राजगढ़; साइकिल से दफ्तर पहुंचे CEO, लेकिन सिस्टम अब भी ‘पैदल’! कलेक्टर की बैठक में खुली विभागों की सुस्ती की परतें Aajtak24 News

राजगढ़; साइकिल से दफ्तर पहुंचे CEO, लेकिन सिस्टम अब भी ‘पैदल’! कलेक्टर की बैठक में खुली विभागों की सुस्ती की परतें Aajtak24 News

राजगढ़ - जिले में लंबित शिकायतों, सुस्त विभागीय कार्यप्रणाली और योजनाओं के धीमे क्रियान्वयन पर आखिरकार प्रशासन का सख्त रुख सामने आया है। सोमवार को कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित समीक्षा बैठक में कलेक्टर डॉ. गिरीश कुमार मिश्रा ने सीएम हेल्पलाइन, सार्थक पोर्टल, समग्र आईडी ई-केवाईसी, ई-ऑफिस और विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं की विभागवार समीक्षा करते हुए अधिकारियों को खरी-खरी सुनाई। बैठक में साफ संकेत दिए गए कि अब लापरवाही और फाइलों का ढेर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

बैठक के दौरान सबसे ज्यादा नाराजगी सार्थक पोर्टल पर विभागीय उपस्थिति को लेकर देखने को मिली। पशुपालन, आबकारी और आयुष विभाग की उपस्थिति बेहद कमजोर पाए जाने पर कलेक्टर ने कड़ी नाराजगी जताई। नरसिंहगढ़ की सुश्री कुसुम यादव को निलंबन नोटिस जारी करने के निर्देश दिए गए, जबकि ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी सुश्री निर्मा यादव और सुश्री पूजा यादव को भी नोटिस थमाने के आदेश हुए। जिला आयुष अधिकारी डॉ. अनिल जांगोलिया, डॉ. विजेता बरांगे और सिविल सप्लाई कॉर्पोरेशन के अधिकारी श्री अर्निश खान से भी जवाब तलब किया गया।

बैठक में संबल योजना के तहत एक साल से अधिक समय से लंबित अनुग्रह सहायता प्रकरणों को गंभीर लापरवाही माना गया। कलेक्टर ने स्पष्ट कहा कि गरीब और जरूरतमंद परिवारों को राहत देने वाली योजनाओं में देरी किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं की जाएगी। पेंशन प्रकरणों के धीमे निराकरण पर भी अधिकारियों को समय-सीमा तय कर काम करने के निर्देश दिए गए।

प्रशासनिक पारदर्शिता बढ़ाने के लिए कलेक्टर ने बड़ा फैसला लेते हुए ब्यावरा एसडीएम को सीमांकन संबंधी आवेदन केवल ऑनलाइन माध्यम से स्वीकार करने के निर्देश दिए। ऑफलाइन आवेदन पूरी तरह बंद करने की बात कही गई ताकि प्रक्रिया में पारदर्शिता आए और शिकायतों की गुंजाइश कम हो। स्थानीय निर्वाचन की तैयारियों को लेकर भी सख्ती दिखाई गई और दावा-आपत्ति से जुड़े हर प्रकरण को पोर्टल पर अनिवार्य रूप से दर्ज करने के निर्देश दिए गए।

ई-ऑफिस व्यवस्था की समीक्षा में भी कई कमियां सामने आईं। कलेक्टर ने कहा कि एक ही विषय से जुड़ी कई फाइलें चलाना प्रशासनिक अव्यवस्था को बढ़ाता है। उन्होंने निर्देश दिए कि अब एक विषय पर केवल एक ही फाइल संचालित की जाए। साथ ही सभी विभागों को एनआईसी के माध्यम से ई-ऑफिस का प्रशिक्षण देने के आदेश भी जारी किए गए।

बैठक में प्रशासनिक खर्च और ईंधन बचत को लेकर भी चर्चा हुई। कलेक्टर ने पूल वाहन व्यवस्था के बेहतर उपयोग पर जोर दिया। इसी बीच जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी डॉ. इच्छित गढ़पाले का साइकिल से कार्यालय पहुंचना चर्चा का विषय बन गया। इसे पर्यावरण संरक्षण और स्वास्थ्य जागरूकता का संदेश बताया गया, लेकिन बैठक में उठे सवाल यह भी बताते रहे कि सिस्टम की रफ्तार अभी भी कई विभागों में धीमी बनी हुई है।

आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल

  1. जब सीएम हेल्पलाइन और संबल योजना के प्रकरण एक-एक साल से लंबित हैं, तो क्या जिम्मेदार अधिकारियों पर सिर्फ नोटिस देकर कार्रवाई पूरी मान ली जाएगी या वास्तविक दंडात्मक कार्रवाई भी होगी?
  2. सार्थक पोर्टल पर कई विभागों की उपस्थिति खराब मिली, तो क्या इसका मतलब यह माना जाए कि अधिकारी फील्ड मॉनिटरिंग और शासन की डिजिटल व्यवस्था को गंभीरता से नहीं ले रहे?
  3. सीमांकन के ऑफलाइन आवेदन बंद करने का फैसला लिया गया है, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल सुविधा और तकनीकी जानकारी की कमी के बीच आम लोगों को होने वाली परेशानी की जिम्मेदारी कौन लेगा?

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