बीजापुर; शिकायत दबाने का दौर खत्म? सीएम हेल्पलाइन सिस्टम से तय होगी अफसरों की जवाबदेही

बीजापुर; शिकायत दबाने का दौर खत्म? सीएम हेल्पलाइन सिस्टम से तय होगी अफसरों की जवाबदेही

बीजापुर - आम नागरिकों की शिकायतों के त्वरित और प्रभावी निराकरण की दिशा में छत्तीसगढ़ शासन ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। इसी कड़ी में बीजापुर जिला मुख्यालय में ‘सीएम हेल्पलाइन एवं शिकायत प्रबंधन प्रणाली’ के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर जिला एवं विकासखण्ड स्तरीय अधिकारियों का एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य अधिकारियों को शिकायतों के समयबद्ध, पारदर्शी और गुणवत्तापूर्ण निराकरण के लिए प्रशिक्षित करना था। कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम में कलेक्टर विश्वदीप और जिला पंचायत सीईओ नम्रता चौबे विशेष रूप से उपस्थित रहीं। वहीं विकासखण्ड स्तर के अधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कार्यक्रम से जुड़े। प्रशिक्षण के दौरान अधिकारियों को शिकायत प्रबंधन प्रणाली की तकनीकी कार्यप्रणाली, निगरानी व्यवस्था और जवाबदेही तंत्र की विस्तृत जानकारी दी गई।

कलेक्टर विश्वदीप ने कहा कि मुख्यमंत्री हेल्पलाइन के माध्यम से नागरिकों की समस्याओं का प्रभावी समाधान सुनिश्चित किया जाएगा। उन्होंने बताया कि शासन द्वारा सुशासन की अवधारणा को मजबूत करने के लिए एक ऐसा तंत्र विकसित किया जा रहा है, जिसमें प्रत्येक शिकायत का समय-सीमा के भीतर पारदर्शी और जवाबदेह तरीके से निराकरण किया जा सके। उन्होंने कहा कि ‘नागरिक प्रथम’ की भावना पर आधारित यह पहल शासन और जनता के बीच संवाद को नई मजबूती देगी। इससे आम नागरिकों को अपनी समस्याएं सीधे शासन तक पहुंचाने का अवसर मिलेगा और प्रशासनिक कार्यप्रणाली में पारदर्शिता बढ़ेगी। कलेक्टर ने अधिकारियों से अपील की कि वे प्रशिक्षण के दौरान प्राप्त जानकारी को गंभीरता से समझें और उसे जमीनी स्तर पर प्रभावी रूप से लागू करें।

प्रशिक्षण कार्यक्रम में राज्य स्तर से गठित अधिकारियों के प्रशिक्षण दल के प्रमुख एवं सुशासन एवं अभिसरण विभाग के सलाहकार आर.के. शर्मा ने प्रस्तुतीकरण के माध्यम से सीएम हेल्पलाइन की पूरी कार्यप्रणाली समझाई। उन्होंने बताया कि शिकायतों के निराकरण में तकनीकी दक्षता के साथ-साथ संवेदनशील दृष्टिकोण भी जरूरी है, ताकि नागरिकों को समय पर राहत मिल सके। आईटी मैनेजर सौरभ श्रीकांत ने बताया कि प्रदेश का कोई भी नागरिक टोल फ्री नंबर 1076, वेब पोर्टल, मोबाइल एप और व्हाट्सएप जैसे मल्टी चैनल माध्यमों से चौबीसों घंटे अपनी शिकायत दर्ज करा सकेगा। शिकायत दर्ज होते ही नागरिक को एक यूनिक ट्रैकिंग नंबर मिलेगा, जिसके माध्यम से वह अपनी शिकायत की स्थिति ऑनलाइन देख सकेगा।

उन्होंने बताया कि शिकायतकर्ता यह भी जान सकेगा कि उसका आवेदन किस विभाग में लंबित है, किस अधिकारी के पास प्रकरण विचाराधीन है और समाधान की प्रक्रिया किस चरण में पहुंची है। पूरी व्यवस्था तकनीक आधारित मॉनिटरिंग सिस्टम से संचालित होगी, जिससे शिकायतों के लंबित रहने की संभावना काफी हद तक कम हो जाएगी। प्रशिक्षण के दौरान यह भी बताया गया कि शिकायत के निराकरण के बाद संबंधित नागरिक से फीडबैक लिया जाएगा। यदि शिकायतकर्ता समाधान से संतुष्ट नहीं होता है तो शिकायत दोबारा सक्रिय हो जाएगी और आगे की कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। इससे केवल औपचारिक निपटारा नहीं बल्कि वास्तविक समाधान पर जोर दिया जाएगा।

अधिकारियों ने जानकारी दी कि इस पूरी प्रणाली की निगरानी सीधे मुख्यमंत्री कार्यालय और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा की जाएगी। रियल टाइम मॉनिटरिंग व्यवस्था के माध्यम से प्रशासनिक जवाबदेही बढ़ेगी और आम जनता की समस्याओं का तेजी से समाधान संभव हो सकेगा। कार्यक्रम में अपर कलेक्टर भूपेंद्र अग्रवाल, संयुक्त कलेक्टर जागेश्वर कौशल, डिप्टी कलेक्टर उत्तम सिंह पंचारी सहित विभिन्न विभागों के जिला स्तरीय अधिकारी उपस्थित रहे। वहीं विकासखण्ड स्तर के अधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े। कार्यक्रम के अंत में अधिकारियों ने सीएम हेल्पलाइन प्रणाली को जनहित में प्रभावी ढंग से लागू करने का संकल्प लिया।

आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल

1. सीएम हेल्पलाइन शुरू होने के बाद यदि कोई विभाग या अधिकारी तय समय सीमा में शिकायत का समाधान नहीं करता है, तो उसके खिलाफ क्या दंडात्मक कार्रवाई का प्रावधान है?

2. शिकायतों के पुनः सक्रिय होने की व्यवस्था तो है, लेकिन यदि किसी नागरिक को बार-बार असंतोषजनक जवाब मिलता है, तो उसकी अंतिम सुनवाई किस स्तर पर होगी?

3. बीजापुर जैसे दूरस्थ और नेटवर्क प्रभावित क्षेत्रों में जहां इंटरनेट और डिजिटल पहुंच सीमित है, वहां ग्रामीण और आदिवासी नागरिकों तक इस हेल्पलाइन व्यवस्था को प्रभावी रूप से पहुंचाने की क्या रणनीति है?

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