![]() |
| आलीराजपुर; बरसात में कट जाते थे गांव… अब करोड़ों के पुल बदलेंगे आदिवासी अंचल की तस्वीर |
आलीराजपुर - जिले के ग्रामीण और आदिवासी अंचलों में लंबे समय से चली आ रही आवागमन और बिजली की समस्याओं को दूर करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। अनुसूचित जाति कल्याण मंत्री नागरसिंह चौहान ने शुक्रवार को करोड़ों रुपये की लागत वाले दो पुल निर्माण कार्यों का भूमि पूजन और विद्युत डीपी का लोकार्पण कर क्षेत्र को विकास की नई सौगात दी। कार्यक्रम के दौरान मंत्री ने आगलगोट-बिजोरिया पुल और पिथनपुर पुल निर्माण कार्य की शुरुआत कराई। इन दोनों पुलों की कुल लागत 7 करोड़ 29 लाख रुपये से अधिक बताई गई है। ग्रामीणों का कहना है कि बरसात के दौरान नदी-नालों में जलभराव होने से गांवों का संपर्क टूट जाता था और लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता था। स्थानीय लोगों के अनुसार स्कूली बच्चों को पढ़ाई के लिए जोखिम उठाकर नदी पार करनी पड़ती थी, वहीं मरीजों को अस्पताल पहुंचाने में घंटों की देरी होती थी। किसानों को अपनी उपज मंडियों तक पहुंचाने में भी कठिनाई होती थी। पुल बनने के बाद अब इन समस्याओं से राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
मंत्री नागरसिंह चौहान ने कुकावाट होली फलिया में लगभग 6 लाख रुपये लागत से स्थापित विद्युत डीपी का लोकार्पण भी किया। ग्रामीणों ने बताया कि क्षेत्र में लंबे समय से लो वोल्टेज और बिजली कटौती की समस्या बनी हुई थी, जिससे घरेलू कामकाज और सिंचाई दोनों प्रभावित हो रहे थे। नई डीपी लगने से किसानों को सिंचाई पंप चलाने और ग्रामीणों को स्थिर बिजली आपूर्ति मिलने की उम्मीद है। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मंत्री चौहान ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार गांव, गरीब और किसानों तक विकास पहुंचाने के लिए लगातार काम कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य अंतिम व्यक्ति तक सड़क, बिजली, पानी, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाएं पहुंचाना है। ग्रामीणों ने क्षेत्र में विकास कार्यों की शुरुआत को राहत भरा कदम बताया, लेकिन अब उनकी नजर इस बात पर है कि ये परियोजनाएं तय समय में और गुणवत्ता के साथ पूरी हों।
