राम मंदिर चंदा विवाद पर दिग्विजय सिंह का तीखा हमला: बोले- 'छोटी मछली पकड़ी गई, मगरमच्छ अब भी बाहर'

राम मंदिर चंदा विवाद पर दिग्विजय सिंह का तीखा हमला: बोले- 'छोटी मछली पकड़ी गई, मगरमच्छ अब भी बाहर'

भोपाल: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने अयोध्या के राम मंदिर निर्माण और चंदा विवाद को लेकर केंद्र व उत्तर प्रदेश सरकार पर तीखा हमला बोला है। मंगलवार को उन्होंने इस पूरे प्रकरण पर गहरी नाराजगी जताते हुए आरोप लगाया कि इस मामले में केवल छोटी मछलियों पर कार्रवाई हुई है, जबकि असली 'मच्छरशाह' या मगरमच्छ अभी भी पकड़े जाने बाकी हैं। उन्होंने साफ किया कि भगवान राम के प्रति उनकी गहरी आस्था है और वे इस भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी आखिरी सांस तक बिना किसी राजनीतिक झंडे के लड़ाई लड़ेंगे।

नृपेंद्र मिश्रा और चंपत राय पर उठाए सवाल दिग्विजय सिंह ने मंदिर निर्माण की जिम्मेदारी संभाल रहे नृपेंद्र मिश्रा को आड़े हाथों लेते हुए कहा, "नृपेंद्र मिश्रा, जो प्रधानमंत्री के बेहद विश्वसनीय माने जाते हैं, वे खुद कह रहे हैं कि लूट हुई है। अब तो निर्माण कार्य में भी घोटाले की बात सामने आ रही है। क्या नृपेंद्र मिश्रा भी इसमें शामिल हैं? जब तक यह मामला सार्वजनिक नहीं हुआ, तब तक वे चुप क्यों रहे?" उन्होंने आगे कहा कि चंपत राय जैसे लोग इस तरह के कृत्यों से खुद प्रधानमंत्री की छवि को नुकसान पहुंचा रहे हैं।

ED की कार्रवाई पर दोहरा मापदंड अपनाने का आरोप कांग्रेस नेता ने वित्तीय लेन-देन में हेराफेरी का दावा करते हुए कहा कि महज 40 दिनों के भीतर 71 बार पैसा निकाला गया है। उन्होंने केंद्र सरकार की जांच एजेंसियों पर निशाना साधते हुए कहा, "नेशनल हेराल्ड मामले में तो कोई नकद लेन-देन भी नहीं हुआ था, फिर भी वहां ईडी (ED) लगा दी गई। लेकिन इस मामले में, जहां खुलेआम पैसे का लेन-देन और घोटाला हो रहा है, वहां ईडी गायब क्यों है?"

सिंधी समाज के साथ धोखाधड़ी का दावा दिग्विजय सिंह ने आरोप लगाया कि राम मंदिर के लिए सिंधी समाज के गरीब लोगों ने दो-दो क्विंटल वजन की 200 पत्थर की पट्टियां दान में दी थीं, लेकिन उन्हें इसके बदले कोई रसीद तक नहीं दी गई। उन्होंने कहा कि ये भ्रष्ट लोग किसी को नहीं छोड़ते और इन्होंने धर्म को पूरी तरह से व्यापार बना दिया है।

शास्त्रों का हवाला देकर घेरा अपने गुरु (द्वारका पीठ व ज्योतिर्मठ के पूर्व शंकराचार्य) की दीक्षा का जिक्र करते हुए दिग्विजय सिंह ने कहा, "शास्त्रों में कहा गया है कि यदि राजा किसी को भगवा वस्त्र पहनकर व्यापार करते हुए देखे, तो उसके गले में पत्थर बांधकर नदी में फेंक देना चाहिए। जो लोग धर्म के नाम पर व्यापार कर रहे हैं, उनका पुरजोर विरोध होना चाहिए।" उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वे इस मुद्दे पर जल्द ही एक पदयात्रा शुरू करेंगे, जो किसी राजनीतिक दल के बैनर तले नहीं होगी।

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