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| निवाड़ी; थाने में पुलिस नहीं, पक्षियों की प्यास बुझाने की मुहिम दिखी!” ‘सकोरा अभियान’ बना इंसानियत का संदेश |
निवाड़ी - जहां एक ओर भीषण गर्मी इंसानों के साथ-साथ मूक पक्षियों के लिए भी संकट बनती जा रही है, वहीं निवाड़ी में एक अनोखी पहल समाज को संवेदनशीलता और जीव सेवा का संदेश दे रही है। शिक्षकों द्वारा चलाए जा रहे “सकोरा अभियान” के तहत थाना परिसर में पक्षियों के लिए पानी से भरे सकोरे रखे गए। यह पहल शिक्षक गिरिजाशंकर सूत्रकार के नेतृत्व में चलाई जा रही है, जिसे अब समाज के विभिन्न वर्गों का समर्थन मिलने लगा है। अभियान के तहत थाना प्रभारी जितेंद्र सिंह गुर्जर के निर्देशन में थाना परिसर में सकोरे लगाए गए, ताकि गर्मी में पक्षियों को पानी मिल सके।
थाना प्रभारी जितेंद्र सिंह गुर्जर ने कहा कि “भीषण गर्मी में पक्षियों के लिए पानी की व्यवस्था करना केवल सेवा नहीं, बल्कि मानवता और प्रकृति के प्रति हमारा नैतिक कर्तव्य है।” उन्होंने लोगों से अपने घरों, कार्यालयों और सार्वजनिक स्थानों पर भी सकोरे रखने की अपील की। अभियान के प्रेरणास्रोत गिरिजाशंकर सूत्रकार ने कहा कि “मानवता तभी सार्थक है जब हम मूक जीवों की पीड़ा को समझें। सकोरा अभियान केवल पानी रखने का कार्य नहीं, बल्कि समाज में संवेदनशीलता और प्रकृति संरक्षण की भावना जागृत करने का प्रयास है।”
इस दौरान शिवकुमार रावत ने कहा कि यह अभियान समाज में पर्यावरण संरक्षण और जीव सेवा का प्रेरणादायी संदेश दे रहा है। उन्होंने लोगों से इस मुहिम में आगे आकर भागीदारी निभाने की अपील की। कार्यक्रम में अनूप जैन, अनिल श्रीवास्तव, अनुज साहू, कमलेश यादव सहित कई लोग मौजूद रहे। भीषण गर्मी के बीच यह पहल न केवल पक्षियों के लिए राहत बन रही है, बल्कि समाज को यह संदेश भी दे रही है कि पर्यावरण संरक्षण केवल बड़े अभियानों से नहीं, बल्कि छोटी-छोटी संवेदनशील कोशिशों से भी संभव है।
आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल
- क्या पर्यावरण संरक्षण और जीव सेवा जैसे अभियानों को केवल सामाजिक पहल तक सीमित रखा जाएगा, या प्रशासन इन्हें व्यापक जनअभियान का रूप देगा?
- हर साल गर्मियों में पक्षियों और जानवरों के लिए पानी संकट की स्थिति बनती है, फिर भी नगर निकायों द्वारा स्थायी व्यवस्था क्यों नहीं की जाती?
- क्या स्कूलों और सरकारी कार्यालयों में ‘सकोरा अभियान’ को अनिवार्य जनजागरूकता कार्यक्रम के रूप में लागू करने की कोई योजना है?
