आलीराजपुर; मासिक धर्म पर संकोच नहीं संवाद जरूरी, कलेक्टर ने दिया समाज को बड़ा संदेश

आलीराजपुर; मासिक धर्म पर संकोच नहीं संवाद जरूरी, कलेक्टर ने दिया समाज को बड़ा संदेश

आलीराजपुर - मासिक धर्म को लेकर समाज में व्याप्त संकोच, मिथकों और वर्जनाओं को तोड़ने की दिशा में आलीराजपुर जिला प्रशासन ने एक महत्वपूर्ण पहल की है। विश्व माहवारी स्वच्छता दिवस के अवसर पर जिले में पहली बार व्यापक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें महिलाओं और किशोरियों के स्वास्थ्य, सम्मान और सशक्तिकरण को केंद्र में रखते हुए “मिशन सखी स्वाभिमान” का शुभारंभ किया गया।

कार्यक्रम के दौरान कलेक्टर नीतू माथुर ने कलेक्ट्रेट परिसर में स्थापित गरिमा कक्ष का उद्घाटन किया। महिलाओं के लिए अनुकूल, सुरक्षित और सम्मानजनक वातावरण उपलब्ध कराने के उद्देश्य से तैयार किया गया यह कक्ष जिले की एक अभिनव पहल माना जा रहा है। प्रशासन का मानना है कि यह मॉडल अन्य सार्वजनिक संस्थानों के लिए भी प्रेरणास्रोत बन सकता है।

"मासिक धर्म शर्म नहीं, सम्मान का विषय"

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कलेक्टर नीतू माथुर ने कहा कि मासिक धर्म एक प्राकृतिक जैविक प्रक्रिया है, जिसे समाज में आज भी कई जगह संकोच और गलत धारणाओं के साथ देखा जाता है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि "यह शर्म की नहीं, गरिमा की बात है।" उन्होंने कहा कि माहवारी से जुड़ी वर्जनाओं, भेदभावपूर्ण व्यवहार और अस्पृश्यता जैसी कुप्रथाओं को समाप्त करना समय की आवश्यकता है। इस विषय पर केवल महिलाओं और किशोरियों को ही नहीं, बल्कि पुरुषों और लड़कों को भी जागरूक करने की जरूरत है ताकि समाज में संवेदनशीलता और समझ विकसित हो सके।

क्यों मनाया जाता है 28 मई को यह दिवस

कार्यक्रम में उपस्थित यूनिसेफ के जल एवं स्वच्छता सलाहकार शाश्वत नायक ने विश्व माहवारी स्वच्छता दिवस के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि महिलाओं का औसत मासिक धर्म चक्र 28 दिनों का होता है और सामान्यतः इसकी अवधि पांच दिनों की होती है, इसी कारण 28 मई को यह दिवस मनाया जाता है। उन्होंने कहा कि माहवारी कोई बीमारी नहीं, बल्कि एक स्वाभाविक जैविक प्रक्रिया है। आवश्यकता केवल स्वच्छता, स्वास्थ्य संबंधी जानकारी और खुले संवाद की है।

‘मिशन सखी स्वाभिमान’ से बदलेगी सोच

मिशन सखी स्वाभिमान को शिक्षा विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग, स्वास्थ्य विभाग और राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) के संयुक्त प्रयासों से विकसित किया गया है। इस अभियान को यूनिसेफ और ट्रांसफॉर्म रूरल इंडिया फाउंडेशन (TRI) का सहयोग भी प्राप्त है। पहले चरण में जिले के 25 विद्यालयों का चयन किया गया है, जहां मासिक धर्म स्वच्छता प्रबंधन, जागरूकता कार्यक्रम, किशोर-किशोरियों की सहभागिता और सामुदायिक संवेदनशीलता बढ़ाने के लिए विशेष गतिविधियां आयोजित की जाएंगी।

सामुदायिक सहभागिता पर जोर

कार्यक्रम में लगभग 200 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया, जिनमें स्व-सहायता समूहों की महिलाएं, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, आशा कार्यकर्ता, किशोरियां, किशोर और स्वास्थ्य कर्मी शामिल थे। कार्यक्रम को सहभागितापूर्ण बनाने के लिए विभिन्न खेल, संवाद सत्र और जागरूकता गतिविधियां आयोजित की गईं। अंत में सभी प्रतिभागियों ने मासिक धर्म गरिमा शपथ ली और रेड डॉट चैलेंज के तहत हाथों पर लाल बिंदु बनाकर माहवारी के प्रति सम्मान और जागरूकता का संदेश दिया। यह पहल केवल स्वास्थ्य जागरूकता तक सीमित नहीं है, बल्कि महिलाओं की गरिमा, लैंगिक समानता और सामाजिक सोच में सकारात्मक बदलाव लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल

1. मासिक धर्म से जुड़े मिथकों को खत्म करने की बात हो रही है, लेकिन जिले के ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में अब भी कितनी किशोरियां माहवारी के दौरान स्कूल छोड़ने या अनुपस्थित रहने को मजबूर होती हैं?

2. ‘मिशन सखी स्वाभिमान’ के तहत 25 विद्यालयों का चयन किया गया है। जिले के बाकी सैकड़ों स्कूलों तक यह पहल कब पहुंचेगी और इसके लिए बजट व कार्ययोजना क्या है?

3. माहवारी स्वच्छता पर जागरूकता अभियान चल रहे हैं, लेकिन क्या जिले की सभी किशोरियों और महिलाओं को सस्ती या निःशुल्क सैनिटरी सामग्री उपलब्ध हो रही है? यदि नहीं, तो यह अभियान जमीनी स्तर पर कितना प्रभावी साबित होगा?

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