| भारत-ईयू मानवाधिकार वार्ता: लोकतांत्रिक मूल्यों, नागरिक अधिकारों पर मंथन |
नई दिल्ली - भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) ने बढ़ते भू-राजनीतिक संकटों के बीच साझा लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। दोनों पक्षों के बीच 12वीं भारत-यूरोपीय संघ मानवाधिकार वार्ता 24 जून को यहां नई दिल्ली में आयोजित की गई। इस उच्च स्तरीय बैठक में जनवरी 2025 में हुई पिछली वार्ता के बाद से क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हुए मानवाधिकार बदलावों की गहन समीक्षा की गई।
इस वार्ता की सह-अध्यक्षता भारत की ओर से विदेश मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव (पश्चिम यूरोप) पीयूष श्रीवास्तव और यूरोपीय संघ की ओर से भारत में ईयू के राजदूत हर्वे डेल्फिन ने संयुक्त रूप से की। भारतीय विदेश मंत्रालय और यूरोपीय संघ (ईयू) के आधिकारिक राजनयिक मिशन (ईईएएस) द्वारा जारी संयुक्त बयान में कहा गया है कि दोनों पक्षों ने इस बैठक को बेहद सार्थक, स्वतंत्र और स्पष्ट (फ्री एंड फ्रैंक) बताया।
इस दौरान दोनों पक्षों ने मानवाधिकारों की सार्वभौमिकता और अविभाज्यता पर जोर देते हुए कई नागरिक, राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की। इसके अलावा लैंगिक समानता, बच्चों के अधिकार, प्रवासियों की सुरक्षा और एलजीबीटीक्यूआई समुदाय के अधिकारों पर दोनों पक्षों ने अपने विचार साझा किए।
विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में बताया बढ़ती वैश्विक चुनौतियों के दौर में, वार्ता के दौरान भारत और ईयू ने सभी मानवाधिकारों को बढ़ावा देने और उनकी रक्षा करने की अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया। प्रमुख लोकतंत्रों, खुली बाजार अर्थव्यवस्थाओं, विविध समाजों और दुनिया की लगभग एक चौथाई आबादी का घर होने के नाते, भारत और ईयू ने सभी मानवाधिकारों की सार्वभौमिकता, अविभाज्यता और परस्पर जुड़ाव पर जोर दिया।
इसके अलावा दोनों पक्षों ने संयुक्त राष्ट्र महासभा और संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (यूएनएचआरसी) के मंचों पर भी आपसी सहयोग बढ़ाने का संकल्प लिया। यह द्विपक्षीय मानवाधिकार संवाद अब वर्ष 2027 में आयोजित किया जाएगा।