सुकमा; जहां कभी प्रशासन पहुंचने से कतराता था, वहां अब बंट रहे प्रमाण पत्र:

सुकमा; जहां कभी प्रशासन पहुंचने से कतराता था, वहां अब बंट रहे प्रमाण पत्र:

सुकमा - दीपिका सोरी की मौजूदगी में सुकमा जिले के कोंटा विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत किस्ताराम और सिंदूरगुड़ा में आयोजित सुशासन तिहार शिविर गुरुवार को चर्चा का केंद्र बने रहे। नक्सल प्रभाव और दूरस्थ पहचान वाले इन इलाकों में पहली बार बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने प्रशासन को अपने बीच सक्रिय रूप से काम करते देखा। शिविरों में ग्रामीणों को मौके पर ही जन्म प्रमाण पत्र, जाति प्रमाण पत्र और निवास प्रमाण पत्र वितरित किए गए, जिससे लोगों में खासा उत्साह देखने को मिला।

प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में चलाए जा रहे सुशासन तिहार के तहत प्रशासन अब गांव-गांव पहुंचकर लोगों की समस्याओं का समाधान करने का दावा कर रहा है। इसी कड़ी में महिला आयोग सदस्य दीपिका सोरी ने किस्ताराम और सिंदूरगुड़ा शिविरों का औचक निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। उन्होंने ग्रामीणों से सीधा संवाद किया और अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए कि किसी भी जरूरतमंद व्यक्ति को योजना के लाभ से वंचित न रहना पड़े।

शिविरों में सबसे अधिक खुशी उन ग्रामीणों में देखने को मिली जिन्हें वर्षों से लंबित दस्तावेज मौके पर उपलब्ध कराए गए। छोटे बच्चों को जन्म प्रमाण पत्र सौंपते हुए दीपिका सोरी ने कहा कि सरकार की मंशा प्रशासन को जनता के दरवाजे तक पहुंचाने की है, ताकि दूरस्थ क्षेत्रों के लोगों को दफ्तरों के चक्कर न लगाने पड़ें। ग्रामीणों ने भी माना कि इससे समय और पैसे दोनों की बचत हो रही है।

सुशासन शिविर केवल प्रमाण पत्र वितरण तक सीमित नहीं रहे। महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से गर्भवती महिलाओं की पारंपरिक गोद भराई की रस्म भी आयोजित की गई। इसके साथ ही कई बच्चों का अन्नप्राशन संस्कार कराया गया, जिससे शिविर का माहौल पूरी तरह सामाजिक और पारिवारिक नजर आया। अधिकारियों ने महिलाओं और बच्चों को पोषण, स्वास्थ्य और सरकारी योजनाओं की जानकारी भी दी।

ग्रामीणों ने कहा कि पहले छोटी-छोटी समस्याओं के समाधान के लिए उन्हें ब्लॉक और तहसील कार्यालयों के कई चक्कर लगाने पड़ते थे, लेकिन अब प्रशासन खुद गांव तक पहुंच रहा है। स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि इस तरह के शिविर लगातार लगते रहे तो दूरस्थ इलाकों में शासन के प्रति भरोसा और मजबूत होगा। सुकमा जैसे संवेदनशील जिले में आयोजित ये शिविर प्रशासन के लिए केवल सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि विश्वास बहाली की कोशिश के रूप में भी देखे जा रहे हैं। सरकार जहां इसे सुशासन की नई पहल बता रही है, वहीं ग्रामीणों को उम्मीद है कि भविष्य में भी इसी तरह उनकी समस्याओं का त्वरित समाधान होता रहेगा।

आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल

  1. किस्ताराम और सिंदूरगुड़ा जैसे संवेदनशील इलाकों में वर्षों से बुनियादी प्रमाण पत्र लंबित क्यों थे, क्या पहले प्रशासनिक पहुंच पूरी तरह विफल रही थी?
  2. सुशासन शिविर खत्म होने के बाद ग्रामीणों की शिकायतों और लंबित मामलों की मॉनिटरिंग कौन करेगा, और क्या इसके लिए कोई स्थायी व्यवस्था बनाई गई है?
  3. सरकार सुशासन तिहार को बड़ी सफलता बता रही है, लेकिन क्या इन गांवों में स्वास्थ्य, सड़क, शिक्षा और नेटवर्क जैसी मूलभूत सुविधाओं की स्थिति पर भी कोई समयबद्ध कार्ययोजना है या शिविर केवल दस्तावेज वितरण तक सीमित रहेंगे?

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