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| रीवा में नशामुक्ति के दावों की खुली पोल, नेशनल हाईवे पर दुर्घटना ने उजागर किया अवैध कारोबार का 'सफेद सच' |
रीवा - संभागीय पुलिस प्रशासन द्वारा पूरे संभाग में नशे के विरुद्ध चलाए जा रहे ताबड़तोड़ अभियानों के दावों की धज्जियाँ उस समय उड़ गईं, जब नेशनल हाईवे-30 पर एक दुर्घटना ने नशे के अवैध कारोबार की जड़ों को सार्वजनिक कर दिया। जिला मुख्यालय से 55 किलोमीटर दूर गंभीरपुर अगडाल ब्रिज के समीप हुई एक सड़क दुर्घटना न केवल पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़ी कर रही है, बल्कि यह भी सिद्ध कर रही है कि नशा माफियाओं की जड़ें कितनी गहरी और बेशर्म हैं।
हादसे में बिखरा नशे का 'सफेद जहर'
घटनाक्रम के अनुसार, एक अज्ञात स्कूटी सवार डिवाइडर से टकराकर दुर्घटनाग्रस्त हो गया। टक्कर इतनी जोरदार थी कि स्कूटी पर लदी भारी मात्रा में प्रतिबंधित नशीली सिरप की बोतलें सड़क पर बिखर गईं। प्रत्यक्षदर्शियों की मानें तो सड़क पर सिरप की बोतलों का अंबार लग गया। राहगीरों में इन बोतलों को लूटने की ऐसी होड़ मची कि मानो कोई 'लूट का उत्सव' हो। बाजार में एक शीशी की कीमत 400 से 500 रुपये तक आंकी जा रही है, जो इस अवैध कारोबार के पीछे छिपे मोटी कमाई के खेल को बयां करती है।
पुलिस के दावों पर उठे सवाल
सवाल यह उठ रहा है कि उत्तर प्रदेश के प्रयागराज से शुरू हुआ यह अवैध खेप मध्य प्रदेश की सीमा में प्रवेश करने के बाद सुहागी और चाकघाट जैसे महत्वपूर्ण थानों को पार करते हुए आखिर कैसे सुरक्षित पहुँच गई? क्या कई थानों के सामने से गुजरती यह स्कूटी पुलिस की नजरों से ओझल थी? क्षेत्रीय जनता में इस बात को लेकर तीव्र आक्रोश है कि पुलिस के कागजी दावों के विपरीत, धरातल पर नशे की बिक्री बदस्तूर जारी है। लोगों का कहना है कि क्या मेडिकल स्टोरों पर बिक रही प्रतिबंधित गोलियाँ, गांजा और नशीली सिरप पर रोक केवल कागजों तक ही सीमित है? क्या स्थानीय पुलिस ने अपनी बीट प्रभारियों की जवाबदेही तय की? या फिर 'बजनी' वाहनों के आगे कानून के हाथ हमेशा की तरह खामोश हो जाते हैं?
प्रशासन की कार्यशैली पर जनता की अदालत
मीडिया प्रभारी के रूप में स्थानीय स्तर पर बढ़ती इस चर्चा को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। एक तरफ पुलिस विभाग अपनी पीठ थपथपाने में लगा है, तो दूसरी तरफ सड़क पर बिखरी नशीली सिरप पुलिस के दावों की सच्चाई बयां कर रही है। अब जनमानस यह निर्णय लेने को मजबूर है कि प्रशासन की ये कार्यवाहियाँ वास्तव में धरातल पर उतर रही हैं, या फिर ये केवल फाइलों और सफेद कागजों तक ही सिमट कर रह गई हैं।
