| ‘एसपी साहब चलिए, गांव-गांव अवैध शराब दिखाते हैं’: समाजसेवी संतोष तिवारी का पुलिस पर हमला |
रीवा मऊगंज जिले में एक ओर पुलिस प्रशासन द्वारा ‘नशे से दूरी है जरूरी’ अभियान चलाकर लोगों को जागरूक किया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर कथित अवैध शराब बिक्री को लेकर समाजसेवी संतोष तिवारी ने पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। बुधवार को एसपी कार्यालय पहुंचकर पत्रकारों से चर्चा कर तिवारी ने आरोप लगाया कि गांव-गांव अवैध रूप से शराब की बिक्री हो रही है और पुलिस का नशा मुक्ति अभियान केवल फोटो खिंचवाने तक सीमित रह गया है। उन्होंने पुलिस अधीक्षक सुरेंद्र कुमार जैन को चुनौती देते हुए कहा- ‘एसपी साहब हमारे साथ चलिए, हम आपको गांव-गांव अवैध शराब बिकते हुए दिखा देंगे।’ हालांकि, इन आरोपों को लेकर पुलिस प्रशासन की ओर से अभी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। रीवा मऊगंज जिले में नशे के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान को लेकर अब सवाल खड़े होने लगे हैं। समाजसेवी संतोष तिवारी ने बुधवार को पुलिस प्रशासन पर कथित अवैध शराब कारोबार को रोकने में नाकाम रहने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि जिले में एक ओर स्कूल, कॉलेज, चौराहों और सार्वजनिक स्थानों पर नशे से दूर रहने का संदेश दिया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर ग्रामीण क्षेत्रों में खुलेआम शराब की बिक्री की शिकायतें सामने आ रही हैं।
संतोष तिवारी ने कहा कि यदि प्रशासन वास्तव में जिले को नशामुक्त बनाना चाहता है तो उसे गांव-गांव जाकर अवैध शराब की बिक्री पर कार्रवाई करनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि नशा मुक्ति अभियान केवल प्रचार और फोटो खिंचवाने तक सीमित है। उनका कहना है कि अभियान तभी सफल माना जाएगा, जब अवैध शराब के कारोबार पर प्रभावी तरीके से रोक लगेगी। समाजसेवी ने पुलिस प्रशासन और जिले के विभिन्न थानों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि मऊगंज, नईगढ़ी सहित जिले के अन्य थाना क्षेत्रों में कथित तौर पर अवैध शराब का कारोबार चल रहा है। तिवारी ने दावा किया कि रात के समय शराब की गाड़ियां गांव-गांव पहुंचती हैं और अवैध रूप से शराब की बिक्री की जाती है। उन्होंने पुलिस पर इन गतिविधियों पर प्रभावी कार्रवाई नहीं करने का आरोप लगाया।
तिवारी ने पुलिस अधीक्षक सुरेंद्र कुमार जैन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि उनके कार्यकाल में अवैध शराब कारोबारियों के हौसले बढ़े हैं। उन्होंने पूर्व एसपी दिलीप कुमार सोनी के कार्यकाल का जिक्र करते हुए दावा किया कि उस समय नशे के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई अधिक प्रभावी थी। हालांकि, ये सभी आरोप समाजसेवी द्वारा लगाए गए हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि यदि पुलिस प्रशासन को उनके आरोपों पर विश्वास नहीं है तो वह अधिकारियों के साथ गांव-गांव चलने के लिए तैयार हैं। तिवारी ने कहा, ‘एसपी साहब हमारे साथ चलिए, हम आपको दिखाएंगे कि कहां-कहां अवैध शराब बिक रही है।’ उन्होंने एसपी, एएसपी और एसडीओपी सहित वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों से मौके पर पहुंचकर स्थिति देखने की अपील की। संतोष तिवारी ने कहा कि केवल नशा मुक्ति अभियान चलाने और जागरूकता कार्यक्रमों की तस्वीरें सामने लाने से रीवा मऊगंज जिला नशामुक्त नहीं होगा। इसके लिए अवैध शराब और अन्य नशीले पदार्थों के कारोबार पर सख्त कार्रवाई जरूरी है।
अब बड़ा सवाल यह है कि समाजसेवी द्वारा लगाए गए आरोपों के बाद पुलिस प्रशासन अवैध शराब के खिलाफ क्या कार्रवाई करता है? क्या गांव-गांव में कथित अवैध शराब बिक्री पर प्रभावी अंकुश लगाया जाएगा या मामला केवल आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित रहेगा? फिलहाल इस मामले में पुलिस प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। दारू की पाइकारी समाज से भी आरटीआई कार्यकर्ता पत्रकार तथाकथित लोग द्वारा किया गया है सर्वाधिक पाइकारी मार्च से शुरू होती है जून जुलाई तक बंद हो जाती है लेकिन ना पाइकारी कभी बंद हुई है हर अधिकारी के कार्यकाल में पइकारी हुई है चाहे थाना हो चाहे चौकी हो चाहे संभाग का जो भी जिला हो पैइकारी एक सिस्टम बन गया है पैइकारी सरकार की अधीनस्थ चलता है अधिकृत ठेका की दुकान अपनी स्वीकृत दारू को बिक्री मार्च तक करने का अभियान चलाते हैं एक दूसरे के क्षेत्र में भेजते हैं ना दारू बंद हुआ है और ना पैइकारी बंद होगी गांजा की अधिकृत दुकान बंद हो गई पर गाजा उस तेजी से मिल रहा है भांग की दुकान बंद हो गई लेकिन भाग आज भी खूब मिल रही है हम संभाग के और पुलिस के संभागीय स्तर के सभी अधिकारियों को यह अपेक्षा समाचार पत्र के माध्यम से जनता करती है कि यह दारू के ठेकेदार किन-किन सफेद पोस और सामाजिक कार्यों से सरोकार रखने वाली तथाकथित संगठनो को कितना महीना सेवा शुल्क मिल रही है अब जिन्हें नहीं मिल रही है वही विरोध कर रहे।