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| बलूचिस्तान में बड़ा आतंकी हमला: जियारत जिले में पुलिस चौकी पर धावा, 9 पुलिसकर्मियों की मौत, 5 लापता |
क्वेटा - पाकिस्तान का अशांत प्रांत बलूचिस्तान एक बार फिर भीषण आतंकी हमले से दहल उठा है. सोमवार (6 जुलाई) की रात बलूचिस्तान के जियारत जिले के मांगी डैम इलाके में स्थित एक पुलिस चौकी पर आतंकवादियों ने अंधाधुंध हमला कर दिया. अधिकारियों द्वारा मंगलवार (7 जुलाई) को दी गई जानकारी के मुताबिक, इस कायराना हमले में 9 पुलिसकर्मियों की मौत हो गई है, जबकि 5 पुलिसकर्मी अब भी लापता बताए जा रहे हैं.
चौकी में घुसने में कामयाब रहे हमलावर डॉन की रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस चौकी पर तैनात जवानों ने हमलावरों को रोकने के लिए जवाबी गोलीबारी की, लेकिन आतंकवादी जबरन चौकी के भीतर घुसने में कामयाब रहे. जियारत के डिप्टी कमिश्नर अब्दुल कुदूस अचकजई ने बताया कि लापता पुलिसकर्मियों की तलाश के लिए पूरे इलाके में भारी संख्या में अतिरिक्त सुरक्षा बलों को भेजा गया है और बड़े पैमाने पर सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है.
सुरक्षा बलों की जवाबी कार्रवाई में 15 आतंकी ढेर हमले के तुरंत बाद सुरक्षा एजेंसियों को अलर्ट मोड पर डाल दिया गया और पूरे इलाके की घेराबंदी की गई. बलूचिस्तान सरकार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (पहले ट्विटर) पर आधिकारिक बयान जारी कर बताया कि सुरक्षा बलों का जॉइंट ऑपरेशन पूरा हो चुका है. इस जवाबी कार्रवाई में 'फितना अल ख्वारिज' संगठन से जुड़े 15 खूंखार आतंकवादी मारे गए हैं.
राष्ट्रपति जरदारी ने जताई प्रतिबद्धता पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने इस हमले की कड़े शब्दों में निंदा की है. उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट साझा करते हुए कहा, "हम बलूचिस्तान में शांति और स्थिरता को भंग करने की हर साजिश को नाकाम करेंगे. राज्य आतंकवाद के खिलाफ अपने अभियान को पूरी ताकत के साथ जारी रखेगा." राष्ट्रपति ने शहीद पुलिसकर्मियों को श्रद्धांजलि देते हुए घायलों के जल्द ठीक होने की कामना की.
लंबे समय से हिंसा की आग में जल रहा बलूचिस्तान बलूचिस्तान प्रांत लंबे समय से उग्रवाद और हिंसा का सामना कर रहा है. आईएएनएस (IANS) की रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले हफ्ते ही प्रतिबंधित संगठन बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) ने दावा किया था कि उसने 21 से 30 जून के बीच बलूचिस्तान के विभिन्न क्षेत्रों में 23 अलग-अलग अभियानों को अंजाम दिया. बीएलए के प्रवक्ता जीयंद बलूच के अनुसार, इन हमलों में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों और सरकारी बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया गया, जिसमें 16 सुरक्षाकर्मियों की मौत हुई थी और कई अन्य घायल हुए थे.
