रीवा; भ्रष्टाचार पर कड़ा प्रहार: रीवा-मऊगंज की पंचायतों में 'सर्जिकल स्ट्राइक', कई थानों में FIR दर्ज Aajtak24 News

रीवा; भ्रष्टाचार पर कड़ा प्रहार: रीवा-मऊगंज की पंचायतों में 'सर्जिकल स्ट्राइक', कई थानों में FIR दर्ज Aajtak24 News

रीवा/मऊगंज - विंध्य क्षेत्र की ग्राम पंचायतों में सरकारी खजाने की 'बंदरबांट' करने वाले सफेदपोशों के खिलाफ प्रशासन ने अब तक की सबसे बड़ी और निर्णायक कार्रवाई शुरू कर दी है। रीवा और नवनिर्मित मऊगंज जिले की दर्जनों पंचायतों में करोड़ों रुपये की वित्तीय अनियमितताएं सामने आने के बाद, दोषी सरपंचों और सचिवों के विरुद्ध कानूनी शिकंजा कसना शुरू हो गया है।

इन थानों में शुरू हुई वैधानिक कार्रवाई

प्रशासनिक जांच में भ्रष्टाचार की पुष्टि होने के बाद पुलिस ने विभिन्न थानों में प्राथमिकी (FIR) दर्ज करना शुरू कर दिया है। वर्तमान में इन क्षेत्रों में पुलिसिया कार्रवाई तेज है:

  • मऊगंज जिला: नईगढ़ी थाना।

  • रीवा जिला: मनगवां, रायपुर कर्चुलियान, सिरमौर, बैकुंठपुर और जवा। प्रशासन की इस अप्रत्याशित सक्रियता से भ्रष्ट तंत्र और बिचौलियों में हड़कंप मचा हुआ है।

कागजों पर 'स्वर्ग' पर धरातल पर 'शून्य': जांच में हुए चौंकाने वाले खुलासे

ग्राउंड जीरो पर हुए भौतिक सत्यापन ने विभागीय दावों की पोल खोल कर रख दी है। जांच में सामने आया है कि पंचायतों का विकास केवल फाइलों तक सीमित था:

  • गायब शौचालय: कई पंचायतें कागजों पर ओडीएफ (ODF) घोषित हैं, लेकिन हकीकत में शौचालय निर्माण के नाम पर सिर्फ राशि निकाली गई, मौके पर ढांचे तक नदारद हैं।

  • अस्तित्वहीन आंगनवाड़ी: कई पंचायतों में आंगनवाड़ी भवनों का पूर्ण भुगतान हो चुका है, लेकिन मौके पर भवन का एक पत्थर भी नहीं रखा गया।

  • खेती के नाम पर फर्जीवाड़ा: मेढ़ बंधान, कूप निर्माण और मिनी तालाब के नाम पर भारी भुगतान उठाया गया। खसरा नंबरों के आधार पर जब जांच की गई, तो पाया गया कि जमीन पर कोई कार्य ही नहीं हुआ है।

भ्रष्टाचार का 'नेक्सस': तकनीकी और प्रशासनिक मिलीभगत?

ग्रामीणों और स्थानीय सक्रिय कार्यकर्ताओं का स्पष्ट आरोप है कि बिना तकनीकी अधिकारियों (इंजीनियरों) और उच्च विभागीय अमले की मिलीभगत के इतना बड़ा घोटाला मुमकिन नहीं था। सवाल यह भी है कि सत्यापन करने वाले अधिकारियों ने अब तक इन 'अदृश्य' निर्माण कार्यों को 'पूर्ण' कैसे माना?

जनता की मांग: केवल FIR नहीं, वसूली भी हो

प्रशासनिक अमला भले ही एफआईआर को अपनी बड़ी उपलब्धि मान रहा हो, लेकिन जनता के मन में कुछ बुनियादी सवाल अभी भी शेष हैं:

  1. वसूली कब: क्या इन भ्रष्ट पदाधिकारियों से जनता की गाढ़ी कमाई के पैसे की वसूली की जाएगी?

  2. सलाखों के पीछे: क्या केवल कागजी कार्रवाई होगी या दोषियों को जेल की सलाखों के पीछे भेजा जाएगा?

  3. जांच का दायरा: क्या उन तकनीकी अधिकारियों पर भी कार्रवाई होगी जिन्होंने फर्जी मूल्यांकन (Valuation) रिपोर्ट तैयार की?

रीवा और मऊगंज में शुरू हुई यह कार्रवाई सुशासन की दिशा में एक सकारात्मक कदम है। हालांकि, इसे तार्किक परिणति तक पहुँचाना वर्तमान प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती होगी। यदि यह अभियान निरंतर चलता है, तभी सरकारी योजनाओं का लाभ अंतिम पंक्ति के व्यक्ति तक पहुँच पाएगा।

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