रीवा; एक्शन मोड में कप्तान: SP गुरुकर्ण सिंह ने ग्रामीण थानों का किया औचक निरीक्षण, लापरवाही पर भड़के

रीवा; एक्शन मोड में कप्तान: SP गुरुकर्ण सिंह ने ग्रामीण थानों का किया औचक निरीक्षण, लापरवाही पर भड़के

रीवा - जिले के दूरस्थ और ग्रामीण अंचलों में कानून व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त करने तथा अपराधियों पर नकेल कसने के उद्देश्य से रीवा पुलिस अधीक्षक (SP) गुरुकर्ण सिंह ने एक बड़ा कदम उठाया है। शुक्रवार को पुलिस कप्तान ने जिला मुख्यालय से करीब 50 किलोमीटर दूर स्थित तराई और ग्रामीण अंचलों के विभिन्न थानों का औचक (सरप्राइज) निरीक्षण किया। SP की इस अचानक हुई धमक से ग्रामीण थानों के पुलिसकर्मियों और अधिकारियों में हड़कंप मच गया। इस दौरान उन्होंने थानों की आंतरिक व्यवस्था, उपलब्ध संसाधनों और जनसुरक्षा से जुड़े संवेदनशील मुद्दों की गहन समीक्षा की।

लंबित मामलों के निपटारे और रिकॉर्ड संधारण पर नाराजगी

निरीक्षण के दौरान पुलिस अधीक्षक गुरुकर्ण सिंह सीधे थानों के मालखाने, हवालात और कार्यालयीन कक्षों में पहुंचे। उन्होंने जब थानों के शासकीय अभिलेखों (Records) के रख-रखाव की स्थिति देखी, तो कुछ जगह लापरवाही मिलने पर मातहतों को सख्त फटकार लगाई। SP ने थानों में बरसों से लंबित पड़े मामलों (Pending Cases) की सूची तलब की और थाना प्रभारियों को कड़े लहजे में निर्देशित किया कि सभी लंबित विवेचनाओं का समय सीमा के भीतर निराकरण किया जाए, ताकि पीड़ितों को त्वरित न्याय मिल सके।

तराई और सीमावर्ती क्षेत्रों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता

मीडियाकर्मियों से रूबरू होते हुए पुलिस अधीक्षक ने स्पष्ट किया कि ग्रामीण और विशेषकर तराईलॉबी (सीमावर्ती क्षेत्रों) की सुरक्षा प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा:

"क्षेत्रीय भ्रमण का मुख्य उद्देश्य थानों की वास्तविक स्थिति और धरातल पर कानून व्यवस्था का सटीक आकलन करना है। तराई और सीमावर्ती दूरस्थ क्षेत्रों में पुलिस की मौजूदगी व विजिबिलिटी को और अधिक प्रभावी बनाया जा रहा है, ताकि असामाजिक तत्वों पर पूरी तरह से अंकुश लगाया जा सके।"

पुलिस बल की कमी पर बोले SP: "उच्च स्तर पर प्रक्रिया जारी"

जब पत्रकारों ने ग्रामीण थानों में पुलिस बल (Manpower) और आधुनिक संसाधनों की भारी कमी को लेकर सवाल उठाया, तो पुलिस कप्तान ने इस चुनौती को स्वीकार किया। उन्होंने सकारात्मक संकेत देते हुए कहा कि थानों में बल की कमी को दूर करने के लिए शासन और उच्च स्तर पर पत्राचार व प्रक्रिया तेजी से चल रही है। आने वाले समय में ग्रामीण थानों को अतिरिक्त बल और नए वाहन-संसाधन मुहैया कराए जाएंगे, जिससे फील्ड पुलिसिंग को और अधिक मजबूती मिलेगी।

संसाधनों की कमी को बहाना न बनाएं: कप्तानी निर्देश

SP गुरुकर्ण सिंह ने थानों में तैनात पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को दो टूक शब्दों में हिदायत दी कि संसाधनों की कमी को काम में कोताही का बहाना नहीं बनाया जा सकता। उन्होंने निम्नलिखित कड़े निर्देश जारी किए:

  • पैदल गश्त: उपलब्ध बल के साथ ही ग्रामीण और कस्बाई क्षेत्रों में रात्रि गश्त और शाम की पैदल पेट्रोलिंग को अनिवार्य रूप से बढ़ाया जाए।

  • मित्रवत व्यवहार: आम नागरिकों और ग्रामीणों के साथ पुलिस का व्यवहार संवेदनशील और मित्रवत होना चाहिए, ताकि जनता बिना किसी झिझक या डर के अपनी शिकायतें दर्ज करा सके।

  • क्विक रिस्पॉन्स: किसी भी प्रकार के अपराध, विवाद या शांति भंग होने की सूचना पर पुलिस की रिस्पॉन्स टाइमिंग (घटनास्थल पर पहुँचने का समय) बेहद तेज होनी चाहिए।

प्रशासनिक कसावट से जनता में जगी सुरक्षा की उम्मीद

पुलिस अधीक्षक द्वारा किए गए इस औचक निरीक्षण को रीवा जिले में प्रशासनिक कसावट के एक नए दौर के रूप में देखा जा रहा है। स्थानीय ग्रामीणों और प्रबुद्ध नागरिकों का मानना है कि आला अधिकारियों के इस तरह अचानक फील्ड पर उतरने से थाना स्तर पर पुलिसिंग जवाबदेह बनेगी। इससे न केवल थानों की कार्यप्रणाली में सुधार होगा, बल्कि तराई अंचल में पनप रहे छोटे-बड़े अपराधों पर भी प्रभावी रोक लगेगी, जिससे आमजन खुद को अधिक सुरक्षित महसूस कर सकेगा।



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