![]() |
| उज्जैन; अब खाद के लिए लाइन नहीं, मोबाइल चलेगा!” किसानों के लिए शुरू हुई ई-टोकन क्रांति |
उज्जैन - खाद के लिए लंबी कतारों और घंटों इंतजार की परेशानी झेलने वाले किसानों के लिए अब बड़ी राहत की खबर है। मुख्यमंत्री मोहन यादव के निर्देश पर प्रदेश में किसानों के लिए ई-टोकन प्रणाली शुरू की गई है, जिसके जरिए किसान अब घर बैठे मोबाइल से खाद के लिए ऑनलाइन टोकन जनरेट कर सकेंगे। उज्जैन संभागायुक्त आशीष सिंह और कलेक्टर रौशन कुमार सिंह ने कृषि उपज मंडी स्थित किसान सेवा केंद्र पहुंचकर किसानों से चर्चा की और ई-टोकन प्रक्रिया का निरीक्षण किया। संभागायुक्त ने मौके पर स्वयं कंप्यूटर पर किसान का पंजीयन कर पूरी प्रक्रिया को समझा और अधिकारियों को निर्देश दिए कि हर किसान तक इस सुविधा की जानकारी पहुंचाई जाए।
नई व्यवस्था के तहत किसान एमपी कृषि पोर्टल या बलराम ऐप के माध्यम से आधार कार्ड और ओटीपी की मदद से 24 घंटे कभी भी ई-टोकन जनरेट कर सकते हैं। टोकन जारी होने के बाद किसान दो दिन के भीतर संबंधित समिति, एमपी एग्रो, डीएमओ केंद्र या निजी विक्रेता से खाद प्राप्त कर सकेंगे। प्रशासन का दावा है कि इस ऑनलाइन व्यवस्था से खाद वितरण में पारदर्शिता आएगी और यह जानकारी भी ऑनलाइन उपलब्ध रहेगी कि किस किसान को कितना खाद मिला और किस केंद्र पर कितना स्टॉक बचा है। यदि कोई किसान तय समय में खाद नहीं लेता तो टोकन स्वतः निरस्त हो जाएगा और उसे दोबारा आवेदन करना होगा।
संभागायुक्त आशीष सिंह ने कहा कि “खाद के लिए कोई भी किसान परेशान नहीं होना चाहिए।” उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि गांव-गांव जाकर किसानों को ई-टोकन प्रणाली की जानकारी दें, ताकि वे स्वयं मोबाइल से टोकन निकाल सकें। प्रशासन के अनुसार यह व्यवस्था किसानों को ब्लैक मार्केटिंग, भीड़ और अव्यवस्था से राहत दिलाने के उद्देश्य से लागू की गई है। हालांकि ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट, डिजिटल साक्षरता और तकनीकी समस्याओं को लेकर कई सवाल भी उठ रहे हैं।
आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल
- जिन ग्रामीण किसानों के पास स्मार्टफोन या इंटरनेट सुविधा नहीं है, उनके लिए ई-टोकन व्यवस्था कितनी व्यावहारिक साबित होगी?
- क्या सरकार यह गारंटी दे सकती है कि ऑनलाइन सिस्टम लागू होने के बाद भी खाद की कालाबाजारी और कृत्रिम कमी पूरी तरह खत्म हो जाएगी?
- यदि सर्वर डाउन हो जाए या तकनीकी गड़बड़ी के कारण किसान समय पर टोकन न ले पाए, तो उसकी जिम्मेदारी किसकी होगी?
