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| NEET-UG लीक का 'लातूर कनेक्शन': CBI के हत्थे चढ़ा करोड़ों के कोचिंग नेटवर्क का मालिक |
नई दिल्ली/लातूर - नीट यूजी 2026 पेपर लीक मामले की परतें जैसे-जैसे खुल रही हैं, शिक्षा जगत के कई बड़े और प्रतिष्ठित चेहरे बेनकाब हो रहे हैं। सीबीआई ने सोमवार को महाराष्ट्र के दिग्गज कोचिंग संचालक शिवराज रघुनाथ मोटेगांवकर उर्फ 'एम सर' को दिल्ली की राउस एवेन्यू कोर्ट में पेश किया। सीबीआई ने इस मुख्य साजिशकर्ता से कड़ाई से पूछताछ करने और नेटवर्क के अन्य किरदारों का पता लगाने के लिए अदालत से 10 दिन की रिमांड मांगी है।
कौन है 'M Sir' और कितना बड़ा है इसका नेटवर्क?
2 फरवरी 1980 को जन्मे शिवराज रघुनाथ मोटेगांवकर ने केमिस्ट्री विषय में एमएससी (M.Sc) किया है और वे गोल्ड मेडलिस्ट रहे हैं। पिछले दो दशकों से लातूर और पूरे महाराष्ट्र के छात्रों के बीच वे सफलता की गारंटी माने जाते थे।
RCC का साम्राज्य: 'एम सर' ने साल 2003 में लातूर में रेणुकाई करियर सेंटर (RCC) नाम से एक कोचिंग संस्थान की शुरुआत की थी। देखते ही देखते यह संस्थान इतना मशहूर हो गया कि इसका विस्तार महाराष्ट्र के 8 प्रमुख शहरों— पुणे, नासिक, छत्रपति संभाजीनगर (औरंगाबाद), नांदेड़, सोलापुर, कोल्हापुर और अकोला तक हो गया।
यहाँ हजारों बच्चे नीट (NEET), जेईई (JEE) और MHT-CET की तैयारी करते हैं। संस्थान की वेबसाइट पर उन्हें एक 'विजनरी एजुकेटर' के रूप में प्रचारित किया जाता था, लेकिन इस लीक कांड ने उनकी साख को पूरी तरह मिट्टी में मिला दिया है।
मोबाइल की जांच से खुला 'एम सर' का काला चिट्ठा
3 मई 2026 को आयोजित हुई नीट यूजी परीक्षा पेपर लीक के दावों के बाद 12 मई को ही रद्द की जा चुकी है। इस मामले में नया मोड़ तब आया जब एक जागरूक अभिभावक ने शिकायत दर्ज कराई कि एक निजी मॉक टेस्ट सीरीज के 42 प्रश्न मुख्य परीक्षा के प्रश्नपत्र से हूबहू (100%) मेल खा रहे थे।
जांच एजेंसियों ने जब इस सुराग का पीछा किया, तो तार सीधे लातूर में बैठे 'एम सर' से जुड़ गए। तकनीकी जांच और मोबाइल फॉरेंसिक से यह बेहद चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि शिवराज मोटेगांवकर के पास परीक्षा से ठीक 10 दिन पहले, यानी 23 अप्रैल 2026 को ही नीट यूजी के केमिस्ट्री विषय के सारे सवाल और उनके सटीक जवाब (आंसर-की) आ चुके थे।
सीबीआई का आरोप: कई लोगों को बेचे सवाल
सीबीआई के आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, 'एम सर' के मोबाइल फोन से लीक हुए प्रश्नपत्रों के पुख्ता डिजिटल सबूत मिले हैं। आरोप है कि मोटेगांवकर ने इस कथित पेपर लीक सिंडिकेट के अन्य मास्टरमाइंड्स के साथ मिलकर कई रसूखदार छात्रों और बिचौलियों को मोटी रकम के बदले लीक प्रश्नपत्र और उत्तर पुस्तिकाओं की कॉपियां बांटी थीं। फिलहाल सीबीआई इस बात की तफ्तीश कर रही है कि 'एम सर' को यह पेपर किसने सप्लाई किया था और इस काले खेल में कितने करोड़ रुपये का लेन-देन हुआ है।
