हरदा में जिला पंचायत CEO का ‘ग्राउंड टेस्ट’, पानी से लेकर कचरा प्रबंधन तक अफसरों को फटकार Aajtak24 News

हरदा में जिला पंचायत CEO का ‘ग्राउंड टेस्ट’, पानी से लेकर कचरा प्रबंधन तक अफसरों को फटकार Aajtak24 News

हरदा - जिले की ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों की जमीनी हकीकत जानने के लिए जिला पंचायत प्रशासन अब फील्ड में सक्रिय नजर आ रहा है। मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत अंजली जोसेफ जोनाथन ने गुरुवार को कई ग्राम पंचायतों का औचक निरीक्षण कर विकास कार्यों की प्रगति की समीक्षा की और अधिकारियों को काम में तेजी लाने के निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान सीईओ सबसे पहले ग्राम पंचायत रन्हाईकला पहुंचीं, जहां उन्होंने नल-जल योजना की स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि हर घर तक स्वच्छ पेयजल की नियमित आपूर्ति सुनिश्चित की जाए और कहीं भी पानी की समस्या लंबित न रहे।

इसके बाद उन्होंने आंगनवाड़ी केंद्र का निरीक्षण किया। यहां बच्चों के पोषण, टीकाकरण और साफ-सफाई की व्यवस्था की समीक्षा की गई। सीईओ ने कहा कि बच्चों के स्वास्थ्य और पोषण से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मानसून को देखते हुए वर्षा जल संचयन कार्यों की भी समीक्षा की गई। रेन वाटर हार्वेस्टिंग से जुड़े निर्माण कार्यों को समयसीमा में पूरा करने के निर्देश देते हुए सीईओ ने कहा कि बारिश से पहले जल संरक्षण की व्यवस्थाएं मजबूत होना जरूरी है।

ग्राम पंचायत मसनगांव के ग्राम गांगला में सीईओ ने ग्रामीणों के साथ चौपाल लगाकर पेयजल समस्याओं पर चर्चा की। ग्रामीणों ने पानी सप्लाई और अन्य मूलभूत सुविधाओं से जुड़ी समस्याएं सामने रखीं, जिस पर उन्होंने पीएचई विभाग के अधिकारियों को तत्काल समाधान के निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान ग्राम पंचायत कड़ोला में निर्माणाधीन नवीन पंचायत भवन ‘अटल सेवा सदन’ का भी जायजा लिया गया। सीईओ ने निर्माण कार्य में तेजी लाने और गुणवत्ता बनाए रखने के निर्देश देते हुए कहा कि भवन को जल्द जनता को समर्पित किया जाए।

स्वच्छ भारत मिशन के तहत ठोस और तरल कचरा प्रबंधन को लेकर भी प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। सीईओ ने सभी ग्राम पंचायतों को कचरा वाहन खरीदने के निर्देश देते हुए कहा कि हर पंचायत को कचरा मुक्त बनाना प्राथमिकता होनी चाहिए।

आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल

  1. जब ग्रामीणों को चौपाल में पेयजल समस्याएं बतानी पड़ रही हैं, तो क्या यह नहीं दर्शाता कि संबंधित विभाग पहले से जमीनी निगरानी करने में विफल रहा है?
  2. कई पंचायतों में निर्माण कार्य वर्षों तक अधूरे रहते हैं, तो ‘अटल सेवा सदन’ जैसे प्रोजेक्ट समय पर पूरे कराने के लिए क्या जवाबदेही तय की गई है?
  3. स्वच्छ भारत मिशन के तहत कचरा वाहन खरीदने के निर्देश तो दिए गए, लेकिन क्या ग्राम पंचायतों के पास उनके संचालन और रखरखाव के लिए पर्याप्त बजट भी उपलब्ध है?

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