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| रीवा में प्रशासनिक हड़कंप: बस में अफसरों की 'फौज' लेकर गंगेव के तिकुरी देवी मंदिर पहुंचे कलेक्टर Aajtak24 News |
रीवा - जिला कलेक्टर नरेंद्र सूर्यवंशी के कड़े तेवरों और जन-सरोकार के चलते जिले में प्रशासनिक कसावट तो दिखने लगी है, लेकिन धरातल पर अमले की सुस्ती अब भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। सोमवार, 18 मई 2026 को शाम 5:20 बजे से लेकर 7:30 बजे तक चली कलेक्टर की 'जन चौपाल' स्थान तिकुरी देवी मंदिर चबूतरा जनपद पंचयात गंगेव तहसील मांगनवा जिला रीवा (मध्यप्रदेश )में इसका सीधा नजारा देखने को मिला, जहां एक ओर जनता का कलेक्टर के प्रति विश्वास हिलोरें लेता दिखा, वहीं दूसरी ओर बुनियादी व्यवस्थाओं की पोल भी खुल गई।
विशेष बात यह रही कि कलेक्टर अकेले नहीं, बल्कि 'बस' में सवार होकर राजस्व, विद्युत मंडल, स्वास्थ्य, महिला बाल विकास, पंचायत और बैंकिंग समेत तमाम महत्वपूर्ण विभागों के आला अधिकारियों की पूरी फौज के साथ सीधे जनता के बीच संवाद करने पहुंचे थे।
सीएम डॉ. मोहन यादव की परिकल्पना को धरातल पर उतारने की कवायद
बैठक में कलेक्टर नरेंद्र सूर्यवंशी ने साफ शब्दों में कहा कि मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मंशानुरूप अंतिम छोर के व्यक्ति तक शासन की योजनाओं का लाभ पहुंचना चाहिए और यह परिकल्पना रीवा जिले में पूर्ण रूपेण धरातल पर लागू होनी चाहिए। उन्होंने लापरवाह कर्मचारियों को सख्त हिदायत (विदाई संदेश के लहजे में) देते हुए कहा:
"मेरे किसी क्षेत्र में पहुंचने से पहले ही आप लोग वहां की स्थानीय समस्याओं का खुद निराकरण कर लें। जनता को परेशान होने की जरूरत नहीं पड़नी चाहिए।"
कलेक्टर ने हर विभाग को समय-सीमा (टाइम-लाइन) के भीतर सभी शिकायतों का निराकरण करने का कड़ा आदेश थमाया है।
चौपाल में खुली व्यवस्थाओं की पोल: जहां बैठे कलेक्टर, वहीं झूल रहे थे तार
जनसंवाद के दौरान ग्रामीण अंचलों की बदहाल सड़कों, पानी की भारी किल्लत और महिला बाल विकास विभाग के तहत आंगनबाड़ी केंद्रों के संचालित न होने की गंभीर शिकायतें सामने आईं। स्वास्थ्य विभाग की कमियां भी उजागर हुईं।
हद तो तब हो गई जब खुद कलेक्टर ने अपनी आंखों से बिजली विभाग की बदहाली देखी। जिस जगह कलेक्टर की चौपाल चल रही थी, ठीक वहीं ऊपर विद्युत विभाग के 'कटिया' (अवैध कनेक्शन) और ढीले तार झूलते नजर आए। ग्रामीणों ने मौके पर मीटर न लगाए जाने की भी लिखित शिकायत दर्ज कराई।
जन-विश्वास बना चुनौती; कर्मचारी बोले- 'सुसाइड करना पड़ेगा'
रीवा में जब से कलेक्टर नरेंद्र सूर्यवंशी ने पदभार संभाला है, वे लगातार पूरे अमले को बस में भरकर जनता के द्वार पहुंच रहे हैं। स्थिति यह है कि आज जिले के जनप्रतिनिधियों से कहीं ज्यादा जनता को जिला कलेक्टर पर भरोसा होने लगा है। यही बढ़ता विश्वास अब प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती भी बनता जा रहा है, क्योंकि हर मंगलवार और जन चौपाल में शिकायतों का अंबार लग रहा है। कलेक्टर की इस 'सुपर एक्टिव' कार्यशैली से लापरवाह कर्मचारियों के पसीने छूट रहे हैं। बैठक खत्म होने के बाद जनपद के एक कर्मचारी का दर्द तो इस कदर छलका कि उसने एक शिकायतकर्ता से बातचीत में यहां तक कह दिया।
"कलेक्टर साहब की इस कड़ाई और शिकायतों के दबाव से परेशान होकर लगता है अब मुझे सुसाइड (आत्महत्या) करना पड़ेगा।"
धरातल पर अब भी 'असर' का इंतजार
भले ही कलेक्टर के दौरों से प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मचा हो, लेकिन जमीनी हकीकत अब भी चिंताजनक है। कलेक्टर के पहुंचने से पहले स्थानीय अमला व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने में नाकाम साबित हो रहा है। यही वजह है कि जन चौपालों में फरियादियों की कतारें छोटी होने का नाम नहीं ले रही हैं। देखना दिलचस्प होगा कि रीवा कलेक्टर का यह 'बस मार्च' और कड़ा रुख आने वाले दिनों में धरातल पर कितना स्थाई सुधार ला पाता है। कलेक्टर साहब जिंदाबाद के नारे जनता ने खूब लगाए।
