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| महाराष्ट्र की राजनीति में भूचाल: आदित्य ठाकरे के सबसे करीबी सचिन अहीर शिंदे गुट में शामिल, बने उपसभापति पद के उम्मीदवार |
मुंबई - महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे और विशेषकर आदित्य ठाकरे को एक और तगड़ा राजनीतिक झटका लगा है। आदित्य ठाकरे के सबसे करीबी और भरोसेमंद माने जाने वाले विधान परिषद सदस्य (MLC) सचिन अहीर पाला बदलकर एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल हो गए हैं। शिंदे गुट में शामिल होते ही अहीर ने विधान परिषद के उपसभापति पद के लिए अपना नामांकन भी दाखिल कर दिया है।
नामांकन में उमड़ा महायुति का शीर्ष नेतृत्व
सचिन अहीर के नामांकन के दौरान महायुति सरकार की एकजुटता साफ नजर आई। इस मौके पर उनके साथ महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, सुनेत्रा पवार, शिवसेना विधायक और बीजेपी मंत्री चंद्रकांत पाटिल समेत कई दिग्गज नेता मौजूद रहे।
क्या है 'ऑपरेशन टाइगर-3'?
राजनीतिक गलियारों में सचिन अहीर के इस कदम को ‘ऑपरेशन टाइगर-3’ के रूप में देखा जा रहा है। शिंदे गुट के विधायक महेंद्र दलवी ने दावा किया कि यह आदित्य ठाकरे के लिए बड़ा निजी और राजनीतिक झटका है। उन्होंने कहा कि 'ऑपरेशन टाइगर-3' शुरू हो चुका है और आने वाले दिनों में उद्धव खेमे के कई और विधायक एकनाथ शिंदे के साथ जुड़ेंगे।
वर्ली के गढ़ में आदित्य को सीधी चुनौती
सचिन अहीर का मुंबई की शिवड़ी और वर्ली सीट पर मजबूत जनाधार है। वे एनसीपी के टिकट पर तीन बार विधायक और सूबे के गृह निर्माण राज्यमंत्री रह चुके हैं। साल 2019 और 2024 के चुनाव में उन्होंने वर्ली सीट से आदित्य ठाकरे की जीत में मुख्य भूमिका निभाई थी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि एकनाथ शिंदे ने अहीर को उपसभापति बनाकर सीधे आदित्य ठाकरे के गढ़ (वर्ली) में सेंध लगाने की रणनीति तैयार की है। लगभग तीन साल बाद होने वाले 2029 के विधानसभा चुनाव में वर्ली सीट पर आदित्य ठाकरे और सचिन अहीर के बीच सीधा और दिलचस्प मुकाबला देखने को मिल सकता है।
