| सुकमा; “जंगलों के बीच उतरा ‘सुशासन’: जब कलेक्टर खुद पहुंचे गांव, तब बदला सुकमा का मिजाज |
सुकमा - नक्सल प्रभाव और दूरस्थ पहचान वाले सुकमा जिले में अब प्रशासनिक व्यवस्था की नई तस्वीर दिखाई देने लगी है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में चल रहे ‘सुशासन तिहार’ और ‘बस्तर मुन्ने’ अभियान ने गांवों तक शासन की सीधी पहुंच सुनिश्चित करने का दावा किया है। खास बात यह है कि केवल कर्मचारी ही नहीं, बल्कि खुद कलेक्टर अमित कुमार और जिला पंचायत सीईओ मुकुन्द ठाकुर सुदूर गांवों में पहुंचकर लोगों की समस्याएं सुन रहे हैं और मौके पर समाधान कराने में जुटे हैं। प्रशासन के इस बदले हुए रवैये ने ग्रामीणों के बीच सरकार के प्रति भरोसा बढ़ाया है।
30 अप्रैल से शुरू हुए इस अभियान के तहत जिले के गांवों में लगातार शिविर लगाए जा रहे हैं। इन शिविरों में सभी विभागों के अधिकारी और मैदानी कर्मचारी एक ही स्थान पर मौजूद रहकर ग्रामीणों की समस्याओं का समाधान कर रहे हैं। इससे लोगों को अलग-अलग दफ्तरों के चक्कर लगाने से राहत मिली है। ग्रामीणों का कहना है कि पहले छोटे-छोटे कामों के लिए कई दिनों तक सरकारी कार्यालयों के बाहर भटकना पड़ता था, लेकिन अब प्रशासन खुद गांव तक पहुंच रहा है।
स्वास्थ्य विभाग ने शिविरों के दौरान बड़ी संख्या में लोगों को सरकारी योजनाओं से जोड़ा है। प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत 1013 लोगों को लाभ दिया गया, जबकि 114 आयुष्मान कार्ड बनाए गए। इसके अलावा सैकड़ों ग्रामीणों को दवाइयां भी वितरित की गईं। खाद्य विभाग ने 414 राशन कार्ड जारी किए, वहीं राजस्व विभाग द्वारा जाति, निवास और जन्म प्रमाण पत्र बनाए गए। पंचायत विभाग की ओर से जॉब कार्ड वितरण, शौचालय निर्माण और प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत हितग्राहियों को नए मकानों की चाबियां सौंपने जैसे कार्य भी किए गए।
महिला एवं बाल विकास विभाग की गतिविधियां भी शिविरों में आकर्षण का केंद्र बनी रहीं। ‘सक्षम आंगनबाड़ी और पोषण 2.0’ अभियान के तहत हजारों ग्रामीणों को लाभ पहुंचाया गया। महतारी वंदन योजना के अंतर्गत बड़ी संख्या में महिलाओं का ई-केवाईसी कार्य पूरा किया गया। शिविरों में गर्भवती महिलाओं की गोद भराई और बच्चों का अन्नप्राशन संस्कार भी कराया गया, जिससे कार्यक्रम केवल सरकारी प्रक्रिया तक सीमित न रहकर सामाजिक जुड़ाव का माध्यम भी बन गया।
सुकमा प्रशासन का दावा है कि इन शिविरों के जरिए शासन की योजनाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। कृषि, श्रम और ई-गवर्नेंस से जुड़ी योजनाओं के माध्यम से भी हजारों ग्रामीणों को मौके पर लाभान्वित किया गया है। प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि सुशासन तिहार का उद्देश्य केवल योजनाओं का प्रचार नहीं, बल्कि लोगों की वास्तविक समस्याओं का समाधान करना है। हालांकि, इन शिविरों की सफलता के बीच यह सवाल भी उठ रहे हैं कि क्या यह सक्रियता केवल अभियान तक सीमित रहेगी या भविष्य में भी ग्रामीणों को इसी तरह त्वरित सेवाएं मिलती रहेंगी। फिलहाल, सुकमा के गांवों में प्रशासन की बढ़ती मौजूदगी ने ग्रामीणों में उम्मीद जरूर जगाई है।
आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल
- सुशासन तिहार में हजारों लोगों को लाभ देने का दावा किया जा रहा है, लेकिन क्या प्रशासन के पास यह डेटा है कि इनमें से कितने मामलों का स्थायी समाधान हुआ और कितने केवल औपचारिकता बनकर रह गए?
- जब कलेक्टर और वरिष्ठ अधिकारी खुद गांवों में पहुंच रहे हैं, तो क्या यह माना जाए कि पहले स्थानीय स्तर की प्रशासनिक व्यवस्था ग्रामीणों की समस्याएं हल करने में पूरी तरह नाकाम रही थी?
- सुकमा के जिन इलाकों में आज भी सड़क, स्वास्थ्य और इंटरनेट जैसी बुनियादी सुविधाएं कमजोर हैं, वहां क्या सरकार शिविरों से आगे बढ़कर स्थायी विकास मॉडल लागू करने की कोई समयबद्ध योजना तैयार कर रही है?