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| ग्वालियर; आधी रात अस्पताल पहुँची कलेक्टर… खुल गई स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल! |
ग्वालियर - सरकारी अस्पतालों की स्वास्थ्य सेवाओं की वास्तविक स्थिति जानने के लिए कलेक्टर रुचिका चौहान मंगलवार देर रात अचानक मुरार स्थित जच्चा खाना अस्पताल पहुंच गईं। आधी रात हुए इस औचक निरीक्षण से अस्पताल स्टाफ में हड़कंप मच गया। निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने अस्पताल में भर्ती महिलाओं से सीधे बातचीत कर उपचार, दवाइयों, सुविधाओं और स्टाफ के व्यवहार की जानकारी ली। उन्होंने विभिन्न वार्डों का निरीक्षण करते हुए साफ-सफाई, उपचार व्यवस्था और मरीजों को उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं का जायजा लिया।
कलेक्टर रुचिका चौहान ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि मरीजों को समय पर उपचार और जरूरी स्वास्थ्य सुविधाएं हर हाल में उपलब्ध कराई जाएं। उन्होंने कहा कि मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। निरीक्षण के दौरान एक चिकित्सक और एक स्टाफ नर्स की लापरवाही सामने आने पर कलेक्टर ने दोनों के खिलाफ कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं में लापरवाही करने वाले कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
निरीक्षण के समय मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी सचिन श्रीवास्तव भी मौजूद रहे। कलेक्टर ने अस्पताल प्रबंधन को निर्देश दिए कि मरीजों की समस्याओं का त्वरित समाधान किया जाए और अस्पताल में संवेदनशीलता के साथ सेवाएं दी जाएं। सरकारी अस्पतालों में व्यवस्थाओं को लेकर लगातार शिकायतें सामने आती रही हैं। ऐसे में कलेक्टर का देर रात अस्पताल पहुंचना प्रशासनिक सख्ती का संकेत माना जा रहा है। हालांकि सवाल यह भी उठ रहे हैं कि क्या औचक निरीक्षणों के बाद वास्तव में जमीनी स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं में स्थायी सुधार हो पाएगा।
आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल
- यदि अस्पतालों में लापरवाही इतनी गंभीर है कि कलेक्टर को आधी रात निरीक्षण करना पड़ रहा है, तो नियमित मॉनिटरिंग व्यवस्था आखिर कितनी प्रभावी है?
- क्या केवल नोटिस जारी करने से स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार आएगा, या जिम्मेदार कर्मचारियों पर ठोस दंडात्मक कार्रवाई भी होगी?
- मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को सर्वोच्च प्राथमिकता बताने के बावजूद कई सरकारी अस्पतालों में स्टाफ और संसाधनों की कमी अब तक क्यों बनी हुई है?
