| अल्प वर्षा और अल नीनो के खतरे से निपटेंगे किसान: गंगेव में 'आकस्मिक कृषि कार्य योजना' पर विशेष प्रशिक्षण |
रीवा - मौसम चक्र में आ रहे बदलाव, अल नीनो (El Niño) के प्रभाव और कम वर्षा या लंबे समय तक सूखे की स्थिति (वर्षा अंतराल) से निपटने के लिए कृषि विभाग ने कमर कस ली है। विकासखंड गंगेव के वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी कार्यालय में एक दिवसीय साप्ताहिक बैठक सह प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में क्षेत्र के प्रगतिशील किसानों और महिला कृषकों को कम पानी में बेहतर उत्पादन लेने और मिट्टी की सेहत को सुरक्षित रखने के आधुनिक वैज्ञानिक गुर सिखाए गए।
कम पानी में वरदान साबित होगी धान की डीएसआर (DSR) पद्धति
प्रशिक्षण के दौरान वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी श्री शिवसरण सरल द्वारा आकस्मिक कृषि कार्य योजना पर विस्तार से प्रकाश डाला गया। उन्होंने किसानों को कम वर्षा और सूखे की स्थिति से बचाव के लिए कम अवधि में पकने वाली धान की किस्मों को डीएसआर (Direct Seeded Rice - सीधी बुवाई) पद्धति से लगाने की सलाह दी।
क्या है डीएसआर पद्धति?
यह धान उत्पादन की एक आधुनिक और वैज्ञानिक तकनीक है, जिसमें धान की नर्सरी (रोपा) तैयार करने और कीचड़ मचाकर रोपाई करने की आवश्यकता नहीं होती। इस विधि में सीड ड्रिल मशीन के माध्यम से सीधे खेत में बीजों की बुवाई की जाती है।
श्री सरल ने किसानों को मशीन की कार्यप्रणाली समझाते हुए बताया कि इससे बीज समान दूरी और गहराई पर गिरते हैं, जिससे कम समय में अधिक क्षेत्र में बुवाई संभव है। इस पद्धति को अपनाने से:
जल संरक्षण: रोपाई की तुलना में सिंचाई के लिए बहुत कम पानी की आवश्यकता होती है।
लागत में कमी: मजदूरों पर निर्भरता घटने से खेती की लागत में भारी कमी आती है।
मिट्टी की सुरक्षा: खेत की मिट्टी की प्राकृतिक संरचना बनी रहती है, जिससे पर्यावरण को भी लाभ होता है। उन्होंने समय पर बुवाई और उचित खरपतवार (Weed) प्रबंधन के माध्यम से बेहतर उत्पादन हासिल करने पर विशेष जोर दिया।
मिट्टी की सेहत के लिए 'ई-विकास प्रणाली' पर जोर
बैठक में किसानों को मिट्टी की उर्वरता को अक्षुण्ण बनाए रखने के लिए 'ई-विकास प्रणाली' के अंतर्गत रासायनिक खादों के अंधाधुंध इस्तेमाल को रोककर संतुलित उर्वरक (Balanced Fertilizers) अपनाने के लिए प्रेरित किया गया।
दामिनी और मेघदूत ऐप बचाएंगे किसानों की फसल
'आत्मा परियोजना' के दीपक कुमार श्रीवास्तव ने किसानों को आधुनिक तकनीक से जुड़ने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि मौसम में अचानक होने वाले बदलावों से फसल को बचाने के लिए सभी किसान अपने मोबाइल में 'मौसम ऐप', 'दामिनी ऐप' (बिजली गिरने की चेतावनी के लिए) और 'मेघदूत ऐप' अनिवार्य रूप से डाउनलोड करें। इसके साथ ही उन्होंने वर्तमान समय में जल प्रबंधन के लिए पारंपरिक तरीकों के स्थान पर स्प्रिंकलर (फव्वारा) और ड्रिप (टपक) सिंचाई पद्धति अपनाने की सलाह दी।
मिलेट मिशन के तहत रागी और धान के उन्नत बीजों का वितरण
प्राकृतिक आपदा और कम पानी की स्थिति में भी किसानों की आय सुरक्षित रहे, इसके लिए मिलेट (मोटे अनाज) और दलहनी फसलों को बढ़ावा देने पर ध्यान आकर्षित किया गया। कार्यक्रम के दौरान 'राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा एवं पोषण मिशन' के अंतर्गत धान की उन्नत किस्म जे.आर. 10 (JR 10) एवं जे.आर. 206 (JR 206) का वितरण किया गया। इसके साथ ही, 'म.प्र. राज्य मिलेट मिशन' के अंतर्गत लघु धान्य (मोटे अनाज) फसल रागी के बीज प्रगतिशील किसानों को वितरित किए गए, ताकि कोदो और रागी जैसी पौष्टिक और कम पानी में उगने वाली फसलों का रकबा क्षेत्र में बढ़ाया जा सके।