) डॉ. सचिन करकुरे के आधिकारिक मोबाइल नंबर (9644671795) पर संपर्क करने का प्रयास किया गया, तो उन्होंने फोन उठाना उचित नहीं समझा। बीएमओ द्वारा फोन न उठाए जाने के कारण इस गंभीर विषय पर उनका पक्ष और प्रतिक्रिया अप्राप्त रही।