| रीवा में गौ सम्मान अभियान के तहत सौंपा गया ज्ञापन, गौ संरक्षण को लेकर उठी राष्ट्रीय स्तर की मांग |
रीवा - गौ माता की सेवा, सम्मान और सुरक्षा के संकल्प के साथ देशव्यापी स्तर पर चलाए जा रहे गौ सम्मान अभियान के द्वितीय चरण के अंतर्गत रीवा में भी व्यापक जनभागीदारी देखने को मिली। अभियान के तहत देश के 790 जिलों में एक साथ ज्ञापन सौंपे गए। रीवा जिले की ओर से लगभग पाँच लाख हस्ताक्षरों से युक्त समर्थन पत्र जिला कलेक्टर के माध्यम से महामहिम राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राज्यपाल एवं मुख्यमंत्री के नाम प्रेषित किया गया। ज्ञापन में गौ संरक्षण और संवर्धन को लेकर कई प्रमुख मांगें रखी गईं। इनमें गौ माता को राष्ट्र माता का सम्मान देने, देशभर में गौ हत्या पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने, गौ माता को राष्ट्रीय आराध्या घोषित करने तथा पूरे देश में गौ संवर्धन बोर्ड के गठन की मांग प्रमुख रूप से शामिल रही।
ज्ञापन सौंपने से पूर्व रीवा के कोठी कंपाउंड स्थित शिव मंदिर परिसर में सनातन संस्कृति, वसुंधरा, गौ-गंगा, गायत्री परिवार तथा विभिन्न गौ भक्त संगठनों के प्रतिनिधियों द्वारा लगभग सवा घंटे तक संकीर्तन एवं जनजागरण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम के दौरान गौ रक्षा एवं सनातन संस्कृति के संरक्षण को लेकर विभिन्न धार्मिक उद्घोष भी किए गए। अभियान से जुड़े लोगों ने इसे केवल एक ज्ञापन नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, गौ संरक्षण और जनआस्था से जुड़ा राष्ट्रीय संकल्प बताया।
अभियान में पूर्व विधायक श्यामलाल द्विवेदी, डॉ. रोहित तिवारी, रीवा अभियान प्रभारी बिजेंद्र नीलू, देवभूमि पंचमठा के प्रधान पुजारी महाराज जी, जवा अभियान प्रभारी राजकुमार द्विवेदी, समाजसेवी कुसुम दीदी, वैभव कुमार केसरवानी, आरएसएस के गौ प्रमुख रवि शुक्ला, बजरंग दल जिला प्रमुख धर्मेंद्र मिश्रा सहित रीवा जिले के विभिन्न क्षेत्रों से आए गौसेवकों ने सहभागिता निभाई।
गायों पर राजनीति कितनी सस्ती?
गौ संरक्षण के मुद्दे पर समाज में एक बड़ा सवाल भी लगातार उठता रहा है कि क्या गौ सेवा केवल मंचों और नारों तक सीमित होकर रह गई है? बड़े-बड़े आयोजन, चमचमाते पोस्टर-बैनर और प्रचार वाहनों के बीच वास्तविकता अक्सर कुछ और दिखाई देती है। शासकीय गौशालाओं में पर्याप्त संसाधनों के अभाव में कई स्थानों पर गौवंश बीमार और तड़पता हुआ नजर आता है, जबकि सड़कों पर घूम रहे बेसहारा मवेशी दुर्घटनाओं का शिकार होकर अपनी जान गंवा रहे हैं।
गौ माता के नाम पर राजनीति करने वालों की कमी नहीं है, लेकिन सवाल यह है कि क्या उनके लिए गौ सेवा केवल एक राजनीतिक और सामाजिक प्रचार का माध्यम बनकर रह गई है? यदि वास्तव में गौ माता को राष्ट्र की सांस्कृतिक धरोहर माना जाता है तो आवश्यक है कि गौशालाओं की स्थिति सुधारी जाए, बेसहारा गौवंश के संरक्षण के लिए ठोस नीति बनाई जाए और सड़क दुर्घटनाओं में मर रहे पशुओं के लिए स्थायी समाधान सुनिश्चित किया जाए।
गौ सेवा का वास्तविक अर्थ केवल ज्ञापन, नारों और आयोजनों तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि वह धरातल पर दिखाई देना चाहिए। जब तक गौवंश सुरक्षित, संरक्षित और सम्मानपूर्वक जीवन नहीं जी पाएगा, तब तक गौ सेवा के दावों पर प्रश्नचिह्न बने रहेंगे। जनता अब केवल भाषण नहीं, बल्कि गौ संरक्षण के लिए प्रभावी और परिणामकारी कदम देखना चाहती है।