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| रीवा मेडिकल कॉलेज में जूनियर डॉक्टरों की पढ़ाई पर संकट! छह महीने से बिना पंखे-एसी के हाल में बैठने को मजबूर शोधार्थी |
रीवा - श्याम शाह मेडिकल कॉलेज, रीवा में अध्ययनरत फाइनल ईयर के छात्र एवं जूनियर डॉक्टर बुनियादी सुविधाओं के अभाव में गंभीर परेशानियों का सामना कर रहे हैं। आरोप है कि शासन द्वारा छात्रों के लिए तैयार किए गए नए अध्ययन कक्ष (हॉल) में पिछले छह महीनों से न तो पंखे लगाए गए हैं, न कूलर और न ही एयर कंडीशनर की कोई व्यवस्था की गई है। भीषण गर्मी और उमस के बीच शोधार्थी एवं जूनियर डॉक्टर इसी हाल में बैठकर पढ़ाई और शोध कार्य करने को मजबूर हैं।
छात्रों का कहना है कि इस संबंध में कई बार विभागाध्यक्षों और संबंधित अधिकारियों को मौखिक एवं लिखित रूप से अवगत कराया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। लगातार उपेक्षा के कारण छात्रों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। उनका कहना है कि चिकित्सा शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र में यदि अध्ययन का वातावरण ही अनुकूल नहीं होगा तो शोध कार्य और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रभावित होना स्वाभाविक है।
इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए बीके माला ने कहा कि जब भविष्य के डॉक्टर ही मूलभूत सुविधाओं के अभाव में परेशान रहेंगे तो वे बेहतर तरीके से अध्ययन और शोध कैसे कर पाएंगे। उन्होंने कहा कि यही विद्यार्थी आगे चलकर डॉक्टर बनकर लोगों की स्वास्थ्य सेवाओं की जिम्मेदारी संभालेंगे, इसलिए उनकी पढ़ाई और शोध के लिए बेहतर वातावरण उपलब्ध कराना शासन और संस्थान की जिम्मेदारी है।
उन्होंने यह भी कहा कि रीवा जिले का संजय गांधी अस्पताल और श्याम शाह मेडिकल कॉलेज पूरे विंध्य क्षेत्र के लिए प्रमुख चिकित्सा संस्थान हैं। ऐसे में यदि यहां अध्ययनरत डॉक्टरों को ही बुनियादी सुविधाएं नहीं मिल रही हैं तो यह चिंता का विषय है। उन्होंने प्रदेश के उपमुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार जनप्रतिनिधियों से मांग की कि मेडिकल कॉलेज की इस समस्या पर तत्काल संज्ञान लेकर अध्ययन कक्षों में पंखे, कूलर अथवा एसी सहित आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं, ताकि जूनियर डॉक्टर बिना किसी परेशानी के अपनी पढ़ाई और शोध कार्य कर सकें।
