रीवा; पीरियड्स पर चुप्पी नहीं, जागरूकता जरूरी!” आंगनवाड़ी केंद्रों में माहवारी स्वच्छता पर खुलकर हुई चर्चा

रीवा; पीरियड्स पर चुप्पी नहीं, जागरूकता जरूरी!” आंगनवाड़ी केंद्रों में माहवारी स्वच्छता पर खुलकर हुई चर्चा

रीवा - माहवारी को लेकर समाज में फैली झिझक और गलत धारणाओं को खत्म करने के उद्देश्य से रीवा जिले में अंतरराष्ट्रीय माहवारी स्वच्छता दिवस पर विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। महिला एवं बाल विकास विभाग के नेतृत्व में जिले के विभिन्न आंगनवाड़ी केंद्रों में किशोरियों और महिलाओं को माहवारी स्वच्छता, व्यक्तिगत साफ-सफाई और स्वास्थ्य संबंधी महत्वपूर्ण जानकारियां दी गईं। बोदाबाग स्थित मुरलीधर कॉलोनी आंगनवाड़ी केंद्र में आयोजित कार्यक्रम में बड़ी संख्या में किशोरी बालिकाओं और महिलाओं ने भाग लिया। कार्यक्रम का आयोजन महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा किया गया, जिसमें अहिंसा वेलफेयर सोसाइटी और समग्र जन चेतना विकास परिषद की सहभागिता रही।

कार्यक्रम में बाल संरक्षण अधिकारी स्वाती श्रीवास्तव, शिक्षिका मनु शर्मा और सामाजिक कार्यकर्ता सुमित सिंह ने किशोरियों को माहवारी के दौरान स्वच्छता बनाए रखने, संक्रमण से बचाव और मानसिक झिझक दूर करने के बारे में जानकारी दी। विशेषज्ञों ने कहा कि माहवारी एक प्राकृतिक प्रक्रिया है, लेकिन आज भी ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में इससे जुड़े कई मिथक और सामाजिक संकोच मौजूद हैं। सही जानकारी और जागरूकता से महिलाओं और किशोरियों के स्वास्थ्य को बेहतर बनाया जा सकता है।

कार्यक्रम के दौरान किशोरियों और महिलाओं को सेनेटरी पैड भी वितरित किए गए। रोल प्ले, स्लोगन और संवादात्मक गतिविधियों के जरिए किशोरियों को आसान भाषा में माहवारी स्वच्छता की जानकारी दी गई। आयोजन के माध्यम से यह संदेश देने की कोशिश की गई कि पीरियड्स कोई शर्म का विषय नहीं बल्कि स्वास्थ्य और जागरूकता का विषय है।

जिला कार्यक्रम अधिकारी नयन सिंह के निर्देशन में जिले के जवा ब्लॉक, त्यौंथर ब्लॉक और पंचायत सोनौरा सहित कई आंगनवाड़ी केंद्रों में भी ऐसे कार्यक्रम आयोजित किए गए। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि यदि स्कूलों और गांव स्तर पर लगातार इस तरह के जागरूकता अभियान चलाए जाएं, तो किशोरियों में एनीमिया, संक्रमण और मानसिक तनाव जैसी समस्याओं को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल

  1. जब माहवारी स्वच्छता को लेकर लगातार अभियान चलाए जा रहे हैं, तो आज भी ग्रामीण क्षेत्रों में बड़ी संख्या में किशोरियां सेनेटरी पैड से वंचित क्यों हैं?
  2. क्या सरकार स्कूलों और आंगनवाड़ी केंद्रों में मुफ्त सेनेटरी पैड वितरण की स्थायी व्यवस्था लागू करने जा रही है?
  3. माहवारी को लेकर जागरूकता कार्यक्रमों के बावजूद क्या प्रशासन ने यह आकलन किया है कि कितनी किशोरियां अब भी शर्म और सामाजिक दबाव के कारण स्कूल छोड़ने को मजबूर होती हैं?

Post a Comment

Previous Post Next Post