मऊगंज में विकास के दावों की खुली पोल: मटियारा के बेला भाटन में बारिश बनते ही कीचड़ व गड्ढों में तब्दील हुई सड़क

मऊगंज में विकास के दावों की खुली पोल: मटियारा के बेला भाटन में बारिश बनते ही कीचड़ व गड्ढों में तब्दील हुई सड़क

मऊगंज - सरकारें कागजों पर "स्मार्ट विलेज" और "सुदूर सड़क योजना" का ढोल पीटती थकती नहीं, लेकिन मऊगंज के ग्राम पंचायत मटियारा में पहुँचिए, तो आपको 'विकास' का एक नया और डरावना रूप देखने को मिलेगा। यहाँ बेला भाटन गाँव के वार्ड 12 और 13 के ग्रामीणों के लिए पहली बारिश ही आफत की घंटी बनकर आई है। मुख्य मार्ग से गाँव को जोड़ने वाली सड़क विकास की उम्मीदों पर ऐसा कीचड़ उछाल रही है कि ग्रामीणों का अपने ही घरों से बाहर निकलना किसी युद्ध जीतने जैसा हो गया है।

विकास के दावों की धज्जियां उड़ाती कच्ची सड़क

प्रशासनिक दावों की पोल खोलती यह कच्ची सड़क बारिश का पानी पड़ते ही किसी तालाब और कीचड़ भरे गड्ढे में तब्दील हो जाती है। यह कोई नई समस्या नहीं है, बल्कि सालों-साल से उपेक्षा का शिकार बनी इस सड़क की स्थायी नियति बन चुकी है।

हालत यह है कि दोपहिया वाहन तो दूर, यहाँ से चलने वाले राहगीरों के चप्पल-जूते तक कीचड़ में धंस जाते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि किसी के घर अगर चारपहिया वाहन आ भी जाए, तो वह गाँव के बाहर ही दम तोड़ देता है।

मरीज को अस्पताल पहुंचाना 'मौत से बाजी लगाने' जैसा

गाँव के ही एक जागरूक युवा राजू पांडे बताते हैं कि सड़क की यह दुर्दशा सिर्फ आवागमन की समस्या नहीं है, यह जिंदगी और मौत से जुड़ा सवाल बन चुका है।

  • स्वास्थ्य पर संकट: गाँव में अगर कोई बुजुर्ग, गर्भवती महिला या बच्चा अचानक बीमार पड़ जाए, तो 108 एम्बुलेंस गाँव के भीतर आने से साफ़ हाथ खड़े कर देती है। मजबूरी में ग्रामीणों को खाट या चारपाई पर लादकर मरीज को कई किलोमीटर दूर मुख्य मार्ग तक ले जाना पड़ता है।

  • नौनिहालों का भविष्य अधर में: स्कूल जाने वाले छोटे-छोटे बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह ठप हो चुकी है। कीचड़ में फिसलकर चोटिल होने के डर से अभिभावक बच्चों को स्कूल भेजने से कतरा रहे हैं।

कई बार तो स्थिति यह हो जाती है कि पानी से भरे गहरे गड्ढों में फंसे वाहनों को खुद ग्रामीण धक्का देकर बाहर निकालते हैं।

सरपंच की खामोशी और सिस्टम की संवेदनहीनता पर सवाल

गाँव के लोगों का आरोप है कि उन्होंने कई बार पंचायत से लेकर जनपद और जिला स्तर के अधिकारियों के चक्कर काटे हैं, लेकिन नतीजा वही 'ढाक के तीन पात'। ग्रामीणों ने ग्राम पंचायत मटियारा की सरपंच पार्वती द्विवेदी पर भी गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि जनप्रतिनिधि चुनाव जीतने के बाद गाँव की सुध लेना भूल जाते हैं। आखिर प्रशासनिक तंत्र किस बात का इंतजार कर रहा है? क्या किसी बड़े हादसे के बाद ही अफसरों की नींद टूटेगी?

कलेक्टर से गुहार: अब भाषण नहीं, राशन और सड़क चाहिए!

अव्यवस्था से आजिज़ आ चुके ग्रामीणों ने मऊगंज कलेक्टर से सीधी गुहार लगाई है। उनकी मांग है कि कम से कम इस आपात स्थिति में सड़क पर तुरंत मुरम और गिट्टी डलवाकर रास्ते को चलने लायक बनाया जाए और जल्द से जल्द यहाँ एक पक्की डामर या सी.सी. सड़क का निर्माण कराया जाए। अब देखना यह होगा कि क्या मऊगंज जिला प्रशासन इस बदहाल गाँव की सुध लेकर कोई ठोस कदम उठाता है या फिर मटियारा के बेला भाटन गाँव के लोग इस बारिश में भी 'कीचड़ क्रांति' के भरोसे जीने को मजबूर रहेंगे।




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