गंगेव उप तहसील पर मंडराया बड़ा संकट! जर्जर भवन में भीग रहे न्यायालयीन रिकॉर्ड, विधायक की चेतावनी- जनता की सुविधा से नहीं होगा समझौता

गंगेव उप तहसील पर मंडराया बड़ा संकट! जर्जर भवन में भीग रहे न्यायालयीन रिकॉर्ड, विधायक की चेतावनी- जनता की सुविधा से नहीं होगा समझौता

रीवा - मनगवां तहसील अंतर्गत गंगेव उप तहसील का मामला अब केवल एक जर्जर भवन तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह हजारों ग्रामीणों के न्यायिक अधिकारों और महत्वपूर्ण सरकारी अभिलेखों की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर विषय बन गया है। जर्जर भवन को ध्वस्त किए जाने के आदेश के बीच एक ओर क्षेत्रीय विधायक इंजीनियर नरेंद्र प्रजापति ने उप तहसील को गढ़ में ही यथावत संचालित रखने की मांग की है, क्योंकि गढ़ में भवन और बाउंड्री पूरी तरह सुरक्षित रहेगी। वहीं दूसरी ओर, वर्तमान में न्यायालयीन अभिलेखों की सुरक्षा को लेकर एक बड़ा सवालिया निशान खड़ा हो गया है।

बारिश में भीग रहे हैं गढ़ सर्कल कोर्ट के रिकॉर्ड

मामले का सबसे चिंताजनक और हैरान करने वाला पहलू यह है कि गढ़ सर्कल से संबंधित आदेशित एवं लंबित राजस्व प्रकरणों के महत्वपूर्ण अभिलेख वर्तमान में गंगेव के इसी जर्जर भवन में रखे हुए हैं। लगातार हो रही बारिश के कारण भवन की छत टपक रही है और भीतर पानी भरने की स्थिति निर्मित हो गई है। सामने आए वीडियो में स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है कि महत्वपूर्ण न्यायालयीन रिकॉर्ड को बचाने के लिए उन्हें आनन-फानन में बरसाती (तिरपाल) से ढक दिया गया है, जबकि चारों तरफ पानी भरा हुआ दिखाई दे रहा है।

यदि समय रहते इन अभिलेखों को सुरक्षित स्थान पर नहीं पहुंचाया गया, तो वर्षों पुराने महत्वपूर्ण दस्तावेजों के पूरी तरह नष्ट होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। यह न केवल घोर प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाता है, बल्कि इससे आने वाले समय में सैकड़ों राजस्व एवं न्यायालयीन मामलों के ठप होने की पूरी संभावना है।

हजारों ग्रामीणों के न्याय पर संकट और बड़ा सवाल

गढ़ सर्कल के अंतर्गत आने वाले राजस्व प्रकरण सीधे तौर पर हजारों गरीब किसानों और ग्रामीणों के भूमि विवाद, नामांतरण, बंटवारा एवं अन्य महत्वपूर्ण न्यायालयीन मामलों से जुड़े हुए हैं। ऐसे में अभिलेखों के क्षतिग्रस्त होने से ग्रामीणों को लंबे समय तक न्यायिक एवं प्रशासनिक परेशानियों के चक्रव्यूह में फंसना पड़ेगा।

यहाँ सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि एक पक्षकार किसान दिन-रात मेहनत करके, अपनी गाढ़ी कमाई लगाकर कोर्ट-कचहरी के चक्कर काटता है। अगर उसके ये रिकॉर्ड भीगकर हमेशा के लिए खराब हो गए, तो भविष्य में ये दस्तावेज कहाँ से उपलब्ध होंगे? और इस भारी नुकसान का जिम्मेदार आखिर कौन होगा— जिला प्रशासन या फिर राजनीति की बिसात बिछाने वाले राजनेता? क्या प्रशासन बारिश में भीगते न्यायालयीन रिकॉर्ड के पूरी तरह नष्ट होने का इंतजार कर रहा है?

विधायक ने कलेक्टर को लिखा पत्र, प्रशासन के सामने दोहरी चुनौती

जनता की इस भारी परेशानी को देखते हुए क्षेत्रीय विधायक इंजीनियर नरेंद्र प्रजापति ने कलेक्टर रीवा को पत्र लिखकर स्पष्ट किया है कि गंगेव उप तहसील का संचालन जनहित को देखते हुए यथावत रखा जाना बेहद आवश्यक है। उन्होंने मांग की है कि क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति एवं ग्रामीणों की सुविधा को देखते हुए न्यायालयीन कार्य गंगेव से ही संचालित किए जाएं और सुरक्षा के लिहाज से इसे गढ़ में ही व्यवस्थित किया जाए।

इस समय जिला प्रशासन के सामने दोहरी चुनौती खड़ी है। पहली चुनौती यह कि इस खतरनाक और जर्जर हो चुके भवन को सुरक्षित तरीके से ध्वस्त किया जाए, और दूसरी सबसे बड़ी चुनौती यह कि बिना समय गंवाए न्यायालयीन रिकॉर्ड की सुरक्षा और उप तहसील के निर्बाध संचालन के लिए तत्काल वैकल्पिक व सुरक्षित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

मामले में प्रमुख मांगें:

  • गढ़ सर्कल से संबंधित सभी न्यायालयीन एवं राजस्व अभिलेखों को तत्काल किसी सुरक्षित भवन में स्थानांतरित किया जाए।

  • गढ़ ग्राम स्थित सर्कल कोर्ट भवन में इन अभिलेखों को पर्याप्त पुलिस सुरक्षा के साथ रखा जाए।

  • गंगेव उप तहसील के सुचारू संचालन के लिए वैकल्पिक भवन की तत्काल व्यवस्था की जाए।

  • न्यायालयीन कार्यों को बिना बाधित किए जनता को पूर्ववत राजस्व सेवाएं उपलब्ध कराई जाएं।

अब देखना यह है कि रीवा जिला प्रशासन इस बेहद गंभीर और संवेदनशील मामले में कितनी शीघ्रता के साथ निर्णय लेता है, या फिर किसानों की किस्मत इन भीगते हुए कागजों की तरह गलने के लिए छोड़ दी जाएगी।




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