यूएन में गूंजा ‘पीओके में दमन’ का मुद्दा, भारत ने समाधान की वकालत

यूएन में गूंजा ‘पीओके में दमन’ का मुद्दा, भारत ने  समाधान की वकालत

न्यूयॉर्क - संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) में भारत ने एक बार फिर वैश्विक शांति और सुरक्षा को लेकर अपना मजबूत रुख स्पष्ट किया है। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत पी. हरीश ने 'विवादों के शांतिपूर्ण समाधान के लिए तंत्र को मजबूत करने' विषय पर आयोजित उच्च स्तरीय खुली बहस के दौरान भारत का आधिकारिक बयान रखा। उन्होंने वैश्विक संघर्षों को रोकने के लिए बातचीत, मध्यस्थता और कूटनीति जैसे शांतिपूर्ण विकल्पों को सुदृढ़ करने की वकालत की।

हरीश ने स्पष्ट किया कि संयुक्त राष्ट्र चार्टर के तहत सुरक्षा परिषद के पास विवादों के निपटारे के कई प्रभावी साधन उपलब्ध हैं, जिनका संतुलित और प्रासंगिक इस्तेमाल किया जाना बेहद जरूरी है। इस दौरान, भारत ने पाकिस्तान को आड़े हाथों लेते हुए पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले कश्मीर पीओके में बुनियादी अधिकारों और मौलिक स्वतंत्रता के लगातार हो रहे दमन का मुद्दा बेहद आक्रामकता से उठाया।

भारतीय राजनयिक हरीश ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर अपने संबोधन की जानकारी साझा की, जिसमें उन्होंने लिखा दुनिया इस बात की गवाह है कि पाकिस्तान के कब्ज़े वाले कश्मीर में कश्मीरियों के बुनियादी अधिकारों, अभिव्यक्ति और संगठन बनाने की आज़ादी और मौलिक स्वतंत्रता का लगातार दमन किया जा रहा है। ये कोई अलग-थलग घटनाएं नहीं हैं, बल्कि पाकिस्तान के कब्ज़े वाले कश्मीर में पाकिस्तानी प्रशासन की लगभग आठ दशकों से चली आ रही एक बड़ी योजना का हिस्सा हैं।

उन्होंने कहा एक पूर्व प्रधानमंत्री समेत कई नेताओं को जेल में डालना, मुख्य विपक्षी पार्टी को चुनाव लड़ने से रोकना, 27वें संशोधन के ज़रिए सेना का संवैधानिक तख्तापलट और ऐसी ही दूसरी कार्रवाइयों ने लोकतंत्र की बची-खुची उम्मीद को भी खत्म कर दिया है। पाकिस्तान के लिए बेहतर होगा कि वह देश के असली मुद्दों पर ध्यान दे, न कि घरेलू स्तर पर लोकप्रियता हासिल करने और संयुक्त राष्ट्र के सदस्यों को गुमराह करने के लिए धार्मिक प्रतीकों का इस्तेमाल करके झूठी बातें फैलाए।

भारत ने बहस के अंत में स्पष्ट किया कि यूएन के संस्थापक सदस्य के तौर पर, भारत यूएन और दूसरे सदस्य देशों के साथ मिलकर काम करने के लिए तैयार है, ताकि यह सबसे व्यापक मल्टीलेटरल ऑर्गनाइजेशन अपने बुनियादी मकसद को पूरा कर सके। 

सुरक्षा परिषद में तीखे कूटनीतिक जवाब के बाद, राजदूत हरीश ने सूचना और संचार प्रौद्योगिकियों (आईसीटी) पर ग्लोबल मैकेनिज्म के पूर्ण सत्र में भी भारत का पक्ष रखा। उन्होंने 'ग्लोबल साउथ' के आर्थिक उत्थान और सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) को तेजी से हासिल करने के लिए डिजिटल तकनीक को एक गेम-चेंजर बताया। भारत के सफल डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (डीपीआई) यानी 'इंडिया स्टैक' मॉडल का अनुभव साझा करते हुए उन्होंने बताया कि कैसे भारत ने खुले और समावेशी डिजिटल तंत्र के जरिए करोड़ों लोगों का सशक्तिकरण किया है।


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