| सक्ती; मल्दा शिविर में एक ही जगह मिलेंगे योजनाओं के लाभ और शिकायतों का निपटारा |
सक्ती - मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की मंशानुरूप चलाए जा रहे ‘सुशासन तिहार 2026’ के तहत जिले में लगातार समाधान शिविर आयोजित किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में 29 मई 2026 को जनपद पंचायत जैजैपुर क्षेत्र अंतर्गत हायर सेकेंडरी स्कूल मल्दा में विशेष समाधान शिविर लगाया जाएगा, जहां ग्रामीणों की समस्याओं का मौके पर निराकरण करने के साथ-साथ शासन की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ भी दिया जाएगा।
प्रशासन के अनुसार शिविर सुबह 10 बजे से दोपहर 2 बजे तक संचालित होगा। इस दौरान आम नागरिकों से आवेदन प्राप्त किए जाएंगे और पात्र हितग्राहियों को विभिन्न योजनाओं से लाभान्वित किया जाएगा। ग्रामीणों को अलग-अलग सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने से राहत देने के उद्देश्य से कई विभागों के अधिकारी और कर्मचारी एक ही स्थान पर मौजूद रहेंगे।
जारी आदेश के मुताबिक इस शिविर में मल्दा, अमोदा, करही, किकिरदा, कैथा, गुडरूकला, गुंजियाबोड़, घिवरा, चिस्दा, झरप, डोटमा, डोमाडीह, देवरीमठ, धमनी, नगारीडीह, परसदा, पेंड्री, बरेकेलकला, लालमाटी और हसौद सहित 20 ग्राम पंचायतों के ग्रामीण शामिल होंगे। प्रशासन का दावा है कि शिविर के माध्यम से अधिक से अधिक जरूरतमंद लोगों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाया जाएगा।
शिविर के सफल संचालन और व्यवस्थाओं की निगरानी के लिए नोडल सहायक अभियंता को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि शिविर में आने वाले लोगों की समस्याओं का त्वरित समाधान सुनिश्चित किया जाए और योजनाओं की जानकारी सरल तरीके से उपलब्ध कराई जाए।
प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि सुशासन तिहार का उद्देश्य केवल आवेदन लेना नहीं, बल्कि ग्रामीणों तक शासन की पहुंच को मजबूत करना और समस्याओं का मौके पर समाधान करना है। ग्रामीण क्षेत्रों में ऐसे शिविरों के जरिए सरकार और जनता के बीच सीधे संवाद को बढ़ावा देने की कोशिश की जा रही है।
आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल
- समाधान शिविरों में मिलने वाले आवेदनों के निराकरण की क्या समयसीमा तय की गई है, और यदि किसी विभाग ने समय पर समाधान नहीं किया तो जिम्मेदारी किसकी होगी?
- क्या प्रशासन के पास पिछले समाधान शिविरों का ऐसा डेटा है जिससे पता चले कि कितने आवेदनों का स्थायी समाधान हुआ और कितने अब भी लंबित हैं?
- ग्रामीणों को बार-बार शिविरों के जरिए योजनाओं की जानकारी देने की जरूरत क्यों पड़ रही है, क्या नियमित प्रशासनिक व्यवस्था गांव स्तर पर प्रभावी ढंग से काम नहीं कर पा रही?