रतलाम; नकली खाद बेचोगे तो दुकान होगी सील!” कृषि विभाग का ताबड़तोड़ एक्शन, कई दुकानों पर छापा

रतलाम; नकली खाद बेचोगे तो दुकान होगी सील!” कृषि विभाग का ताबड़तोड़ एक्शन, कई दुकानों पर छापा

रतलाम - खरीफ सीजन शुरू होते ही नकली खाद, बीज और कीटनाशक बेचने वालों पर प्रशासन ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। कलेक्टर मिशा सिंह के निर्देश पर जिले में चलाए जा रहे गुण नियंत्रण सघन अभियान के तहत कृषि विभाग की टीमों ने अलग-अलग विकासखंडों में उर्वरक और बीज विक्रेताओं के यहां औचक निरीक्षण कर बड़ी कार्रवाई की। विकासखंड सैलाना में निरीक्षण के दौरान सरवन स्थित सचिन कृषि सेवा केन्द्र बंद पाया गया। बताया गया कि स्थानीय किसान सुल्तान सिंह ई-टोकन लेकर खाद लेने पहुंचे थे, लेकिन फर्म संचालक बिना सूचना दुकान बंद कर चले गए। इस पर उर्वरक निरीक्षक एवं वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी यादवेन्द्र सिंह निनामा ने तत्काल कार्रवाई करते हुए दुकान को सील कर दिया।

निरीक्षण के दौरान पीओएस मशीन के स्टॉक का मिलान ई-विकास प्रणाली के ई-उर्वरक ऐप से किया गया। कृषि विभाग ने सैलाना, जावरा, रतलाम और आलोट क्षेत्र की कई कृषि सेवा केंद्रों से उर्वरकों के नमूने लेकर जांच के लिए प्रयोगशालाओं में भेजे हैं। उप संचालक कृषि आर.के. सिंह ने स्पष्ट कहा कि यदि किसी भी नमूने में खाद, बीज या कीटनाशक अमानक पाए जाते हैं तो संबंधित विक्रेताओं के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने चेतावनी दी कि किसानों के साथ धोखाधड़ी करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।

जांच अभियान के तहत जावरा क्षेत्र में कई दुकानों से 4 नमूने, रतलाम क्षेत्र से 6 नमूने और आलोट क्षेत्र से 10 नमूने लिए गए। अधिकारियों ने कहा कि यह अभियान लगातार जारी रहेगा। कृषि विभाग ने किसानों से अपील की है कि वे केवल पंजीकृत विक्रेताओं से ही बीज और खाद खरीदें तथा खरीद का पक्का बिल जरूर लें। विभाग ने बताया कि बिल में बीज की किस्म, कंपनी का नाम, बैच नंबर, उत्पादन तिथि और कीमत स्पष्ट रूप से दर्ज होनी चाहिए।

विभाग ने कपास बीज की सरकारी दरें भी जारी की हैं। अधिकारियों ने किसानों को मौसम की अनिश्चितताओं को देखते हुए एक ही फसल या एक ही किस्म पर निर्भर न रहने की सलाह दी है। निरीक्षण के दौरान अनुविभागीय कृषि अधिकारी नानसिंह मंडलोई, सोहन सिंह राठौर सहित कई कृषि अधिकारी मौजूद रहे।

आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल

  1. क्या प्रशासन यह बताएगा कि पिछले वर्षों में नकली खाद और बीज बेचने वाले कितने विक्रेताओं के लाइसेंस स्थायी रूप से रद्द किए गए?
  2. जब किसान हर सीजन में नकली खाद-बीज की शिकायत करते हैं, तो विभाग की निगरानी व्यवस्था पहले से प्रभावी क्यों नहीं रही?
  3. क्या प्रयोगशाला जांच रिपोर्ट सार्वजनिक की जाएगी ताकि किसान जान सकें कि कौन-कौन सी कंपनियों या दुकानों के नमूने अमानक पाए गए?

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