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| रीवा; जन चौपाल में पहुंचे ग्रामीण, गंगेव जनपद CEO पर शासकीय दुकानें अवैध रूप से बेचने का संगीन आरोप Aajtak24 News |
रीवा - रीवा जिले की जनपद पंचायत गंगेव से भ्रष्टाचार और शासकीय संपत्ति की अवैध बिक्री का एक बेहद गंभीर और सनसनीखेज मामला सामने आया है। ग्राम टिकुरी 32 में आयोजित हुई 'जन चौपाल' के दौरान स्थानीय नागरिकों ने जिला कलेक्टर के समक्ष गंगेव जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) पर शासकीय दुकानों को अवैध रूप से बेचने का संगीन आरोप लगाया है। ग्रामीणों की इस शिकायत के बाद प्रशासनिक हल्के में हड़कंप मच गया है।
लाखों रुपये में दिग्गज व्यापारियों को दुकानें बेचने का आरोप
मामले को लेकर शिकायतकर्ता राकेश कुमार सिंह ने विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि गंगेव के हाट बाजार में स्थित लगभग 14 शासकीय दुकानों को जनपद पंचायत सीईओ द्वारा नियमों को ताक पर रखकर, गुपचुप तरीके से बड़े-बड़े रसूखदारों और दिग्गज व्यापारियों को बेच दिया गया है।
आरोप है कि इस पूरे खेल में भारी लेन-देन हुआ है और प्रत्येक दुकान को करीब 25 से 30 लाख रुपये में बेचा गया है। हैरान करने वाली बात यह है कि इस पूरी प्रक्रिया की आम जनता, स्थानीय छोटे दुकानदारों या पंचायत के अन्य प्रतिनिधियों को भनक तक नहीं लगने दी गई। ग्रामीणों का कहना है कि जब भी कोई इस संबंध में सूचना के अधिकार या सामान्य तौर पर जानकारी लेने का प्रयास करता है, तो जिम्मेदार अधिकारी टालमटोल कर उन्हें वहां से भगा देते हैं।
6-7 महीने पहले हुआ 'खेल', कलेक्टर ने दिए जांच के निर्देश
पीड़ित पक्ष और स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, यह दुकानें करीब 6-7 महीने पहले ही सांठगांठ करके बेची जा चुकी हैं। जन चौपाल में ग्रामीणों ने एकजुट होकर इस पूरे मामले की एक लिखित शिकायत जिला कलेक्टर को सौंपी और निष्पक्ष कार्रवाई की मांग की।
शिकायत पर तत्काल संज्ञान लेते हुए रीवा कलेक्टर ने ग्रामीणों को उचित वैधानिक कार्रवाई का ठोस आश्वासन दिया है। कलेक्टर ने मामले की गंभीरता को देखते हुए उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच कराने की बात कही है।
प्रशासनिक साख पर सवाल
शासकीय हाट बाजार की दुकानों को बिना किसी खुली नीलामी या पारदर्शी प्रक्रिया के रसूखदारों को बेचे जाने के इस आरोप ने जनपद पंचायत के कामकाज और पारदर्शिता को कटघरे में खड़ा कर दिया है। अब क्षेत्र की जनता की नजरें प्रशासन की जांच पर टिकी हैं कि इस कथित दुकान बिक्री घोटाले की परतें कब खुलती हैं और दोषियों पर क्या कार्रवाई होती है।
