100 दिनों से अधिक लंबित शिकायतों का इसी सप्ताह शत प्रतिशत निराकरण सुनिश्चित करें - कलेक्टर Aajtak24 News

100 दिनों से अधिक लंबित शिकायतों का इसी सप्ताह शत प्रतिशत निराकरण सुनिश्चित करें - कलेक्टर Aajtak24 News

उमरिया - कलेक्टर श्रीमती राखी सहाय की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट सभागार में समयसीमा बैठक आयोजित की गई। बैठक में सीएम हेल्पलाइन सहित विभिन्न विभागों के लंबित प्रकरणों की समीक्षा कर अधिकारियों को समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण निराकरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। कलेक्टर ने मुख्यमंत्री निवास, आयुक्त शहडोल संभाग कार्यालय से प्राप्त आवेदनों, जनसुनवाई, न्यायालयीन प्रकरणों, मानवाधिकार संबंधी पत्रों तथा फैक्ट न्यूज मामलों की विभागवार समीक्षा की। उन्होने विभागीय अधिकारियों से कहा कि इसी सप्ताह अधिकारी 100 दिन से अधिक की शिकायतों का निराकृत कर शून्य की स्थिति में लाएं साथ ही माह के प्रारंभ से ही सभी अधिकारी ए ग्रेड में आने का प्रयास करें । हितग्राहियों से संबंधित शिकायतों का विभाग प्राथमिकता से निराकरण करें। विभागीय अधिकारी समन्वय बनाकर निराकरण करें। उन्होने कहा कि कोई भी शिकायत अन अटेडेंट नही रहें। उन्होने महिला एवं बाल विकास विभाग से कहा कि आंगनबाडी का निर्माण पूर्ण करें । नवीन के लिए भूमि के चयन की कार्यवाही समय सीमा में करें । इसके साथ ही उन्होने गीता भवन के लिए उपयुक्त भूमि का चयन करनें के निर्देश दिए। बैठक में सीईओ जिला पंचायत अभय सिंह, संयुक्त कलेक्टर रीता डेहरिया, एसडीएम बांधवगढ़ अंबिकेश प्रताप सिंह,एसडीएम पाली मीनाक्षी इंगले, डिप्टी कलेक्टर कमलेश नीरज, प्रत्युष श्रीवास्तव सहित विभिन्न विभागों के जिला स्तरीय अधिकारी उपस्थित रहे।

आजतक 24 के प्रशासन से सवाल

1. 100 दिन से अधिक लंबित शिकायतों को इसी सप्ताह शत-प्रतिशत निपटाने का लक्ष्य रखा गया है, लेकिन वर्षों से लंबित मामलों में क्या वास्तव में फील्ड स्तर पर इतनी तेजी से गुणवत्तापूर्ण निराकरण संभव है या फिर सिर्फ आंकड़े सुधारने के लिए दबाव बनाया जा रहा है?

2. सीएम हेल्पलाइन और अन्य जनशिकायतों में “अनअटेंडेड शिकायतें नहीं रहेंगी” का निर्देश दिया गया है, तो अब तक जिन विभागों में लापरवाही के कारण शिकायतें लंबित रहीं, उनके जिम्मेदार अधिकारियों पर क्या कोई ठोस कार्रवाई या जवाबदेही तय की जाएगी?

3. बैठक में विभागों को “ए ग्रेड” लाने का लक्ष्य दिया गया है, लेकिन क्या यह ग्रेडिंग व्यवस्था वास्तविक जनसमस्याओं के समाधान पर आधारित है या फिर केवल रिपोर्टिंग और कागजी प्रदर्शन के आधार पर तय होती है?


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