आकांक्षा के परिजनों से मिले अनिल सिंह: बोले- जब तक न्याय नहीं मिलेगा संघर्ष जारी रहेगा; 'धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा खुशी नहीं, जनता का अधिकार था'

आकांक्षा के परिजनों से मिले अनिल सिंह: बोले- जब तक न्याय नहीं मिलेगा संघर्ष जारी रहेगा; 'धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा खुशी नहीं, जनता का अधिकार था' 

मऊगंज/नईगढ़ी। दिल्ली के जंतर-मंतर पर नीट (NEET) परीक्षा विवाद को लेकर आंदोलन करने के बाद मऊगंज पहुंचे चर्चित सामाजिक कार्यकर्ता अनिल सिंह ने नईगढ़ी तहसील के मगनिया गांव पहुंचकर दिवंगत छात्रा आकांक्षा चतुर्वेदी के शोकाकुल परिजनों से मुलाकात की। अनिल सिंह ने पीड़ित परिवार को सांत्वना देते हुए स्पष्ट शब्दों में कहा कि आकांक्षा को न्याय दिलाने की यह लड़ाई केवल दिल्ली तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इसे अंजाम तक पहुंचाने के लिए पूरा प्रदेश एक साथ खड़ा है।

देवतालाब में दर्शन के बाद पहुंचे मगनिया गांव, हुए भावुक

मऊगंज आगमन के बाद अनिल सिंह ने सर्वप्रथम ऐतिहासिक देवतालाब स्थित शिव मंदिर में भगवान भोलेनाथ के दर्शन-पूजन किए। इसके पश्चात वे सीधे मगनिया गांव पहुंचे। पीड़ित परिवार से मिलते ही माहौल बेहद भावुक हो गया।

परिजनों को सांत्वना देते हुए अनिल सिंह ने कहा, "आकांक्षा केवल इस परिवार की बच्ची नहीं थी, वह हमारी अपनी बेटी जैसी थी। उसके माता-पिता ने अपने खून-पसीने से उसे सींचा और उसके सपनों को पूरा करने के लिए कड़ा संघर्ष किया। आज उसका असमय चले जाना सिर्फ एक परिवार की क्षति नहीं, बल्कि पूरे समाज का सामूहिक दर्द है।"

'शिक्षा मंत्री का इस्तीफा खुशी नहीं, जनता का अधिकार था'

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर प्रतिक्रिया देते हुए अनिल सिंह ने कहा कि यह कोई खुशी मनाने का अवसर नहीं है, बल्कि यह पीड़ित छात्रों और जनता का संवैधानिक अधिकार था। उन्होंने कहा कि देश के लाखों होनहार बच्चों और उनके अभिभावकों ने जो मानसिक त्रास और दर्द झेला है, उसकी भरपाई केवल एक इस्तीफे से नहीं हो सकती। व्यवस्था में आमूलचूल बदलाव और पारदर्शिता की जरूरत है।

स्थानीय विधायक और पूर्व विधानसभा अध्यक्ष की संवेदनहीनता पर सवाल

अनिल सिंह ने आकांक्षा की मां नीलम चतुर्वेदी की आपबीती सुनाते हुए कहा कि मां का दर्द सुनकर किसी का भी कलेजा कांप उठेगा। इसके साथ ही उन्होंने क्षेत्रीय विधायक और मध्य प्रदेश विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष गिरीश गौतम की भूमिका पर कड़े सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि इतने बड़े दुखद हादसे के बावजूद स्थानीय विधायक का पीड़ित परिवार के आंसू पोंछने तक न पहुंचना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और संवेदनहीन है।

पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग

अनिल सिंह ने कहा कि लोकतंत्र में जनता ही असली मालिक है और अन्याय के खिलाफ आवाज उठाना उसका लोकतांत्रिक अधिकार है। उन्होंने देश की प्रतियोगी परीक्षा प्रणाली में पूरी पारदर्शिता और सख्त जवाबदेही तय करने की मांग की, ताकि भविष्य में फिर किसी होनहार छात्र का सपना और जीवन बलि न चढ़े। उन्होंने दोहराया कि न्याय मिलने तक उनकी यह लड़ाई पूरे मध्य प्रदेश में जारी रहेगी।




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