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| कोरिया, “QR कोड से खुला विकास का दरवाज़ा: कोरिया के गांवों में योजनाओं की डिजिटल क्रांति! Aajtak24 News |
कोरिया - जिले की ग्राम पंचायतों में मनरेगा कार्यस्थलों पर “ग्राम रोजगार सह आवास दिवस” का आयोजन बड़े पैमाने पर किया गया, जहां ग्रामीण विकास, रोजगार, आवास और जल संरक्षण से जुड़ी योजनाओं को जनभागीदारी के साथ गति देने का प्रयास दिखाई दिया। कार्यक्रम में श्रमिकों, महिलाओं और ग्रामीणों की बड़ी संख्या में भागीदारी रही, जिससे पूरा आयोजन एक जनआंदोलन का स्वरूप लेता नजर आया।
इस अवसर पर ग्रामीणों ने क्यूआर कोड स्कैन कर सरकारी योजनाओं की जानकारी प्राप्त की, जिससे पारदर्शिता और डिजिटल जागरूकता को बढ़ावा मिला। पंचायतों में लगाए गए क्यूआर कोड के माध्यम से मनरेगा, प्रधानमंत्री आवास योजना और अन्य विकास कार्यों की स्थिति सीधे देखी जा सकती है।
योजनाओं के कार्यों में तेजी
कार्यक्रम के दौरान मनरेगा और प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत लंबित भुगतान और जियो-टैगिंग कार्यों को ग्राम स्तर पर विशेष अभियान चलाकर पूर्ण किया गया। अधिकारियों ने बताया कि सुशासन तिहार के अंतर्गत आयोजित क्लस्टर शिविरों से पहले हितग्राहियों से संपर्क कर सभी प्रक्रियाओं को तेजी दी गई है।
90 दिनों में आवास निर्माण का लक्ष्य
हितग्राहियों ने सामूहिक रूप से संकल्प लिया कि स्वीकृत आवासों का निर्माण अधिकतम 90 दिनों के भीतर पूरा किया जाएगा। पंचायतों में निर्माण कार्यों की नियमित मॉनिटरिंग और गति बढ़ाने पर जोर दिया गया।
जल संरक्षण पर सामूहिक प्रतिबद्धता
ग्राम स्तर पर जल संरक्षण कार्यों को वर्षा ऋतु से पहले पूरा करने पर विशेष चर्चा हुई। ग्रामीणों ने जल संचय को जीवन का आधार मानते हुए इसे आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखने का संकल्प लिया। महिलाओं ने भी इस अभियान में सक्रिय भूमिका निभाने की प्रतिबद्धता जताई।
आजीविका और डबरी निर्माण पर फोकस
स्व-सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं ने स्थायी आजीविका के साधन विकसित करने पर चर्चा की। आजीविका डबरी निर्माण को आय के स्थायी स्रोत के रूप में विकसित करने की योजना पर भी जोर दिया गया, जिसके तहत इस महीने सैकड़ों डबरियों का निर्माण पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
डिजिटल पारदर्शिता की नई पहल
गांवों में लगाए गए क्यूआर कोड ग्रामीणों के लिए विकास योजनाओं की जानकारी का आसान माध्यम बन रहे हैं। लोग अब अपने मोबाइल से स्कैन कर गांव में चल रहे कार्यों की स्थिति देख पा रहे हैं, जिससे पारदर्शिता और जन-जागरूकता दोनों में बढ़ोतरी हुई है।
आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल
- जब योजनाओं की जानकारी QR कोड से मिल रही है, तो क्या यह सुनिश्चित है कि गांव के सभी गरीब और बुजुर्ग, जिनके पास स्मार्टफोन नहीं है, वे भी समान रूप से जानकारी और लाभ ले पा रहे हैं?
- मनरेगा और आवास योजना में 90 दिनों में निर्माण पूरा करने का लक्ष्य तो रखा गया है, लेकिन क्या जमीनी स्तर पर सामग्री आपूर्ति, भुगतान और तकनीकी स्टाफ की कमी इस लक्ष्य को प्रभावित नहीं करेगी?
- आज भी कई पंचायतों में जियो-टैगिंग और भुगतान कार्य “अभियान” के नाम पर पूरे किए जा रहे हैं—क्या यह पहले से समय पर पूरा न होने वाली प्रशासनिक लापरवाही को उजागर नहीं करता?
