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| खेती पर वैश्विक संकट का साया: अंतरराष्ट्रीय बाजार में यूरिया और अमोनिया के दाम हुए दोगुने; मांग से आधी मिल रही सप्लाई |
नई दिल्ली: ग्लोबल मार्केट से आई एक नई रिपोर्ट ने भारत सहित दुनिया भर के कृषि विश्लेषकों को चिंता में डाल दिया है। 'सीआरयू ग्रुप' (CRU Group) की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, भारत द्वारा जारी किए गए अमोनिया टेंडर ने वैश्विक खाद आपूर्ति (Global Supply Chain) की पोल खोलकर रख दी है। स्थिति यह है कि भारत जितनी खाद की डिमांड कर रहा है, अंतरराष्ट्रीय सप्लायर ऊंची कीमतों के बावजूद उसका आधा हिस्सा भी देने की स्थिति में नहीं हैं। यह कमी आने वाले खरीफ और रबी सीजन के लिए एक खतरे की घंटी मानी जा रही है।
टेंडर की कहानी, आंकड़ों की जुबानी
बिजनेस स्टैंडर्ड की एक रिपोर्ट के मुताबिक, खाद की उपलब्धता को लेकर असली संकट इंडियन पोटाश लिमिटेड (IPL) के हालिया टेंडर से सामने आया:
अमोनिया की कुल मांग: भारत ने 5,21,000 टन अमोनिया के लिए ग्लोबल टेंडर जारी किया था।
मिली सिर्फ आधी बोली: इसके मुकाबले अंतरराष्ट्रीय सप्लायर्स की तरफ से केवल 2,39,000 टन के लिए ही बोलियां (ऑफर्स) आईं।
तटीय संकट: भारत के पश्चिमी तट के लिए जहाँ 1,51,000 टन अमोनिया की जरूरत थी, वहाँ सप्लायर्स ने केवल 1,01,000 टन का ऑफर दिया। वहीं, पूर्वी तट के लिए स्थिति और बदतर है; यहाँ 3,70,000 टन की भारी मांग के मुकाबले महज 1,38,000 टन अमोनिया ही ऑफर किया गया है।
इस रिस्पॉन्स से साफ है कि अब बात सिर्फ 'महंगी खाद' की नहीं रह गई है, बल्कि बाजार में खाद की 'शॉर्टेज' यानी उपलब्धता पर ही बड़ा संकट खड़ा हो गया है।
रूस-यूक्रेन और पश्चिम एशिया युद्ध की मार: दोगुने हुए दाम
मौजूदा दौर में चल रहे रूस-यूक्रेन युद्ध और पश्चिम एशिया (मिडल ईस्ट) के संघर्ष ने समुद्री व्यापारिक रास्तों को असुरक्षित और महंगा कर दिया है। इसी का नतीजा है कि खादों की कीमतें आसमान छू रही हैं:
यूरिया का ग्राफ: युद्ध से पहले जो यूरिया 510 डॉलर प्रति टन मिलता था, वह अब बढ़कर करीब 950 डॉलर प्रति टन तक पहुंच गया है।
अमोनिया का झटका: अमोनिया के दाम भी 500 डॉलर प्रति टन की बेस प्राइस से उछलकर 900 डॉलर प्रति टन के पार जा चुके हैं।
सल्फर का उतार-चढ़ाव: सल्फर की कीमतों में भी भारी अस्थिरता देखी जा रही है, जो पहले 800 डॉलर के उच्च स्तर पर रहने के बाद फिलहाल 500 डॉलर प्रति टन के आसपास है।
क्यों है अमोनिया बेहद जरूरी और क्या है भारत का प्लान?
अमोनिया को फर्टिलाइजर इंडस्ट्री की रीढ़ माना जाता है। यह मिट्टी को उपजाऊ बनाने वाले नाइट्रोजन आधारित खादों के उत्पादन के लिए सबसे मुख्य रॉ-मटेरियल (कच्चा माल) है। भारत अपनी खाद जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर आयात (इंपोर्ट) पर निर्भर रहता है।
सरकार का 'नैनो' सुरक्षा कवच: इस वैश्विक संकट को भांपते हुए केंद्र सरकार और कृषि मंत्रालय ने देश के किसानों से एक खास अपील की है। सरकार पारंपरिक बोरी वाले यूरिया की खपत को कम करने पर जोर दे रही है। इसके विकल्प के रूप में किसानों को 'नैनो यूरिया' (लिक्विड) का अधिक से अधिक उपयोग करने की सलाह दी जा रही है। नैनो यूरिया न सिर्फ स्वदेशी तकनीक से देश में ही तैयार होता है, बल्कि यह कम लागत में फसलों को अधिक पोषण भी देता है।
