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| सहायक यंत्री जगदीश राजपूत की पदोन्नति पर उठे गंभीर सवाल: वसूली नोटिस और वित्तीय अनियमितताओं के बाद भी सूची में नाम, प्रशासनिक हलकों में हड़कंप |
रीवा/भोपाल। मध्यप्रदेश के पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा ग्रामीण यांत्रिकी सेवा (RES) के सहायक यंत्रियों की जारी की गई अंतिम वरिष्ठता सूची और पदोन्नति प्रक्रिया अब गहरे विवादों के घेरे में आ गई है। 1 अप्रैल 2024 की स्थिति के अनुसार जारी इस सूची में क्रमांक 228 पर दर्ज सहायक यंत्री (सिविल) जगदीश राजपूत के नाम को लेकर प्रशासनिक गलियारों में भारी खलबली मच गई है। विभागीय दस्तावेजों में उनके विरुद्ध वित्तीय अनियमितताओं और वसूली नोटिस के उल्लेख सामने आने के बाद पूरी पदोन्नति प्रक्रिया की पारदर्शिता पर बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं।
संबल योजना में अनियमितता और वसूली के आरोप
प्राप्त जानकारी के अनुसार, मुख्यमंत्री जनकल्याण संबल योजना के तहत कथित रूप से नियम विरुद्ध और अनियमित भुगतान के एक मामले में विभागीय पत्राचार के दौरान श्री राजपूत के खिलाफ वसूली की कार्रवाई किए जाने के निर्देश सामने आए थे। उपलब्ध विभागीय दस्तावेजों और आपत्तियों के आधार पर यह दावा किया जा रहा है कि उनके विरुद्ध वैधानिक कार्रवाई और गंभीर विभागीय प्रकरण लंबित थे। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि तमाम आपत्तियों और वसूली नोटिस के बावजूद उनका नाम पदोन्नति सूची में कैसे शामिल हो गया?
पदोन्नति प्रक्रिया पर खड़े हुए 6 बड़े सवाल
इस मामले के उजागर होने के बाद विभागीय अधिकारियों, कर्मचारियों और जनप्रतिनिधियों के बीच कई कड़े सवाल तैर रहे हैं:
पदोन्नति का आधार क्या? यदि किसी अधिकारी के खिलाफ गंभीर वित्तीय और विभागीय प्रकरण लंबित थे, तो उन्हें पदोन्नति का पात्र किस आधार पर माना गया?
गोपनीय चरित्रावली (APAR/CR) की स्थिति: क्या पदोन्नति से पूर्व उनकी वार्षिक गोपनीय चरित्रावली विधिवत उपलब्ध और पूर्ण थी?
नियमों की अनदेखी: यदि सीआर लंबित या अपूर्ण थी, तो पदोन्नति के तय मानकों का पालन किस प्रकार किया गया?
DPC से तथ्य छिपाए गए? क्या विभागीय पदोन्नति समिति (DPC) की बैठक में संबंधित अधिकारी के विरुद्ध लंबित मामलों की पूरी जानकारी रखी गई थी?
जवाबदेही किसकी? यदि DPC को आधी-अधूरी जानकारी दी गई या तथ्य छिपाए गए, तो इसके लिए जिम्मेदार अधिकारी कौन हैं?
सेवा नियमों का उल्लंघन: क्या पूरी प्रक्रिया में तय सेवा नियमों और विभागीय दिशानिर्देशों का अक्षरशः पालन हुआ है?
प्रमुख सचिव से शिकायत की तैयारी, उच्चस्तरीय जांच की मांग
सूत्रों के मुताबिक, इस पूरे मामले को लेकर पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के प्रमुख सचिव और शासन के वरिष्ठ अधिकारियों को औपचारिक शिकायत भेजने की रूपरेखा तैयार कर ली गई है। शिकायत में पदोन्नति प्रक्रिया की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की जाएगी। साथ ही, यह मांग भी जोर पकड़ रही है कि यदि जांच में तथ्यों को छिपाने या नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो संबंधित दोषी अधिकारियों पर सख्त विधिसम्मत कार्रवाई की जाए।
प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही पर आँच
प्रशासनिक मामलों के विशेषज्ञों का कहना है कि विभागीय पदोन्नति केवल वरिष्ठता (Seniority) के आधार पर नहीं होती, बल्कि अधिकारी का सेवा रिकॉर्ड, गोपनीय प्रतिवेदन और विभागीय जांचों की स्थिति मुख्य भूमिका निभाती है। ऐसे में यदि किसी अधिकारी के खिलाफ वसूली या वित्तीय गड़बड़ी के रिकॉर्ड मौजूद हैं, तो पदोन्नति से पूर्व उनका गहन परीक्षण अनिवार्य होता है।
अब यह मामला केवल एक अधिकारी तक सीमित न रहकर पूरे विभाग की कार्यप्रणाली, पारदर्शिता और निष्पक्षता पर सवाल खड़ा कर रहा है। आने वाले दिनों में शिकायत दर्ज होने के बाद यह देखना दिलचस्प होगा कि विभाग इस पर क्या रुख अपनाता है और क्या मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाती है।
(नोट: यह समाचार उपलब्ध दस्तावेजों और प्रशासनिक हलकों में उठ रहे सार्वजनिक प्रश्नों के आधार पर तैयार किया गया है। संबंधित अधिकारी या विभाग का पक्ष आने पर उसे भी प्रमुखता से शामिल किया जाएगा।)
