मैदान छोड़ने को मजबूर किया गया', फलता चुनाव से जहांगीर खान के पीछे हटने पर TMC का भाजपा पर तीखा हमला!

मैदान छोड़ने को मजबूर किया गया', फलता चुनाव से जहांगीर खान के पीछे हटने पर TMC का भाजपा पर तीखा हमला!

कोलकाता/फलता - पश्चिम बंगाल की फलता विधानसभा सीट पर 21 मई को होने वाले पुनर्मतदान से ठीक पहले राज्य की सियासत में भूचाल आ गया है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के नेता जहांगीर खान द्वारा अचानक चुनावी मैदान से पीछे हटने की घोषणा के बाद टीएमसी नेतृत्व ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) और प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। टीएमसी ने मंगलवार को एक आधिकारिक बयान जारी कर स्पष्ट किया कि जहांगीर खान का उम्मीदवारी वापस लेना उनका व्यक्तिगत निर्णय है, इसका पार्टी की रणनीति से कोई लेना-देना नहीं है।

'100 से अधिक कार्यकर्ता गिरफ्तार, दफ्तरों पर कब्जा' — TMC

तृणमूल कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि राज्य में चुनाव के नतीजे घोषित होने के बाद से ही फलता क्षेत्र में उनके कार्यकर्ताओं को निशाना बनाया जा रहा है। पार्टी के अनुसार, 4 मई को चुनावी नतीजे आने के बाद से केवल फलता विधानसभा क्षेत्र में ही टीएमसी के 100 से अधिक कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया जा चुका है। इसके अलावा, पार्टी के कई कार्यालयों में खुलेआम तोड़फोड़ की गई, उन्हें जबरन बंद कराया गया या उन पर अवैध कब्जा कर लिया गया है। टीएमसी ने चुनाव आयोग की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। पार्टी का कहना है कि बार-बार शिकायत दर्ज कराने के बावजूद निर्वाचन आयोग मूकदर्शक बना हुआ है। टीएमसी ने कहा कि उनके जमीनी कार्यकर्ता भारी दबाव और हिंसा के माहौल में भी भाजपा के खिलाफ मजबूती से डटे हुए हैं, लेकिन कुछ लोग इस अप्रत्याशित दबाव को झेल नहीं पाए और मैदान छोड़ने को मजबूर हो गए।

जहांगीर खान ने दी सफाई: 'सोनार फलता' के लिए लिया फैसला

दूसरी ओर, अपनी उम्मीदवारी वापस लेने की घोषणा करते हुए जहांगीर खान ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि उनका यह फैसला फलता की शांति, सुरक्षा और विकास के हित में है। उन्होंने कहा,

"मैं चाहता हूँ कि फलता एक 'सोनार फलता' (स्वर्ण फलता) बने। मुख्यमंत्री इस क्षेत्र के विकास के लिए विशेष पैकेज दे रहे हैं, इसीलिए मैंने खुद को इस मतदान प्रक्रिया से अलग करने का फैसला किया है।"

जब उनसे पूछा गया कि क्या उन पर पार्टी या किसी अन्य संगठन का दबाव था, तो उन्होंने सीधे जवाब न देते हुए केवल इतना कहा कि उनका मुख्य उद्देश्य क्षेत्र में शांति बनाए रखना है。

क्यों हो रहा है दोबारा मतदान?

गौरतलब है कि फलता विधानसभा क्षेत्र में बीते 29 अप्रैल को मतदान हुआ था, जिसके दौरान बड़े पैमाने पर चुनावी अनियमितताओं और लोकतांत्रिक प्रक्रिया को बाधित करने के आरोप लगे थे। इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए निर्वाचन आयोग ने पूरे 144-फलता विधानसभा क्षेत्र के सभी 285 मतदान केंद्रों पर दोबारा मतदान (स्क्रैप और री-पोल) कराने का आदेश दिया था। इसके साथ ही पश्चिम मग्राहाट और डायमंड हार्बर के 15 बूथों पर भी कल दोबारा वोट डाले जाएंगे, जिनकी गिनती 24 मई को होगी।

बदला हुआ सियासी समीकरण

इस बार के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में ऐतिहासिक उलटफेर देखने को मिला है, जहाँ भाजपा ने 207 सीटें जीतकर राज्य में पहली बार अपनी सरकार बनाई है, वहीं ममता बनर्जी की अगुवाई वाली टीएमसी महज 80 सीटों पर सिमट गई है। ऐसे में फलता का यह उपचुनाव दोनों ही दलों के लिए साख की लड़ाई बन चुका है।

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