रीवा-मऊगंज में अवैध चिकित्सकों का बढ़ता जाल: महंगे इलाज और स्वास्थ्य व्यवस्था की खामियों के बीच पिस रही ग्रामीण जनता

रीवा-मऊगंज में अवैध चिकित्सकों का बढ़ता जाल: महंगे इलाज और स्वास्थ्य व्यवस्था की खामियों के बीच पिस रही ग्रामीण जनता

रीवा - विशेषकर रीवा एवं नवीन मऊगंज जिले में अवैध चिकित्सकों (झोलाछाप डॉक्टरों) की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। यह स्थिति केवल स्वास्थ्य विभाग की निगरानी पर ही सवाल नहीं उठाती, बल्कि ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं की वास्तविक तस्वीर भी सामने लाती है। एक ओर निजी अस्पतालों और नर्सिंग होम में उपचार, जांच और दवाइयों के नाम पर आम लोगों से भारी-भरकम शुल्क वसूला जा रहा है, वहीं दूसरी ओर शासकीय अस्पतालों में लंबी कतारें, विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी और संसाधनों का अभाव लोगों को वैकल्पिक व्यवस्थाओं की ओर धकेल रहा है।

ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले मध्यवर्गीय और गरीब परिवारों के लिए बीमारी की स्थिति में सबसे पहले सहारा तथाकथित स्थानीय चिकित्सक ही बनते हैं। अनुमानतः रीवा और मऊगंज जिले की लगभग 60 प्रतिशत ग्रामीण आबादी किसी न किसी रूप में इन अवैध चिकित्सकों पर निर्भर है। इसका प्रमुख कारण गांवों में समय पर चिकित्सकों की उपलब्धता न होना और सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं तक आसान पहुंच का अभाव बताया जाता है।

ग्रामीणों का आरोप है कि कई अवैध चिकित्सकों द्वारा बिना किसी वैध चिकित्सकीय योग्यता के मरीजों का उपचार किया जा रहा है। दवाइयों की वास्तविक कीमत और मरीजों से लिए जाने वाले शुल्क में भारी अंतर देखने को मिलता है। सामान्यतः कम कीमत की दवाइयों को कई गुना अधिक मूल्य पर बेचा जाता है। एक सलाइन बोतल में डाली जाने वाली दवाओं की वास्तविक लागत जहां सीमित हो सकती है, वहीं मरीजों से 500 से 700 रुपये तक वसूले जाने के आरोप लगाए जाते हैं। इतना ही नहीं, इंजेक्शन लगाने के नाम पर भी मनमाने शुल्क लिए जाते हैं, जबकि मरीजों को न तो दवा का नाम बताया जाता है और न ही किसी प्रकार की लिखित पर्ची उपलब्ध कराई जाती है।

सबसे गंभीर प्रश्न यह है कि आखिर ऐसी स्थिति वर्षों से बनी कैसे हुई है? ग्रामीण क्षेत्रों में इन अवैध चिकित्सकों का सामाजिक और राजनीतिक प्रभाव भी कम नहीं माना जाता। स्थानीय स्तर पर कई जनप्रतिनिधियों के साथ इनके निकट संबंध होने की चर्चाएं आम हैं। ग्रामीण राजनीति में प्रभाव रखने वाले ऐसे लोग चुनावी समीकरणों को भी प्रभावित करते हैं, जिसके चलते इनके विरुद्ध कठोर कार्रवाई अक्सर प्रभावी नहीं हो पाती।

स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर भी लोगों में असंतोष है। ग्रामीणों के बीच यह धारणा बनी हुई है कि समय-समय पर चलने वाले जांच और कार्रवाई अभियान केवल औपचारिकता बनकर रह जाते हैं। कार्रवाई की सूचना पहले ही लीक हो जाने और सीमित स्तर पर होने वाली जांच के कारण अवैध चिकित्सकों का नेटवर्क लगातार मजबूत होता जा रहा है।

इसके अतिरिक्त, कुछ तथाकथित स्वयंभू पत्रकारों द्वारा भी इस स्थिति का लाभ उठाने के आरोप लगाए जाते रहे हैं। स्थानीय स्तर पर ऐसी शिकायतें सामने आती रही हैं कि कुछ लोग पत्रकारिता की आड़ में अवैध क्लीनिकों में पहुंचकर समाचार प्रकाशित कराने अथवा प्रशासनिक कार्रवाई करवाने की धमकी देकर आर्थिक लाभ लेने का प्रयास करते हैं। यदि ऐसे आरोप सत्य हैं, तो यह पत्रकारिता की गरिमा पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न है और इसकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है।

प्रदेश के उपमुख्यमंत्री एवं रीवा विधायक राजेंद्र शुक्ला द्वारा स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार और चिकित्सा संस्थानों की संख्या बढ़ाने के लिए विभिन्न प्रयास किए जा रहे हैं, किंतु यदि जमीनी स्तर पर प्रशासनिक अमला उन योजनाओं और निर्देशों को प्रभावी ढंग से लागू नहीं कर पा रहा है, तो इसका सीधा खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है।

आज आवश्यकता केवल अवैध चिकित्सकों के खिलाफ अभियान चलाने की नहीं है, बल्कि उस मूल समस्या को दूर करने की है जिसने उन्हें गांव-गांव तक पहुंचने का अवसर दिया है। यदि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में नियमित रूप से योग्य चिकित्सकों की नियुक्ति हो, आवश्यक दवाइयां उपलब्ध हों और मरीजों को सम्मानजनक एवं सुलभ उपचार मिले, तो स्वाभाविक रूप से अवैध चिकित्सा प्रथा पर अंकुश लगाया जा सकता है।

जनता समाचार पत्र के माध्यम से प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री और संबंधित विभाग का ध्यान इस गंभीर समस्या की ओर आकर्षित करना चाहती है। मांग की जा रही है कि ग्रामीण अस्पतालों में चिकित्सकों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित की जाए, स्वास्थ्य सेवाओं की प्रभावी निगरानी हो तथा गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों को सस्ता एवं गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध कराया जाए। अन्यथा, इलाज के नाम पर ग्रामीण परिवार अपनी मेहनत की कमाई और संपत्ति गंवाने को मजबूर होते रहेंगे और स्वास्थ्य व्यवस्था के प्रति उनका विश्वास लगातार कमजोर होता जाएगा।

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