| शहडोल: 'स्वास्थ्य मंत्री' के प्रभार वाले जिले में सिस्टम की 'छत' से टपका पानी, ICU में मची अफरा-तफरी Aajtak24 News |
शहडोल- कहने को तो शहडोल प्रदेश के उपमुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल के प्रभार वाला जिला है, लेकिन यहाँ की स्वास्थ्य व्यवस्था खुद 'इलाज' की बाट जोह रही है। संभागीय मुख्यालय स्थित कुशाभाऊ ठाकरे जिला अस्पताल से एक ऐसा वीडियो वायरल हुआ है, जिसने सरकारी दावों की पोल खोलकर रख दी है। यहाँ के ट्रॉमा आईसीयू (ICU) की छत से अचानक इस कदर पानी टपकने लगा कि वार्ड जलमग्न हो गया और जान बचाने के लिए मरीजों के परिजनों को खुद ही मोर्चा संभालना पड़ा।
ICU बना तालाब, जान बचाने पलंग खींचते रहे परिजन
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, पानी गिरने का स्तर इतना अधिक था कि कुछ ही मिनटों में आईसीयू कक्ष में पानी भर गया। सबसे दुखद स्थिति उन गंभीर मरीजों की थी जो मशीनों के सहारे बिस्तर पर थे। पानी सीधे मरीजों के ऊपर गिरने लगा, जिससे वहां अफरा-तफरी मच गई। अस्पताल कर्मचारियों की अनुपस्थिति में परिजनों को खुद ही मरीजों के भारी-भरकम पलंग खींचकर सुरक्षित स्थानों पर ले जाना पड़ा। बाद में पहुंचे सफाई कर्मियों ने कमरे से पानी बाहर निकाला, तब कहीं जाकर स्थिति सामान्य हुई।
लापरवाही की इंतहा: निर्माण कार्य बना मुसीबत
जांच में सामने आया है कि अस्पताल की छत पर नई लैब का निर्माण कार्य चल रहा है। निर्माण के दौरान ठेकेदार या कर्मचारियों की लापरवाही से पानी की पाइप लाइन क्षतिग्रस्त हो गई। छत पर पानी जमा हुआ और वह सीपेज (रिसाव) के जरिए सीधे नीचे स्थित ट्रॉमा आईसीयू की छत फाड़कर अंदर गिरने लगा। संवेदनशील वार्ड के ठीक ऊपर इस तरह के निर्माण कार्य में बरती गई सावधानी पर अब सवाल उठ रहे हैं।
वसूली के आरोपों से पहले ही घिरा है अस्पताल
यह घटना उस समय सामने आई है जब जिला अस्पताल पहले से ही भ्रष्टाचार के आरोपों से जूझ रहा है। यहाँ आए दिन मरीजों से ऑपरेशन और अन्य सुविधाओं के नाम पर अवैध वसूली की शिकायतें मिलती रहती हैं। बार-बार होने वाली शिकायतों के बावजूद प्रशासन ने अब तक कोई ठोस सुधारात्मक कदम नहीं उठाया है। अब आईसीयू में पानी भरने की इस घटना ने 'स्मार्ट हेल्थ सिस्टम' के नारों को डस्टबिन में डाल दिया है।
सिविल सर्जन का रटा-रटाया जवाब: "जांच जारी है"
पूरे मामले पर सिविल सर्जन डॉ. शिल्पी सराफ ने सफाई देते हुए कहा कि कर्मचारियों ने मौके पर पहुंचकर स्थिति संभाल ली थी। उन्होंने यह भी बताया कि छत में सीपेज की वास्तविक वजह जानने के लिए एनएचएम (NHM) इंजीनियर को जांच के निर्देश दिए गए हैं। हालांकि, सवाल यह उठता है कि क्या केवल जांच के नाम पर खानापूर्ति की जाएगी या उन लापरवाह अधिकारियों और ठेकेदारों पर कार्रवाई होगी जिनकी वजह से गंभीर मरीजों की जान जोखिम में पड़ी?