मऊगंज में पत्रकारों का विरोध तेज: थाना प्रभारी राम सिंह पटेल पर कार्रवाई की मांग, 15 अगस्त को काली पट्टी बांधकर कवरेज की चेतावनी

मऊगंज में पत्रकारों का विरोध तेज: थाना प्रभारी राम सिंह पटेल पर कार्रवाई की मांग, 15 अगस्त को काली पट्टी बांधकर कवरेज की चेतावनी

मऊगंज - खटखरी में हुए सड़क हादसे की कवरेज के दौरान पत्रकारों के साथ कथित अभद्रता और झूठे मुकदमे में फंसाकर जेल भेजने की धमकी देने का मामला अब काफी तूल पकड़ता जा रहा है। मऊगंज थाना प्रभारी राम सिंह पटेल के अड़ियल रवैये से आक्रोशित पत्रकारों ने बुधवार को कलेक्टर के नाम अपर कलेक्टर पीके पांडे को ज्ञापन सौंपकर सख्त कार्रवाई की मांग की है। पत्रकारों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही आरोपी थाना प्रभारी पर कार्रवाई नहीं की गई, तो वे 15 अगस्त (स्वतंत्रता दिवस) के राष्ट्रीय पर्व पर हाथों में काली पट्टी बांधकर विरोध स्वरूप कवरेज करेंगे।

क्या है पूरा मामला?

पत्रकारों द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, घटना 9 अगस्त की रात की है। खटखरी इलाके में एक भीषण सड़क हादसा हुआ था, जिसकी कवरेज और समाचार संकलन के लिए स्थानीय पत्रकार मौके पर पहुंचे थे। आरोप है कि घटना स्थल पर मौजूद मऊगंज थाना प्रभारी राम सिंह पटेल ने पत्रकारों के साथ कथित तौर पर बेहद अभद्र व्यवहार किया। उन्होंने न सिर्फ पत्रकारों को सार्वजनिक रूप से अपमानित किया और कवरेज करने से रोका, बल्कि यह धमकी भी दी कि यदि उन्होंने खबर बनाई तो उन पर मुकदमा दर्ज कर जेल भेज दिया जाएगा।

तीन दिन की समयावधि खत्म, कार्रवाई न होने पर बढ़ा आक्रोश

थाना प्रभारी के इस रवैये से आहत पत्रकारों ने 10 अगस्त को मऊगंज पुलिस अधीक्षक (SP) सुरेंद्र कुमार जैन से मुलाकात कर उन्हें ज्ञापन सौंपा था। ज्ञापन में निष्पक्ष जांच कराकर थाना प्रभारी के खिलाफ तीन दिनों के भीतर कार्रवाई करने की मांग की गई थी। हालांकि, निर्धारित तीन दिन का समय बीत जाने के बाद भी जब पुलिस प्रशासन की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, तो पत्रकारों का गुस्सा फूट पड़ा। इसके विरोध में पत्रकारों ने बुधवार को प्रशासनिक अधिकारियों का रुख किया और कलेक्टर के नाम अपर कलेक्टर पीके पांडे को ज्ञापन सौंपा।

"पत्रकारिता की स्वतंत्रता पर सीधा हमला"

अपर कलेक्टर को सौंपे गए ज्ञापन में पत्रकारों ने कड़ा ऐतराज जताते हुए कहा कि समाचार संकलन के दौरान पत्रकारों को धमकाना, कवरेज से रोकना और जेल भेजने की धमकी देना स्वतंत्र एवं निष्पक्ष पत्रकारिता के अधिकार का सीधा हनन है।

पत्रकारों का कहना है:

"सड़क हादसों या अन्य घटनाओं की वास्तविक स्थिति जनता तक पहुंचाना हमारा संवैधानिक दायित्व है। ऐसे संवेदनशील मौकों पर पुलिस-प्रशासन से सहयोग की अपेक्षा होती है, न कि अभद्रता और धमकियों की। लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को दबाने की यह कोशिश बर्दाश्त नहीं की जाएगी।"

15 अगस्त को बहिष्कार नहीं, काली पट्टी बांधकर होगा शांतिपूर्ण विरोध

पत्रकारों ने अपनी एकजुटता और परिपक्वता का परिचय देते हुए स्पष्ट किया है कि वे 15 अगस्त के राष्ट्रीय पर्व के गरिमामय कार्यक्रमों का बहिष्कार बिल्कुल नहीं करेंगे। लेकिन, यदि तब तक थाना प्रभारी पर उचित कार्रवाई नहीं होती है, तो सभी पत्रकार हाथों में काली पट्टी बांधकर स्वतंत्रता दिवस समारोह की कवरेज करेंगे। पत्रकारों के अनुसार, यह विरोध किसी व्यक्ति विशेष से दुश्मनी के कारण नहीं, बल्कि पत्रकारिता की स्वतंत्रता, पत्रकारों के सम्मान, सुरक्षा और निष्पक्ष समाचार संकलन के अधिकारों की रक्षा के लिए किया जाएगा। अब देखना यह होगा कि मऊगंज जिला प्रशासन 15 अगस्त से पहले इस मामले में क्या कदम उठाता है।

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